राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली बैठक में बड़ा निर्णय, नई नियुक्तियों के लिए समिति गठित; SIT रिपोर्ट का भी इंतजार।

राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में बड़ा फैसला
अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले के बाद सोमवार (6 जुलाई) को राम मंदिर ट्रस्ट यानी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली अहम बैठक आयोजित हुई। बैठक में ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। ट्रस्ट ने साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए कृष्ण मोहन को अंतरिम महामंत्री नियुक्त किया है। वह नए महामंत्री की नियुक्ति होने तक यह जिम्मेदारी संभालेंगे।
कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने दी आधिकारिक जानकारी
बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने मीडिया को फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति के लिए एक समिति का गठन किया गया है। इस समिति की सिफारिशों पर चर्चा करने के लिए 22 जुलाई को ट्रस्ट की अगली बैठक बुलाई गई है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि तब तक विशेष जांच दल (SIT) अपनी विस्तृत रिपोर्ट भी सौंप देगा।

चढ़ावा चोरी विवाद के बाद आया इस्तीफा
चंपत राय ने पिछले महीने राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के आरोपों के बीच महामंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। यह इस्तीफा ऐसे समय आया जब मंदिर में चढ़ावे की सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर सवाल उठ रहे थे। ट्रस्ट की सोमवार की बैठक में उनके इस्तीफे को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया।
न्याय प्रक्रिया पर जताया भरोसा
गोविंद देव गिरी ने कहा कि इस मामले में जो भी दोषी होगा, उसे कानून के अनुसार दंड मिलेगा और ट्रस्ट को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें। यदि किसी श्रद्धालु को अपने द्वारा अर्पित किसी वस्तु को लेकर कोई शंका हो तो वह सीधे राम मंदिर कार्यालय से संपर्क कर सकता है।

2800 वस्तुओं का रिकॉर्ड सुरक्षित होने का दावा
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने बताया कि ट्रस्ट के पास करीब 2800 वस्तुओं का विधिवत रजिस्टर मौजूद है। उनके अनुसार सभी वस्तुओं का रिकॉर्ड सुरक्षित है और आवश्यकता पड़ने पर इसकी जांच भी कराई जा सकती है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट वित्तीय और प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
राजनीतिक बयानबाजी पर भी जताई नाराजगी
गोविंद देव गिरी ने इस मामले पर हो रही राजनीतिक बयानबाजी पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पूरे देश में जिस तरह का माहौल बनाया गया है, उससे कुछ लोगों की मंशा पर सवाल उठते हैं। उनके अनुसार, इस पूरे विवाद का उद्देश्य हिंदू समाज में भ्रम और विभाजन पैदा करना नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वर्षों के संघर्ष और बलिदान के बाद राम मंदिर का निर्माण संभव हुआ है और इस प्रकार का विवाद सभी राम भक्तों के लिए पीड़ादायक है।

चंपत राय के इस्तीफे पर ट्रस्ट ने क्या कहा
गोविंद देव गिरी ने बताया कि विवाद के बाद बने माहौल से चंपत राय स्वयं आहत थे। उनका मानना था कि जब तक पूरे मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती और दोषियों की पहचान नहीं हो जाती, तब तक उनका पद पर बने रहना उचित नहीं होगा। इसी भावना के साथ उन्होंने इस्तीफा दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि ट्रस्ट के संस्थापक ट्रस्टी के. परासरन ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि ट्रस्ट के नियमों के अनुसार त्यागपत्र दिए जाने के बाद उसे स्वीकार माना जाता है। इसलिए ट्रस्ट के पास इसे अस्वीकार करने का कोई विकल्प नहीं था। ट्रस्ट ने चंपत राय के राम मंदिर निर्माण में दिए गए लंबे योगदान का सम्मान करते हुए उनके निर्णय को स्वीकार किया।
कृष्ण मोहन ने बताई अपनी प्राथमिकताएं
अंतरिम महामंत्री बनाए गए कृष्ण मोहन ने कहा कि जब तक नए महामंत्री की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक वह इस जिम्मेदारी का निर्वहन करेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना होगी कि मामले में जो भी दोषी हो, उसे कानूनी सजा मिले।
उन्होंने माना कि इस पूरे घटनाक्रम से ट्रस्ट की छवि प्रभावित हुई है और श्रद्धालुओं के मन में अविश्वास पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि जहां भी प्रबंधन या संचालन में कमियां रही हैं, उन्हें दूर करने का प्रयास किया जाएगा ताकि ट्रस्ट की विश्वसनीयता फिर से मजबूत हो सके।

महंत नृत्यगोपाल दास ने भी जारी किया था बयान
बैठक से पहले ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने एक पत्र जारी किया था। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना से वे बेहद दुखी हैं, लेकिन उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पूरा भरोसा है। उन्होंने अपील की कि इस संवेदनशील मामले पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए।
गोविंद देव गिरी ने पहले भी दी थी सफाई
बैठक से एक दिन पहले ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने ‘रामभक्तों के नाम’ एक खुला पत्र जारी किया था। इसमें उन्होंने ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता पर जोर देते हुए कहा था कि ट्रस्ट के सभी खातों का नियमित ऑडिट होता है और अधिकृत व्यक्ति कभी भी रिकॉर्ड की जांच कर सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि उनके कार्यकाल में प्राप्त नकद दान और उपहारों का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है।
क्या है राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला?
राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी और गड़बड़ी का मामला पिछले महीने सामने आया था। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि दान पात्रों से नकदी और कुछ मूल्यवान वस्तुएं गायब मिली हैं। इसके बाद स्थानीय स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए और मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर करोड़ों रुपये के चढ़ावे के गायब होने का दावा किया था। विवाद बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।

एसआईटी जांच में अब तक क्या हुआ?
एसआईटी ने गठन के दस दिन के भीतर 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी। इसके बाद 25 जून को इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, नामजद सभी आरोपी उस टीम का हिस्सा थे जो राम मंदिर के 40 दान पात्रों से निकले चढ़ावे को तीर्थयात्री सुविधा केंद्र ले जाकर उसकी गिनती का कार्य करती थी। सभी आठ आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है और मामले की जांच जारी है।
22 जुलाई की बैठक पर टिकीं निगाहें
अब इस पूरे मामले में अगली बड़ी तारीख 22 जुलाई होगी, जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अगली बैठक आयोजित होगी। उम्मीद है कि तब तक एसआईटी अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत कर देगी और ट्रस्ट प्रशासनिक नियुक्तियों के साथ-साथ जांच की प्रगति पर भी आगे का फैसला ले सकता है। ऐसे में राम मंदिर ट्रस्ट की आगामी बैठक पर श्रद्धालुओं, प्रशासन और पूरे देश की नजरें टिकी रहेंगी। (Expose India)
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