
लखनऊ। चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने, न्यूनतम मजदूरी 42 हजार रुपये करने, काम के घंटे आठ निर्धारित करने, फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सी2+50 प्रतिशत के आधार पर तय करने और उसकी खरीद की गारंटी समेत विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को प्रदेशभर में किसानों और मजदूरों ने व्यापक प्रदर्शन किया। इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एक्टू, टीयूसीसी, एआईयूटीयूसी, सेवा सहित सार्वजनिक प्रतिष्ठानों तथा राज्य और केंद्रीय कर्मचारियों की स्वतंत्र फेडरेशनों के संयुक्त मंच के आह्वान पर आयोजित इन प्रदर्शनों में तीन लाख से अधिक किसानों-मजदूरों के शामिल होने का दावा किया गया। प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न स्थानों पर रास्ता रोककर धरना दिया और अपनी मांगों के समर्थन में सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में अमेरिका के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को रद्द करना, बिजली संशोधन विधेयक 2025 और बीज संशोधन विधेयक 2025 को वापस लेना, स्कीम वर्कर्स को मानदेय के बजाय न्यूनतम मजदूरी देना, प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी सलाहकार बोर्ड का गठन करना तथा शुगर उद्योग में वेतन पुनरीक्षण की अधिसूचना जारी करना शामिल है। इसके अलावा पूर्वांचल एवं मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण पर रोक लगाने, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने, किसानों का कर्ज माफ करने, सस्ती दर पर खाद उपलब्ध कराने, मनरेगा को कमजोर अथवा भंग करने की कोशिशों पर रोक लगाने और नई शिक्षा नीति 2020 को वापस लेने की मांग भी उठाई गई।
प्रदेश के कई जिलों में धरना-प्रदर्शन, सौंपे गए ज्ञापन
प्राप्त जानकारी के अनुसार गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, बुलंदशहर, सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद, बरेली, आगरा, इटावा, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, सोनभद्र, गाजीपुर, बलिया, देवरिया, कासगंज, गोंडा, अलीगढ़, गोरखपुर, वाराणसी, मिर्जापुर और बस्ती समेत प्रदेश के कई जिलों में किसानों और मजदूरों ने प्रदर्शन किया। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से सरकार को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन भी सौंपा। प्रदर्शन के दौरान श्रमिक संगठनों और किसान संगठनों के नेताओं ने केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए श्रमिकों और किसानों के हित में तत्काल कदम उठाने की मांग की।
परिवर्तन चौक से राज्यपाल भवन की ओर मार्च
राजधानी लखनऊ में बड़ी संख्या में मजदूर और किसान परिवर्तन चौक पर एकत्र हुए। यहां से प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल भवन की ओर मार्च शुरू किया। पुलिस ने केडी सिंह बाबू स्टेडियम के पास मार्च को रोक दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों ने वहीं सभा की। सभा में विभिन्न श्रमिक और किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना पक्ष रखा तथा मांगों को पूरा किए जाने की मांग की।
सभा को एटक के महामंत्री चंद्रशेखर, इंटक के महामंत्री एचएन तिवारी, एचएमएस के महामंत्री उमाशंकर मिश्र, सीटू के महामंत्री प्रेमनाथ राय, टीयूसीसी के महामंत्री डॉ. आरसी, सेवा की सीता बहन, एआईयूटीयूसी के महामंत्री बालेन्द्र कटियार और एक्टू के नेता केएमएस. मगन ने संबोधित किया। इसके अलावा उत्तर प्रदेश किसान सभा के प्रवीण सिंह तथा अखिल भारतीय किसान यूनियन (शक्ति) के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश यादव ने भी सभा को संबोधित किया।
बड़ी संख्या में संगठित-असंगठित श्रमिकों की भागीदारी
प्रदर्शन में अरुण गोपाल मिश्रा, अविनाश पांडे, पीयूष मिश्रा, विद्याकांत तिवारी, जितेंद्र तिवारी, हर्ष वर्धन, संतोष, विक्रम सिंह गोंड और देवेंद्र पाण्डेय के नेतृत्व में संगठित एवं असंगठित क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रमिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। नेताओं ने कहा कि श्रमिकों और किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर संयुक्त संघर्ष को आगे भी जारी रखा जाएगा और सरकार पर मांगों को स्वीकार करने के लिए दबाव बनाया जाएगा।
राज्यपाल कार्यालय में सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल कार्यालय पहुंचकर राज्यपाल के प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में चंद्रशेखर, उमाशंकर मिश्र, एचएन. तिवारी, सत्येंद्र कुमार मौर्य और अनिल कुमार शुक्ला शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के माध्यम से श्रमिकों और किसानों की विभिन्न मांगों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए उनके समाधान की मांग की।
वहीं भारतीय किसान यूनियन अवध, संबद्ध हिंद मजदूर सभा के सैकड़ों सदस्यों ने साथी राजेंद्र यादव और राधेश्याम यादव के नेतृत्व में लखनऊ विकास प्राधिकरण के समक्ष भी धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और सरकार से श्रमिकों तथा किसानों से जुड़े मुद्दों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की।
बिजली कर्मचारियों ने निजीकरण के खिलाफ संघर्ष तेज करने का ऐलान किया
इससे पहले बेगम हजरत महल पार्क के समक्ष आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज पूरे देश का नारा “कारपोरेट भारत छोड़ो” है और बिजली कर्मचारी निजीकरण के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देशभर में बिजली क्षेत्र के कर्मचारी निजीकरण के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। शैलेंद्र दुबे ने कहा कि हरियाणा के बिजली कर्मचारी रात्रि 12 बजे से 72 घंटे की हड़ताल पर जा रहे हैं। उन्होंने बिजली क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ आंदोलन को व्यापक बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि कर्मचारियों और श्रमिकों के हितों से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष जारी रहेगा।