भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी STF जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है।

नई दिल्ली/अमर भारती। भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में जांच एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने गोली चलाने के आरोपी STF जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। गुरुवार देर रात तकनीकी अनुसंधान और मोबाइल सर्विलांस की मदद से की गई इस गिरफ्तारी को मामले की जांच में महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी जवान लंबे समय से जांच में सहयोग नहीं कर रहा था और लगातार गैरहाजिर चल रहा था।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद तेज हुई कार्रवाई
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में यह गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब कुछ दिनों पहले मृतक के परिजनों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर न्याय की मांग की थी। परिवार ने मुख्यमंत्री के समक्ष पूरे मामले को रखते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने परिजनों को निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। परिजनों का कहना है कि आरोपी जवान की गिरफ्तारी उसी आश्वासन की दिशा में उठाया गया अहम कदम है।
पटना STF के सहयोग से हुई गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में आरोपी अक्षय कुमार की गिरफ्तारी पटना STF के सहयोग से की गई। भोजपुर के पुलिस अधीक्षक राज ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि अक्षय कुमार STF की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) टीम में तैनात था। मामले की जांच के दौरान उसकी सरकारी पिस्टल पहले ही जब्त की जा चुकी थी। इसके अलावा विभागीय स्तर पर उस पर कार्रवाई करते हुए उसे पहले ही निलंबित भी किया जा चुका था।
निलंबन के बाद से था फरार
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में आरोपी जवान अक्षय कुमार निलंबन के बाद से फरार चल रहा था। जांच एजेंसियां लगातार उसकी तलाश में जुटी थीं। पुलिस का कहना है कि तकनीकी निगरानी और मोबाइल लोकेशन के आधार पर उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। आखिरकार गुरुवार देर रात उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब उससे पूछताछ कर घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जुटाने की तैयारी कर रही है।
भाई ने लगाया पहली गोली चलाने का आरोप
मृतक के भाई चंदन तिवारी ने पहले ही दावा किया था कि उन्होंने घटना के दौरान अक्षय कुमार को पहली गोली चलाते हुए देखा था। भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में परिवार लगातार आरोपी जवान की गिरफ्तारी की मांग कर रहा था। परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद मामले को दबाने की कोशिश की गई, लेकिन लगातार संघर्ष और न्याय की मांग के कारण जांच आगे बढ़ सकी।
मां के बयान पर दर्ज हुई थी प्राथमिकी
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में 22 जून को मृतक की मां आशा देवी के बयान के आधार पर शाहपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। एफआईआर में तत्कालीन जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश कुमार, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार समेत कई पुलिसकर्मियों को नामजद किया गया था। पुलिस ने हत्या, आर्म्स एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
आत्मसमर्पण के बाद गोली मारने का आरोप
प्राथमिकी में आशा देवी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार 17 जून की सुबह पुलिस अधिकारी उनके घर पहुंचे और भरत भूषण तिवारी को बाढ़ प्रभावितों की समस्याएं बताने के लिए अपने साथ ले गए। आरोप है कि उस समय भरत भूषण तिवारी फेसबुक लाइव के जरिए क्षेत्र की समस्याओं को उठा रहे थे।
परिजनों का दावा है कि भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में उन्होंने अपनी मांगें रखने के बाद हथियार जमीन पर रखकर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें धक्का देकर गिराया और कथित तौर पर अधिकारियों के आदेश पर गोली चला दी। परिवार का आरोप है कि उन्हें पांच गोलियां मारी गईं, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
इलाज के दौरान हुई थी मौत
एफआईआर के अनुसार घटना के बाद पुलिस भरत भूषण तिवारी को अपने वाहन से लेकर चली गई थी। बाद में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना वाले दिन मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी को पूरे दिन थाने में बैठाकर रखा गया और शाम को बेटे की मौत की सूचना दी गई।
जांच पर टिकी सबकी नजर
फिलहाल भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में आरोपी STF जवान अक्षय कुमार की गिरफ्तारी को जांच में बड़ा मोड़ माना जा रहा है। पुलिस और जांच एजेंसियां अब मामले से जुड़े अन्य आरोपों की भी जांच कर रही हैं। परिजनों को उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच के जरिए पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आएगी और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित होगी।
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