राम मंदिर चढ़ावा विवाद: PMO के पत्र पर ट्रस्ट ने देने से मना किया हिसाब, SIT जांच का दिया हवाला

अयोध्या राम मंदिर के दान और चढ़ावे को लेकर उठे विवाद में नया मोड़। PMO के निर्देश पर मांगी गई वित्तीय जानकारी देने से ट्रस्ट ने SIT जांच का हवाला देकर इनकार कर दिया।

अयोध्या राम मंदिर में दान और चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बीच जांच की प्रतीकात्मक तस्वीर
राम मंदिर ट्रस्ट से वित्तीय जानकारी मांगने और SIT जांच को लेकर विवाद चर्चा में है।

नई दिल्ली/अमर भारती। अयोध्या के राम मंदिर में दान, चढ़ावे और वित्तीय लेन-देन को लेकर उठे सवालों के बीच एक नया मोड़ सामने आया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से जिला प्रशासन को भेजी गई शिकायत के संबंध में मांगी गई वित्तीय जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया है। ट्रस्ट का कहना है कि मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है, इसलिए फिलहाल कोई भी दस्तावेज या विवरण उपलब्ध नहीं कराया जा सकता।

बीजेपी नेता की शिकायत पर PMO ने लिया संज्ञान

अयोध्या के भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन, दान, चढ़ावे और जमीन खरीद-बिक्री में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। उन्होंने मांग की थी कि ट्रस्ट अपनी स्थापना से अब तक के सभी वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक करे। रजनीश सिंह ने 9 जून को पहला और 12 जून को दूसरा पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा था। दूसरे पत्र में उन्होंने विशेष रूप से राम मंदिर में प्राप्त चढ़ावे और दान की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग उठाई थी।

PMO के निर्देश पर जिला प्रशासन ने मांगा हिसाब

शिकायत मिलने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने मामले को अयोध्या जिला प्रशासन को भेज दिया। इसके बाद प्रशासन ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से आय-व्यय, दान, बैंक खातों, संपत्ति और जमीन से जुड़े वित्तीय विवरण उपलब्ध कराने को कहा। सूत्रों के अनुसार, 23 जून को अयोध्या के एडीएम (कानून-व्यवस्था) इंद्रकांत द्विवेदी ने एडीएम (प्रशासन) विशु राजा को भेजे पत्र में बताया कि उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से संपर्क कर शिकायत में मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।

SIT जांच का हवाला देकर ट्रस्ट ने रोकी जानकारी

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट की ओर से कहा गया कि वर्तमान में मामले की SIT जांच जारी है और जांच एजेंसी सभी आवश्यक रिकॉर्ड और दस्तावेज एकत्र कर रही है। ऐसे में जांच पूरी होने तक मांगी गई जानकारी साझा नहीं की जा सकती। ट्रस्ट के इस जवाब के बाद अब पूरे मामले ने नया राजनीतिक और प्रशासनिक आयाम ले लिया है।

शिकायत में मांगी गई थीं ये जानकारियां

भाजपा नेता रजनीश सिंह द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी गई शिकायत में कई महत्वपूर्ण वित्तीय जानकारियों को सार्वजनिक करने की मांग की गई थी। इनमें शामिल हैं—

  • ‘समर्पण निधि’ अभियान के तहत जुटाई गई राशि
  • श्रद्धालुओं से प्राप्त नकद दान और चढ़ावा
  • सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य उपहारों का विवरण
  • ट्रस्ट के बैंक खाते और वित्तीय लेन-देन
  • जमीन खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज
  • मंदिर निर्माण और प्रशासनिक खर्च का ब्यौरा
  • ऑडिट और निरीक्षण रिपोर्ट

जांच पर टिकीं निगाहें

राम मंदिर देश की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। ऐसे में चढ़ावे और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों पर सभी की निगाहें SIT जांच पर टिकी हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों में उठाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन को लेकर उठे सवालों का क्या जवाब सामने आता है।

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