राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की SIT जांच में नया संदिग्ध महेश कुमार जांच के घेरे में। करोड़ों की संपत्ति, L&T कनेक्शन और अंतिम रिपोर्ट से जुड़े बड़े खुलासे।

नई दिल्ली/अमर भारती। अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) को एक और संदिग्ध व्यक्ति से जुड़े महत्वपूर्ण इनपुट मिले हैं। जांच के दौरान महेश कुमार नामक व्यक्ति की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। महेश कुमार का नाम पहले गिरफ्तार किए गए आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू से जुड़ने के बाद सामने आया है। बताया जा रहा है कि वह टिन्नू के घर पर किराए पर रहता था और दोनों के बीच करीबी संबंध थे। हालांकि आधिकारिक रूप से महेश कुमार पर कोई आरोप तय नहीं किया गया है, लेकिन उसकी संपत्तियों और आर्थिक गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। SIT अब इन तथ्यों की भी जांच कर रही है।
मुख्यमंत्री और अधिकारियों से की गई शिकायत
सूत्रों के अनुसार महेश कुमार की कथित संपत्तियों और उसकी भूमिका की जांच कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, SIT के अधिकारियों और अन्य सक्षम अधिकारियों को शिकायत भेजी गई है। बस्ती जिले के एक शिकायतकर्ता ने लखनऊ जोन के आईजी कार्यालय में उपलब्ध कराए गए पत्र के साथ अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी सौंपे हैं। शिकायतकर्ता ने अपनी पहचान गोपनीय रखने का अनुरोध किया है।
15-18 हजार रुपये वेतन, लेकिन करोड़ों की संपत्ति का दावा

शिकायत में दावा किया गया है कि स्वयं को मंदिर निर्माण से जुड़ी कंपनी का कर्मचारी बताने वाले महेश कुमार का मासिक मानदेय लगभग 15 से 18 हजार रुपये है। इसके बावजूद आरोप है कि 12 जून को उसने अपने गृह जनपद बस्ती के गढ़हाराजा गांव में करीब 6 बीघा जमीन लगभग 90 लाख रुपये में खरीदी। इसके अलावा बेनीपुर गांव में भी दो अलग-अलग गाटा नंबरों की कृषि भूमि प्रति बिस्वा लगभग 12 लाख रुपये की दर से खरीदी गई।
शिकायत के अनुसार ये संपत्तियां महेश कुमार ने अपने भाई रमेश कुमार, पत्नी, भाई की पत्नी, बहन, बहनोई और भांजे के नाम पर खरीदी हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि उसका भाई किसी प्रकार की नौकरी नहीं करता।
एक वर्ष में करीब 20 संपत्तियां खरीदने का आरोप
शिकायतकर्ता का दावा है कि महेश कुमार ने पिछले एक वर्ष के दौरान अयोध्या, बस्ती, लखनऊ और प्रयागराज में करीब 20 अचल संपत्तियां खरीदी हैं। इन संपत्तियों की अनुमानित कीमत करोड़ों रुपये बताई गई है। शिकायत के साथ इन संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी SIT को उपलब्ध कराए जाने का दावा किया गया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
L&T कनेक्शन पर भी उठे सवाल
जांच के दौरान महेश कुमार का नाम मंदिर निर्माण कार्य से जुड़ी कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) से भी जोड़ा गया। हालांकि L&T के परियोजना निदेशक विनोद कुमार मेहता ने स्पष्ट किया कि उनकी कंपनी में इस नाम और पते का कोई कर्मचारी कार्यरत नहीं था।
इसके बाद माना जा रहा है कि महेश कुमार संभवतः L&T Geo Structure नामक सहयोगी कंपनी से जुड़ा रहा होगा। यही कंपनी राम मंदिर निर्माण के शुरुआती चरण में पाइलिंग और नींव से जुड़े कार्य कर रही थी। सूत्रों के अनुसार इसी कंपनी के कई कर्मचारी पहले आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के घर पर किराए पर रहते थे। टिन्नू ने भी गिरफ्तारी से पहले मीडिया से बातचीत में इस बात का उल्लेख किया था।
पूछताछ की भी चर्चा, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं
सूत्रों का दावा है कि SIT के एक सदस्य ने लखनऊ स्थित कार्यालय में महेश कुमार से पूछताछ भी की है। हालांकि जांच एजेंसियों की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में फिलहाल महेश कुमार की भूमिका जांच का विषय बनी हुई है और अंतिम रिपोर्ट में ही स्पष्ट हो सकेगा कि उसके खिलाफ कोई कार्रवाई की सिफारिश की जाती है या नहीं।
अंतिम रिपोर्ट में बढ़ सकते हैं आरोपियों के नाम

SIT की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। सरकार द्वारा निर्धारित समय-सीमा के अनुसार रिपोर्ट 15 जुलाई तक सौंपी जानी थी, हालांकि इसे दो-तीन दिन का अतिरिक्त समय मिलने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक जांच टीम एक बार फिर अयोध्या पहुंचकर ट्रस्ट के पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों सहित कुछ अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज कर सकती है।
जानकारी यह भी सामने आ रही है कि अंतिम रिपोर्ट में कुछ नए नाम जोड़े जा सकते हैं। इनमें बैंक, ट्रस्ट, सुरक्षा व्यवस्था और चढ़ावा गणना प्रक्रिया से जुड़े कुछ लोगों के नाम शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला अब केवल चोरी की जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कथित आर्थिक अनियमितताओं, संपत्ति अर्जन और संभावित नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। हालांकि महेश कुमार सहित जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनके खिलाफ अभी तक कोई आधिकारिक दोष सिद्ध नहीं हुआ है। SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।
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