बंगाल के बाद महाराष्ट्र में होगा ‘खेला’? NDA के मिशन 360 की राह में शिवसेना UBT पर नजर, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

टीएमसी में अंदरूनी कलह की चर्चा तेज है। बागी गुट ने 19 सांसदों के समर्थन और NDA को समर्थन देने का दावा किया है। जानिए इस सियासी घटनाक्रम का पूरा मामला।

TMC ke 19 sansadon ke NDA ko samarthan dene ke dawe ke baad Mamata Banerjee ki party mein siyasi halchal tez ho gayi
टीएमसी में बगावत की अटकलों के बीच 19 सांसदों के एनडीए को समर्थन देने के दावों ने बंगाल की राजनीति को गरमा दिया है।

नई दिल्ली/अमर भारती। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी राजनीतिक खींचतान अब राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। पार्टी के एक बागी गुट ने दावा किया है कि लोकसभा में टीएमसी के 19 सांसद उनके साथ हैं और उन्होंने भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देने की सहमति जताई है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक अफवाह बताया है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि बागी गुट अपने दावों को आधिकारिक रूप से लोकसभा अध्यक्ष के सामने रखता है, तो यह टीएमसी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसद खुद को पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि समूह बताने की तैयारी में हैं।

संसद में संख्या बढ़ाने की कोशिश में NDA

सूत्रों के अनुसार, केंद्र की भाजपा नीत एनडीए सरकार लोकसभा में अपनी संख्या और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। सरकार की कोशिश है कि विभिन्न दलों के असंतुष्ट सांसदों का समर्थन हासिल कर महत्वपूर्ण विधेयकों और संवैधानिक संशोधनों को आसानी से पारित कराया जा सके।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले कुछ संसदीय सत्रों में विशेष बहुमत की जरूरत वाले प्रस्तावों पर सरकार को चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। ऐसे में संसद में संख्या बढ़ाना एनडीए की प्राथमिकताओं में शामिल माना जा रहा है।

बंगाल में बढ़ सकती हैं ममता बनर्जी की मुश्किलें

यदि टीएमसी के भीतर बगावत के दावे सही साबित होते हैं, तो यह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ा राजनीतिक संकट बन सकता है। हाल के दिनों में पार्टी के कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों की नाराजगी की खबरें सामने आती रही हैं, हालांकि टीएमसी लगातार इन दावों को खारिज करती रही है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के भीतर किसी भी तरह की टूट विपक्ष को मजबूत करने का काम कर सकती है।

शिवसेना (UBT) पर भी नजर

रिपोर्टों के अनुसार, महाराष्ट्र की राजनीति में भी संभावित बदलावों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। दावा किया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद भी अलग रास्ता चुन सकते हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इस तरह की किसी संभावना को नकार दिया गया है। लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के 9 सांसद हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि किसी दल में टूट होती है, तो दलबदल विरोधी कानून के प्रावधानों का पालन करना जरूरी होगा।

अभी दावे, पुष्टि बाकी

फिलहाल टीएमसी के 19 सांसदों के बागी गुट में शामिल होने और एनडीए को समर्थन देने के दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न तो लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष कोई अंतिम फैसला आया है और न ही टीएमसी नेतृत्व ने ऐसे किसी घटनाक्रम को स्वीकार किया है। इसके बावजूद इन चर्चाओं ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकेगा कि ये दावे राजनीतिक अटकलें हैं या वास्तव में विपक्षी दलों के भीतर बड़ा बदलाव होने वाला है।

यहां भी पढ़ें-

कर्नाटक CM डीके शिवकुमार ने केन्द्रीय मंत्री अमित शाह से की मुलाकात, केंद्र-राज्य सहयोग को मिली नई दिशा

UP की 200 सीटों पर AIMIM की निगाहें: असदुद्दीन ओवैसी करेंगे बहराइच से चुनावी अभियान का आगाज