भरत एनकाउंटर केस: जांच रिपोर्ट के लिए सरकार को दो सप्ताह की मोहलत, मानवाधिकार आयोग ने अंतरिम मुआवजे का दिया निर्देश

बिहार के चर्चित भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में बीएचआरसी ने सरकार को जांच रिपोर्ट देने के लिए अतिरिक्त समय दिया। मृतक के परिजनों को अंतरिम मुआवजा देने का भी निर्देश।

भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग की सुनवाई।
बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में सरकार से अतिरिक्त समय मिलने के बाद अगली सुनवाई 3 अगस्त तय की।

नई दिल्ली/अमर भारती। बिहार के चर्चित भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में राज्य सरकार ने जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग (बीएचआरसी) से दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा है। आयोग ने सरकार के अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 तय की है। साथ ही आयोग ने राज्य सरकार को मृतक के परिजनों को अंतरिम राहत के रूप में मुआवजा देने पर विचार करने का निर्देश दिया है। हालांकि, मुआवजे की राशि तय नहीं की गई है और इसे सरकार के विवेक पर छोड़ा गया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव का है। 16 जून को पुलिस को सूचना मिली थी कि एक युवक के पास अवैध हथियार है। सूचना के आधार पर पुलिस भरत तिवारी के घर पहुंची। इस दौरान एक वीडियो सामने आया, जिसमें भरत तिवारी कथित तौर पर हाथ में पिस्टल लिए दिखाई दिया। हालांकि, उस समय पुलिस न तो उसे पकड़ सकी और न ही हथियार बरामद कर सकी।

अगले दिन यानी 17 जून की सुबह पुलिस और भरत तिवारी के बीच कथित मुठभेड़ हुई, जिसमें उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था और हथियार फेंक दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने गोली चलाई। इस आरोप के आधार पर मृतक की मां आशा देवी ने संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया है।

जांच रिपोर्ट के लिए सरकार ने मांगा अतिरिक्त समय

मामले के तूल पकड़ने के बाद बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 22 जून को राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) को नोटिस जारी किया था। आयोग ने चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। बाद में राज्य सरकार ने आयोग को बताया कि न्यायिक जांच अभी जारी है और कई तथ्यों की जांच पूरी होना बाकी है। इसी आधार पर सरकार ने दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा, जिसे आयोग ने स्वीकार कर लिया।

आयोग ने अंतरिम राहत देने का दिया निर्देश

मानवाधिकार आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि जांच पूरी होने से पहले राज्य की कानूनी जिम्मेदारी तय करना उचित नहीं होगा। इसके बावजूद मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 18(सी) के तहत मृतक के परिजनों को अंतरिम राहत के रूप में मुआवजा देने पर विचार किया जाए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अंतरिम भुगतान अंतिम निर्णय को प्रभावित नहीं करेगा और इसे किसी भी पक्ष के अधिकारों या दावों पर पूर्वाग्रह नहीं माना जाएगा।

तीन अगस्त को होगी अगली सुनवाई

बीएचआरसी के निबंधक एवं सेवानिवृत्त न्यायाधीश शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि आयोग का आदेश बिहार के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, भोजपुर के पुलिस अधीक्षक तथा मामले से जुड़े सभी पक्षों को ईमेल के माध्यम से भेज दिया गया है। साथ ही आदेश की प्रतियां डाक के जरिए भी भेजी जा रही हैं। अब इस मामले में अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को होगी। उस दिन राज्य सरकार से जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद आयोग आगे की कार्रवाई और आवश्यक निर्देश जारी करेगा।

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