रिपोर्ट -अभिषेक शुक्ला

जौनपुर। करंजाकला ब्लॉक क्षेत्र के खतीरपुर भैंसा गांव स्थित अस्थायी गोशाला में शनिवार को छह मवेशी मृत पाए गए। गोशाला परिसर में जगह-जगह गंदगी, कीचड़ और जलभराव की स्थिति बनी हुई है। कई पशु कमजोर और बीमार हालत में भी दिखाई दिए। ऐसे में पशुओं की नियमित देखरेख और समय से उपचार को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शनिवार को गोशाला के निरीक्षण के दौरान गाय और बछड़ों समेत छह मवेशी मृत पड़े मिले। परिसर में बारिश के कारण जगह-जगह पानी और कीचड़ जमा था। स्थिति यह थी कि गोशाला के भीतर तक पहुंचना भी मुश्किल हो रहा था। पशुओं के रहने वाले स्थान पर नियमित साफ-सफाई नहीं होने से गंदगी का अंबार दिखाई दिया।
गोशाला में कुछ पशु बेहद कमजोर और बीमार हालत में भी नजर आए। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बीमार पशुओं की नियमित निगरानी की जा रही है और उन्हें समय पर पशु चिकित्सकीय उपचार मिल रहा है? पशुओं की हालत बिगड़ने से पहले यदि नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार की व्यवस्था हो तो कई मामलों में उनकी जान बचाई जा सकती है।
मृत मवेशियों के शवों के निस्तारण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पशुओं की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम और आवश्यक जांच कराना जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उनकी मौत बीमारी, भूख, संक्रमण, जलभराव अथवा किसी अन्य कारण से हुई।
गोशाला में पशुओं के लिए साफ-सफाई, पर्याप्त चारा-पानी, सुरक्षित आश्रय और स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करना संबंधित तंत्र की जिम्मेदारी है। ऐसे में लंबे समय तक कीचड़ और जलभराव की स्थिति बने रहना निगरानी और व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
अधिकारी ने एनजीओ के जिम्मे संचालन बताया
इस संबंध में खंड विकास अधिकारी करंजाकला पीयूष त्रिपाठी ने बताया कि गोशाला का संचालन ग्राम सचिव द्वारा नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसका संचालन समसपुर पानीयरिया के एक व्यक्ति द्वारा एनजीओ के माध्यम से कराया जा रहा है।
बीडीओ के अनुसार, हाल ही में ग्राम प्रधान की ओर से गोशाला परिसर में मिट्टी डलवाई गई थी। मिट्टी पड़ने के बाद ईंट बिछाने का काम होना था, लेकिन बारिश के कारण ईंट नहीं लग सकी, जिससे परिसर में कीचड़ की स्थिति बन गई है। उन्होंने कहा कि कीचड़ सूखने के बाद ग्राम प्रधान द्वारा ईंट लगवाई जाएगी।
हालांकि, गोशाला में छह मवेशियों की मौत और बीमार पशुओं की मौजूदगी के बीच यह सवाल बना हुआ है कि पशुओं की नियमित स्वास्थ्य निगरानी और मृत पशुओं के तत्काल निस्तारण की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। छह मवेशियों की मौत के वास्तविक कारणों की जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत है।
सवाल यह भी है कि यदि गोशाला का नियमित निरीक्षण होता रहा, तो इतनी खराब स्थिति जिम्मेदार अधिकारियों की नजर में क्यों नहीं आई? पशु संरक्षण के नाम पर संचालित व्यवस्था में यदि पशुओं को स्वच्छ वातावरण, पर्याप्त देखभाल और समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है, तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है।