तुर्किए से लौटते समय ट्रंप का विमान गुपचुप बदला गया। रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल ने ईरानी हत्या की साजिश और एयर फोर्स वन पर मिसाइल खतरे की चेतावनी दी थी।

नई दिल्ली/अमर भारती। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक बेहद असाधारण घटना का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में तुर्किए के अंकारा में NATO शिखर सम्मेलन से लौटते समय ट्रंप को अचानक एयर फोर्स वन से एक छोटे सैन्य विमान में शिफ्ट किया गया था। यह फैसला उस समय लिया गया, जब इजरायली खुफिया तंत्र ने अमेरिका को चेतावनी दी थी कि ईरान ट्रंप की हत्या की साजिश रच सकता है। हालांकि, अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने इस सूचना को लेकर कम भरोसा जताया था।
इस घटनाक्रम से जुड़ी जानकारी द वॉशिंगटन पोस्ट की एक ताजा रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल की ओर से मिली चेतावनी में यह आशंका भी जताई गई थी कि ईरान एयर फोर्स वन को मिसाइल से निशाना बना सकता है। इसके बाद अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने एहतियात के तौर पर ट्रंप की यात्रा योजना में बड़ा बदलाव किया।
इजरायल ने CIA को दी थी ट्रंप की हत्या की चेतावनी
रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली खुफिया जानकारी अमेरिका की सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) तक पहुंची थी। इसमें डोनल्ड ट्रंप की हत्या की संभावित ईरानी साजिश को लेकर चेतावनी दी गई थी।
हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों के बीच इस सूचना को लेकर पूरी तरह सहमति नहीं थी। रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि CIA के विश्लेषकों का इस खुफिया जानकारी पर भरोसा कम था और उन्होंने ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों तक अपनी चिंताएं पहुंचाई थीं।
सीक्रेट सर्विस ने फिर भी नहीं लिया जोखिम
खुफिया सूचना को लेकर संदेह होने के बावजूद अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने जोखिम लेने के बजाय ट्रंप की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। अंकारा से रवाना होने से पहले राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को गुपचुप तरीके से एक छोटे सैन्य विमान में स्थानांतरित किया गया। इस पूरे ऑपरेशन को बेहद गोपनीय रखा गया था। इसका मकसद संभावित खतरे की स्थिति में ट्रंप को वैकल्पिक और अपेक्षाकृत सुरक्षित हवाई मार्ग उपलब्ध कराना था।
ट्रंप ने कहा- सीक्रेट सर्विस की बात मानी
जब डोनल्ड ट्रंप से विमान बदलने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने संकेत दिया कि उन्होंने सीक्रेट सर्विस के निर्देशों का पालन किया था। यानी विमान बदलने का फैसला राष्ट्रपति की व्यक्तिगत पसंद के बजाय सुरक्षा एजेंसियों की सलाह के आधार पर लिया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों के लिए इस मामले में मुख्य प्राथमिकता यह थी कि भले ही खुफिया सूचना पूरी तरह पुष्ट न हो, लेकिन राष्ट्रपति की सुरक्षा में किसी संभावित खतरे को नजरअंदाज न किया जाए।
तुर्किए की जांच में नहीं मिला ठोस साजिश का सबूत
इस मामले को लेकर एक अहम पहलू यह भी है कि तुर्किए की सुरक्षा एजेंसियों ने भी संभावित खतरे की जांच की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें अंकारा में डोनल्ड ट्रंप की हत्या की कोई ठोस साजिश नहीं मिली। यही वजह है कि इस घटनाक्रम ने अमेरिकी खुफिया तंत्र के सामने एक मुश्किल सवाल खड़ा किया-जब सूचना की विश्वसनीयता कम थी, तब क्या राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए इतना बड़ा कदम उठाना जरूरी था?
इजरायली खुफिया जानकारी पर उठे सवाल
इस घटना ने अमेरिका और इजरायल के बीच खुफिया सहयोग को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। एक तरफ इजरायल ने डोनल्ड ट्रंप की जान को खतरा होने की चेतावनी दी, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी खुफिया विश्लेषकों ने इस सूचना को पर्याप्त रूप से विश्वसनीय नहीं माना। इसके बावजूद सीक्रेट सर्विस ने संभावित खतरे को गंभीरता से लिया। यही विरोधाभास इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बनाता है।
ईरान और ट्रंप के बीच पहले से बढ़ा है तनाव
डोनल्ड ट्रंप और ईरान के बीच तनाव पहले से ही बेहद गंभीर रहा है। जुलाई में ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि अगर ईरान उनकी हत्या करता है तो अमेरिका ईरान के खिलाफ बेहद कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा। ऐसे माहौल में तुर्किए से लौटते समय राष्ट्रपति के विमान में अचानक बदलाव सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह पुष्टि नहीं हुई है कि ईरान वास्तव में ट्रंप की हत्या की साजिश को अंजाम देने की स्थिति में था।
डोनल्ड ट्रंप के विमान बदलने का यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था की असाधारण सतर्कता को दिखाता है। इजरायल से मिली खुफिया सूचना पर CIA का भरोसा कम था, लेकिन सीक्रेट सर्विस ने संभावित खतरे को नजरअंदाज नहीं किया। फिलहाल सबसे अहम तथ्य यही है कि ट्रंप की हत्या की कथित ईरानी साजिश की सूचना की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी और तुर्किए में भी कोई ठोस साजिश सामने नहीं आई।
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