
लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। इसके तहत इंडिया एआई मिशन के अंतर्गत एक खास एआई एप तैयार कराया जाएगा, जिसके जरिए टेंडर की तकनीकी और वित्तीय जांच पहले से कहीं अधिक तेज और सटीक हो सकेगी। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने मंगलवार को अधिकारियों के साथ बैठक करके एआई बिड इवैल्यूएशन सिस्टम तैयार करने के निर्देश दिये हैं। इस नयी व्यवस्था से मानवीय त्रुटियों की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाएगी। साथ ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर टेंडर में भाग लेने वाली संस्थाओं पर प्रभावी रोक लगेगी।
एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने बताया कि समस्त प्रकार के टेंडरों में अलग-अलग संस्थाएं प्रतिभाग करती हैं। प्रत्येक टेंडर में औसतन 150 से 200 पन्नों के दस्तावेज होते हैं। इनमें पात्रता, अनुभव, वित्तीय विवरण, तकनीकी योग्यता और अन्य प्रमाण पत्र शामिल रहते हैं। वर्तमान व्यवस्था के तहत टेंडर दस्तावेजों की मैन्युअल जांच की जाती है, जिसमें 15 से 30 दिन का समय लग जाता है। उन्होंने बताया कि एआई एप से सत्यापन की व्यवस्था लागू होने से टेंडर दस्तावेजों के मूल्यांकन की प्रक्रिया महज 01 दिन में पूरी हो जाएगी। इससे परियोजनाओं के आवंटन में तेजी आएगी और समय की काफी बचत होगी।
फर्जी दावों को पकड़ेगा एआई
लविप्रा उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि टेंडर के नियम एवं शर्तों के अनुरूप फर्म/कंपनियां अपने द्वारा पूर्व में किये गये कार्यों से सम्बंधित दस्तावेज प्रस्तुत करती हैं। एआई माॅडल इन दस्तावेजों का स्वतः विश्लेषण करेगा और यदि किसी संस्था ने फर्जी प्रमाणपत्र, गलत जानकारी या नियमों के विपरीत दस्तावेज लगाए होंगे तो उन्हें तुरंत चिन्हित कर लेगा। इससे अपात्र फर्मों की पहचान आसान होगी और टेंडर प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
ई-गवर्नेंस व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
एलडीए वीसी ने बताया कि एआई तकनीक लागू होने से टेंडर की शर्तों में मनमानी, नियमों की अनदेखी या दस्तावेजों में गड़बड़ी की संभावनाओं पर लगाम लगेगी। एप निर्धारित मानकों के आधार पर प्रत्येक बिड का मूल्यांकन करेगा, जिससे सभी प्रतिभागियों को समान अवसर मिलेगा। इस पहल से न केवल टेंडर प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी, बल्कि विकास कार्यों में भी तेजी आएगी। इससे ई-गवर्नेंस व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने में भी सफलता मिलेगी।