
जौनपुर। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह व सहायक पुलिस अधीक्षक क्षेत्राधिकारी नगर गोल्डी गुप्ता नगर द्वारा चलाए जा रहे ‘ अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी मल्टी लेवल मार्केटिंग व पिरामिड चेन नेटवर्क के जरिए बेरोजगार युवाओं से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया गया है।पुलिस ने गिरोह के मुख्य संचालक राहुल राजभर सहित सात अभियुक्त गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से 11 मोबाइल फोन, एक थार , एक बुलट व पल्सर बाइक नकदी, धनराशि और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। कार्रवाई के दौरान ठगी के जाल में फंसे करीब 30प्रशिक्षु युवक-युवतियां इनके झांसे में फंसे थे, जिन्हें मुक्त कराया गया।
क्षेत्राधिकारी गोल्डी गुप्ता ने बताया कि सोमवार को सायं 4 बजे लगभग वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के सीयूजी नंबर पर जानकारी दी गई की एक कमरे में 15 से 20 लोगों को उनके इच्छा के विरुद्ध बंधक बनाकर रखा गया है। उन्हें बाहर निकलने नहीं दिया जा रहा है। उक्त सुचना पर पीड़ित द्वारा भेजे गए लोकेशन पर थाना लाइन बाजार की पुलिस ने छापेमारी कर पीड़ितों को वहां से बाहर निकाल कर लाया गया । पीड़ितों के तहरीर के आधार पर मुकदमा पंजीकृत किया गया।
ऐसे बिछाया जाता था ठगी का जाल
गिरोह ‘एम एस अर्थ’ के नाम से कार्यालय संचालित कर तथा रायल हेल्थ वेलनेस प्राइवेट लिमिटेड की फ्रेंचाइजी लेकर बेरोजगार युवाओं को फोन करता था। उन्हें जौनपुर व अन्य जनपदों में कंपनी, ऑफिस वर्क या कृषि कार्य में 25 हजार मासिक वेतन वाली नौकरी का झांसा देकर बुलाया जाता था।
जौनपुर पहुंचने पर कॉरपोरेट ऑफिस जैसा माहौल बनाकर इंटरव्यू लिया जाता और रजिस्ट्रेशन व जॉइनिंग फीस के नाम पर 30 से 35 हजार रुपये वसूल लिए जाते थे। बदले में सामान्य कमत की किट देकर युवाओं को ट्रेनिंग सेंटर भेज दिया जाता था। इसके बाद उन्हें तीन नए लोगों को जोड़ने का दबाव बनाया जाता था। ऐसा नहीं करने पर वेतन और जमा धनराशि वापस नहीं करने की धमकी दी जाती थी।
बैंक खातों में एक वर्ष में पहुंचे करीब चौंतीस करोड़ रुपये
मुख्य आरोपित राहुल राजभर के यूनियन बैंक खातों की प्रारंभिक जांच में बैंक खातों में पिछले एक वर्ष के दौरान करीब चौंतीस करोड़ रुपये का लेनदेन सामने आया है। पुलिस पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच कर रही है।
पुलिस ने 30युवाओं को बचाया
गोल्डी गुप्ता ने बताया कि नौकरी और सुनहरे भविष्य के सपने दिखाकर लाए गए करीब 30 युवक-युवतियों को इस फर्जी नेटवर्क से सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस अब सभी पीड़ितों का विवरण जुटाकर अन्य राज्यों की एजेंसियों से भी संपर्क कर रही है।