बीजेपी सोशल मीडिया सेल की शिकायत पर नागपुर साइबर पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

नागपुर/अमर भारती। मनीष कश्यप पर FIR दर्ज होने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में इस मामले की चर्चा तेज हो गई है। नागपुर शहर साइबर पुलिस ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, टोयोटा और इथेनॉल से जुड़ी कथित भ्रामक जानकारी सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के आरोप में यूट्यूबर मनीष कश्यप समेत चार सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो की जांच शुरू कर दी गई है।
मनीष कश्यप पर FIR क्यों दर्ज हुई?
मनीष कश्यप पर FIR भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नागपुर शहर सोशल मीडिया सेल के अध्यक्ष शिशिर त्रिपाठी की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने अपने यूट्यूब और इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म पर ऐसे वीडियो और पोस्ट साझा किए, जिनमें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, टोयोटा और इथेनॉल को लेकर कथित रूप से भ्रामक और तथ्यहीन जानकारी दी गई।
शिकायतकर्ता का दावा है कि इन पोस्टों से लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है और इससे सरकार तथा संबंधित व्यक्तियों की छवि प्रभावित होने की आशंका है।

किन-किन लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला?
मनीष कश्यप पर FIR के साथ जिन अन्य सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, उनमें शामिल हैं—
- यूट्यूबर मनीष कश्यप
- इंस्टाग्राम पेज Desi Boys NCR (desi_boysncr)
- कंटेंट क्रिएटर हर्षित राठी
- सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अंकलेश इनवाते (akkaspeaks)
पुलिस ने इन सभी के सोशल मीडिया अकाउंट और संबंधित पोस्ट की जांच शुरू कर दी है।
एफआईआर में क्या लगाए गए हैं आरोप?
एफआईआर के अनुसार, मनीष कश्यप पर FIR इसलिए दर्ज की गई क्योंकि आरोप है कि संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स से इथेनॉल नीति और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को लेकर ऐसे दावे किए गए, जिन्हें शिकायतकर्ता ने भ्रामक और तथ्यहीन बताया है।
शिकायत में उन वीडियो और पोस्ट के लिंक भी शामिल किए गए हैं, जिनमें कथित तौर पर बिना पर्याप्त प्रमाण के जानकारी साझा की गई। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि साझा की गई सामग्री तथ्यों पर आधारित थी या नहीं।

किन धाराओं में दर्ज हुआ केस?
मनीष कश्यप पर FIR नागपुर शहर साइबर पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दर्ज की गई है।
पुलिस ने निम्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है—
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352
- BNS की धारा 356
- BNS की धारा 296
- आईटी एक्ट की धारा 67
फिलहाल पुलिस इन धाराओं के तहत मामले की जांच कर रही है और आवश्यक डिजिटल साक्ष्य जुटा रही है।
सोशल मीडिया कंटेंट की होगी जांच
मनीष कश्यप पर FIR दर्ज होने के बाद नागपुर साइबर पुलिस ने संबंधित यूट्यूब वीडियो, इंस्टाग्राम पोस्ट और अन्य डिजिटल सामग्री का परीक्षण शुरू कर दिया है। पुलिस यह पता लगाएगी कि साझा की गई जानकारी किस स्रोत पर आधारित थी और क्या उसमें किसी प्रकार की भ्रामक या तथ्यहीन सामग्री शामिल थी।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

इथेनॉल को लेकर क्यों उठा विवाद?
एफआईआर में इथेनॉल से जुड़े कुछ दावों का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि सोशल मीडिया पोस्ट में इथेनॉल नीति और उससे जुड़े तथ्यों को कथित रूप से गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे आम लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस संबंध में किसी निष्कर्ष की घोषणा नहीं की है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोप कितने सही हैं।
पुलिस ने क्या कहा?
नागपुर साइबर पुलिस का कहना है कि मनीष कश्यप पर FIR दर्ज होने के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। पुलिस संबंधित डिजिटल सामग्री, सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है।
अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सोशल मीडिया पर बढ़ी जिम्मेदारी
यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया पर साझा की जाने वाली जानकारी की विश्वसनीयता और जिम्मेदारी को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति, सरकारी नीति या संस्था से जुड़ी जानकारी साझा करने से पहले तथ्यों की पुष्टि करना आवश्यक है।
वहीं, इस मामले में दर्ज एफआईआर आरोपों पर आधारित है। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
निष्कर्ष
मनीष कश्यप पर FIR दर्ज होने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट और उसकी विश्वसनीयता को लेकर महत्वपूर्ण बन गया है। नागपुर साइबर पुलिस ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, टोयोटा और इथेनॉल से जुड़े कथित भ्रामक कंटेंट के मामले में चार सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और पुलिस उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। (Expose India)
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