FCRA Amendment Bill 2026 पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क दिया, विपक्ष ने अल्पसंख्यक संस्थानों को लेकर सवाल उठाए।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विदेशी चंदे और फंडिंग को लेकर Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 पर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद सामने आए हैं। विपक्षी दलों और कुछ ईसाई संगठनों का आरोप है कि प्रस्तावित संशोधन से विदेशी योगदान प्राप्त करने वाले अल्पसंख्यक और धार्मिक संस्थानों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ सकता है। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय का कहना है कि विधेयक किसी समुदाय या चैरिटी गतिविधि को निशाना बनाने के लिए नहीं है, बल्कि भारत में आने वाले विदेशी धन की निगरानी, पारदर्शिता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखकर लाया गया है।
FCRA संशोधन विधेयक पर JPC में पहली बैठक
FCRA Amendment Bill की जांच के लिए गठित 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC की पहली बैठक 18 सितंबर को हुई। समिति की अध्यक्षता बीजेपी सांसद संजय जायसवाल कर रहे हैं। बैठक में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने समिति के सदस्यों को विधेयक के विभिन्न प्रावधानों और सरकार के पक्ष के बारे में जानकारी दी।
बैठक में सांसदों ने विधेयक के प्रावधानों को लेकर कई सवाल पूछे। रिपोर्टों के मुताबिक समिति की अगली बैठक 29 सितंबर को प्रस्तावित है, जिसमें गृह मंत्रालय के साथ कानून मंत्रालय के अधिकारियों को भी बुलाया जा सकता है।
गृह मंत्रालय ने क्या कहा?
गृह मंत्रालय ने समिति के सामने कहा कि FCRA मूल रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कानून (FCRA Amendment Bill) है। मंत्रालय के मुताबिक प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि विदेशी धन के भारत में प्रवेश और उसके इस्तेमाल में पारदर्शिता तथा निगरानी सुनिश्चित करना है।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि संशोधन किसी खास समुदाय के खिलाफ नहीं है। सरकार के अनुसार राष्ट्रीय हित, आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलू इस विधेयक के प्रमुख आधार हैं।
गृह मंत्रालय की ओर से समिति को दिए गए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में FCRA के तहत करीब 22,974 करोड़ रुपये का विदेशी योगदान प्राप्त हुआ। इसमें करीब 53 प्रतिशत योगदान अमेरिका से आया। उद्देश्य के लिहाज से लगभग 57 प्रतिशत राशि सामाजिक गतिविधियों और 30 प्रतिशत शिक्षा से संबंधित गतिविधियों में गई, जबकि करीब 8 प्रतिशत यानी लगभग 1,841 करोड़ रुपये धार्मिक गतिविधियों के लिए बताए गए।
धार्मिक संस्थानों की फंडिंग पर भी चर्चा
(FCRA Amendment Bill) समिति के सामने धार्मिक गतिविधियों के लिए मिले विदेशी योगदान के आंकड़े भी रखे गए। गृह मंत्रालय के अनुसार, 2024-25 में धार्मिक उद्देश्य के लिए प्राप्त विदेशी योगदान में ईसाई संगठनों की हिस्सेदारी करीब 73.05 प्रतिशत थी। हिंदू संगठनों की हिस्सेदारी 17.81 प्रतिशत और मुस्लिम संगठनों की हिस्सेदारी एक प्रतिशत से कुछ अधिक बताई गई।
इन आंकड़ों के बीच विपक्षी सदस्यों ने विधेयक के उन प्रावधानों को लेकर सवाल उठाए हैं, जिनसे FCRA लाइसेंस से जुड़े संगठनों की संपत्तियों पर सरकार की भूमिका बढ़ सकती है।
विपक्ष का आरोप- ईसाई संस्थानों को निशाना बनाने की आशंका
विपक्षी दलों और कुछ चर्च संगठनों ने विधेयक के प्रावधानों पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि प्रस्तावित बदलावों का असर विदेशी फंडिंग पर निर्भर सामाजिक, धार्मिक और अल्पसंख्यक संस्थानों पर पड़ सकता है।
DMK के राज्यसभा सांसद पी. विल्सन ने समिति की बैठक में फिर FCRA Amendment Bill मुद्दा उठाया कि प्रस्तावित संशोधन ईसाई संगठनों को प्रभावित कर सकते हैं। विपक्षी सदस्यों ने खास तौर पर उस प्रावधान पर सवाल उठाए हैं, जिसके तहत FCRA लाइसेंस रद्द, निलंबित या नवीनीकृत नहीं होने की स्थिति में विदेशी फंड से बनी संपत्तियों के प्रबंधन और निपटान के लिए एक नामित प्राधिकरण की भूमिका प्रस्तावित है।
निशिकांत दुबे ने विदेशी फंडिंग का इतिहास उठाया
JPC की बैठक में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने भारत में विदेशी फंडिंग और राष्ट्रीय हित से जुड़े मामलों का इतिहास सामने रखा। उन्होंने फोर्ड फाउंडेशन और रॉकफेलर फाउंडेशन से जुड़े पुराने मामलों का उल्लेख करते हुए विदेशी धन के संभावित प्रभाव पर सवाल उठाए।
दुबे ने कथित तौर पर यह सवाल भी उठाया कि 1976 में FCRA Amendment Bill कानून लागू होने से पहले विदेशी फंडिंग से जुड़े बड़ी संख्या में संगठनों पर कार्रवाई की गई थी, लेकिन कुछ विदेशी संस्थाओं को भारत में महत्वपूर्ण गतिविधियों और संपत्तियों की अनुमति कैसे मिली।
बिल में संपत्तियों को लेकर क्या प्रस्ताव है?
प्रस्तावित संशोधन का एक प्रमुख पहलू विदेशी योगदान से बनाई गई संपत्तियों के संबंध में नया ढांचा तैयार करना है। रिपोर्टों के अनुसार, यदि किसी संगठन का FCRA लाइसेंस रद्द, निलंबित या नवीनीकृत नहीं होता है, तो केंद्र द्वारा नियुक्त Designated Authority को ऐसी विदेशी फंड से बनी संपत्तियों के प्रबंधन, निगरानी और कुछ परिस्थितियों में निपटान की शक्ति देने का प्रस्ताव है।
सरकार का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था में संपत्तियों और विदेशी योगदान के प्रबंधन को लेकर कानूनी तथा प्रशासनिक अस्पष्टताएं हैं। प्रस्तावित बदलाव इन्हें स्पष्ट करने और FCRA Amendment Bill के अनुपालन को मजबूत करने के उद्देश्य से हैं। विपक्ष इन प्रावधानों को लेकर सरकारी अधिकारों के विस्तार की आशंका जता रहा है।
शीतकालीन सत्र में रिपोर्ट देने की तैयारी
JPC अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा है कि समिति अपनी रिपोर्ट संसद के शीतकालीन सत्र में पेश करने की दिशा में काम करेगी। समिति को विधेयक के प्रावधानों की विस्तृत जांच करनी है और अलग-अलग पक्षों की चिंताओं पर विचार करना है।
फिलहाल FCRA Amendment Bill संसद की संयुक्त समिति के पास विचाराधीन है। इसलिए विधेयक के अंतिम प्रावधान और उसका अंतिम स्वरूप समिति की जांच और संसद में आगे की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
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