अबान के जनाजे में शामिल होने के लिए अली और उमर को पैरोल, कड़ी सुरक्षा में प्रयागराज रवाना

Ali Ahmed और Umar Ahmed को अबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अस्थायी पैरोल दी। अली कड़ी सुरक्षा में झांसी जेल से प्रयागराज रवाना हुए।

अबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए अली अहमद को अस्थायी पैरोल मिली है।
अबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए अली अहमद को अस्थायी पैरोल मिली है।

नई दिल्ली/अमर भारती। पूर्व सांसद अतीक अहमद के बेटे अली अहमद और उनके भाई मोहम्मद उमर को छोटे भाई अबान अहमद के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अस्थायी पैरोल दी है। अबान की गुरुवार को झांसी-कानपुर मार्ग पर हुए सड़क हादसे में मौत हो गई थी। हाई कोर्ट के आदेश के बाद दोनों भाइयों को कड़ी सुरक्षा के बीच प्रयागराज लाया जा रहा है।

झांसी जेल से कड़ी सुरक्षा में रवाना हुए अली

अली अहमद झांसी जिला जेल में बंद हैं। शनिवार सुबह उन्हें पुलिस सुरक्षा के बीच जेल से प्रयागराज के लिए रवाना किया गया। सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी रखी गई कि पुलिस वाहन को चारों तरफ से ढककर रखा गया और मीडिया को वाहन के भीतर बैठे अली की तस्वीर लेने या उनका चेहरा देखने का मौका नहीं मिला। अबान के अंतिम संस्कार को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं।

सड़क हादसे में हुई थी अबान की मौत

अबान अहमद गुरुवार को अपने भाई अली से मिलने के लिए झांसी जा रहे थे। इसी दौरान कानपुर-झांसी मार्ग पर उनकी कार हादसे का शिकार हो गई। हादसे में अबान की मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद अन्य लोगों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। पोस्टमार्टम के बाद अबान का शव प्रयागराज लाया गया। परिवार की ओर से उनके अंतिम संस्कार की तैयारी की गई, लेकिन जेल में बंद भाइयों के आने का इंतजार किया जा रहा था।

हाई कोर्ट ने रखी हैं कई शर्तें

अली और उमर की पैरोल को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में परिवार की ओर से याचिका दाखिल की गई थी। न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की पीठ ने मानवीय आधार पर दोनों को सीमित अवधि के लिए पैरोल की अनुमति दी। पैरोल के साथ अदालत ने शर्तें भी तय की हैं। इनमें मीडिया से बातचीत नहीं करना और अंतिम संस्कार के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत वापस जेल लौटना शामिल है।

पहले नैनी जेल से झांसी भेजे गए थे अली

अली अहमद को पहले प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल में रखा गया था। बाद में उन्हें झांसी जिला जेल स्थानांतरित कर दिया गया था। जेल प्रशासन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, नैनी जेल में तलाशी के दौरान उनकी बैरक से कथित तौर पर नकदी बरामद होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर समीक्षा की गई थी। इसके बाद शासन स्तर पर निर्णय लेते हुए अली को झांसी जेल भेजा गया था।

अंतिम संस्कार के बाद लौटना होगा जेल

हाई कोर्ट की अनुमति सीमित अवधि के लिए है। अंतिम संस्कार और परिवार से निर्धारित मुलाकात के बाद अली और उमर को पुलिस सुरक्षा में वापस जेल ले जाया जाएगा। अबान की मौत के बाद परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय है। इस बीच दोनों भाइयों को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति मिलने से परिवार को अपने छोटे भाई को अंतिम विदाई देने का अवसर मिला है।

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