अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित 14 सूत्रीय शांति समझौते का मसौदा सामने आया है। इसमें होर्मुज स्ट्रेट खोलने, प्रतिबंधों में राहत और 300 अरब डॉलर पुनर्निर्माण पैकेज का प्रावधान शामिल है।

नई दिल्ली/अमर भारती। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को समाप्त करने की दिशा में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। दोनों देशों के बीच एक संभावित शांति समझौते का मसौदा तैयार होने की खबर है, जिस पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी ने इस प्रस्तावित समझौते का 14 सूत्रीय मसौदा प्रकाशित किया है, जिसमें सैन्य संघर्ष समाप्त करने से लेकर आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और ईरान के पुनर्निर्माण के लिए बड़े आर्थिक पैकेज तक कई अहम प्रावधान शामिल हैं। हालांकि, इस दस्तावेज को अभी तक न तो वॉशिंगटन और न ही तेहरान ने आधिकारिक रूप से जारी किया है। इसके बावजूद इसे दोनों देशों के बीच व्यापक शांति प्रक्रिया की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
महीनों की बातचीत के बाद तैयार हुआ मसौदा
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अनुसार, कई महीनों तक चली बातचीत के बाद समझौता ज्ञापन (MoU) के मसौदे को अंतिम रूप दिया गया है। परिषद ने इस प्रक्रिया को “इस्लामाबाद वार्ता” का नाम दिया है, जो बातचीत में पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका को दर्शाता है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह मसौदा दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष टकराव समाप्त करने और भविष्य में व्यापक वार्ता का रास्ता खोलने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
समझौते के प्रमुख बिंदु
मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, प्रस्तावित 14 सूत्रीय समझौते में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं।
- लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त करना।
- ईरान की संप्रभुता और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का अमेरिकी आश्वासन।
- 30 दिनों के भीतर नौसैनिक नाकेबंदी हटाना।
- ईरान के आसपास से अमेरिकी सैन्य उपस्थिति कम करना।
- होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना और समुद्री व्यापार बहाल करना।
- ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में राहत।
- ऊर्जा निर्यात से होने वाली आय तक ईरान की पूर्ण पहुंच बहाल करना।
- अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा कम से कम 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण पैकेज उपलब्ध कराना।
- परमाणु मुद्दों और प्रतिबंधों में राहत पर 60 दिनों के भीतर विस्तृत वार्ता शुरू करना।
- परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत परमाणु हथियार विकसित न करने की ईरान की प्रतिबद्धता दोहराना।
- बातचीत के दौरान नई आर्थिक पाबंदियां न लगाने का अमेरिकी वादा।
- ईरान की फ्रीज की गई 24 अरब डॉलर की संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी करना।
- समझौते के पालन की निगरानी के लिए एक संयुक्त तंत्र स्थापित करना।
- अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के जरिए वैधता प्रदान करना।
परमाणु कार्यक्रम पर अभी नहीं बनी सहमति
हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते को लगभग अंतिम रूप दिया हुआ बताया है, लेकिन सबसे संवेदनशील मुद्दा यानी ईरान का परमाणु कार्यक्रम अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है। मसौदे में ईरान द्वारा परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता का उल्लेख जरूर है, लेकिन यूरेनियम संवर्धन की सीमा, परमाणु सुविधाओं के भविष्य और अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण व्यवस्था को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान सामने नहीं आया है। जानकारी के अनुसार, इन जटिल मुद्दों पर समझौते के बाद शुरू होने वाली 60 दिनों की विशेष वार्ता के दौरान चर्चा की जाएगी।
अंतिम वार्ता से पहले ईरान की शर्तें
ईरान ने संकेत दिया है कि व्यापक और अंतिम समझौते पर बातचीत तभी आगे बढ़ेगी, जब अमेरिका मसौदे में किए गए शुरुआती वादों को लागू करेगा। इनमें ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों का आंशिक भुगतान, तेल निर्यात पर प्रतिबंधों में राहत और समुद्री नाकेबंदी समाप्त करना शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो इससे न केवल पश्चिम एशिया में तनाव कम होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
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