डिजिटल अरेस्ट, टास्क फ्रॉड और फर्जी निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह के मास्टरमाइंड गणेश काळे को पिंपरी-चिंचवड़ साइबर पुलिस ने इंटरपोल की मदद से गिरफ्तार किया।

नई दिल्ली/अमर भारती। डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाओं और ऑनलाइन टास्क जॉब के नाम पर देशभर के लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह के मास्टरमाइंड को पिंपरी-चिंचवड़ साइबर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी दुबई और थाईलैंड से साइबर फ्रॉड का पूरा नेटवर्क संचालित कर रहा था। उसकी गिरफ्तारी इंटरपोल और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सहयोग से संभव हो सकी।
साइबर पुलिस के हत्थे चढ़ा आऱोपी
गिरफ्तार आरोपी की पहचान सौरभ उर्फ गणेश बाळासो काळे के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, वह लंबे समय से साइबर अपराध की दुनिया में सक्रिय था और देशभर में फैले एक बड़े साइबर सिंडिकेट का संचालन कर रहा था। उसकी तलाश कई राज्यों की पुलिस और जांच एजेंसियों को थी। मामले का खुलासा देहूरोड में दर्ज एक ऑनलाइन टास्क फ्रॉड केस की जांच के दौरान हुआ। जून 2024 में इस मामले में 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। जांच आगे बढ़ने पर बार-बार एक ही नाम सामने आ रहा था-गणेश काळे। इसके बाद पुलिस ने उसके नेटवर्क और गतिविधियों की गहन जांच शुरू की।
साइबर ठगी से जुटाई रकम की गई थी अलग -अलग ट्रांसफर
जांच में सामने आया कि आरोपी दुबई में बैठकर पूरे नेटवर्क को नियंत्रित करता था। लोगों को मोटे मुनाफे, ऑनलाइन टास्क और निवेश योजनाओं का लालच देकर उनके बैंक खातों, एटीएम कार्ड, चेकबुक और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी हासिल की जाती थी। इसके बाद उन्हीं खातों के जरिए साइबर ठगी से जुटाई गई रकम को विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर मनी लॉन्ड्रिंग की जाती थी।
आऱोपी के अंतर्राष्ट्रीय कनेक्शन होने के संकेत
पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपी ने दुबई में अपना एक कार्यालय बना रखा था, जहां से साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क का संचालन किया जाता था। जांच के दौरान उसके संबंध चीन सहित कई विदेशी नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत भी मिले हैं। साइबर गिरोह लोगों को ऑनलाइन टास्क फ्रॉड, शेयर बाजार में भारी मुनाफे का झांसा और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों से निशाना बनाता था। आरोपी लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था ताकि कानून की पकड़ से बच सके।
अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों की मदद से बैंकॉक एयरपोर्ट से किया गया गिरफ्तार
सितंबर 2025 में वह दुबई छोड़कर थाईलैंड चला गया, लेकिन पुलिस ने उसका पीछा नहीं छोड़ा।पिंपरी-चिंचवड़ साइबर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस और लुकआउट सर्कुलर जारी कराया। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ लगातार समन्वय के बाद आखिरकार उसे बैंकॉक एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया।
11 जून को आरोपी को भारत लाया गया, जहां मुंबई एयरपोर्ट पर पहले से मौजूद साइबर पुलिस टीम ने उसे हिरासत में लेकर औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का दावा है कि आरोपी का संबंध कई बड़े साइबर ठगी मामलों से है। हिंजवडी में 18 लाख रुपये की धोखाधड़ी और 2.66 करोड़ रुपये के हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड मामले में भी उसकी भूमिका सामने आई है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ में उसके पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, विदेशी कनेक्शन और करोड़ों रुपये की साइबर ठगी से जुड़े कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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