रूस में नौकरी का सपना पड़ा भारी, 97 दिन बाद घर लौटे पिथौरागढ़ के दो भाई; 8 लाख गंवाने का आरोप

नई दिल्ली/अमर भारती। बेहतर भविष्य और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना लेकर रूस गए पिथौरागढ़ के दो भाइयों के लिए विदेश में नौकरी का अनुभव बेहद मुश्किल साबित हुआ। चिमिस्यानौला निवासी आनंद सिंह कार्की और भूपेंद्र सिंह कार्की करीब 97 दिन बाद 11 अगस्त की देर शाम सकुशल घर लौटे। दोनों भाइयों का आरोप है कि विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे करीब 8 लाख रुपये लिए गए, लेकिन रूस पहुंचने के बाद न तो तय नौकरी मिली और न ही वादा किया गया वेतन।
परिजनों के मुताबिक, दोनों भाई बेहतर कमाई की उम्मीद में रूस गए थे। वहां पहुंचने के बाद उन्हें विपरीत परिस्थितियों में काम करना पड़ा और अलग-अलग मदों के नाम पर उनकी कमाई से रकम काटी जाती रही। भाइयों ने जिस एजेंट पर आरोप लगाया है, वह उनके अनुसार दक्षिण अफ्रीका का रहने वाला था।
50 हजार रुपये मासिक वेतन का किया गया था वादा
आनंद सिंह कार्की के अनुसार, रूस भेजने से पहले उन्हें हर महीने 50 हजार रुपये वेतन देने का भरोसा दिया गया था। हालांकि रूस पहुंचने के बाद उन्हें 20 हजार रुपये देने की बात कही गई। उनका आरोप है कि यह रकम भी नियमित रूप से नहीं मिली।
आनंद के मुताबिक, एजेंट हर बार भुगतान बाद में करने की बात कहता रहा। करीब तीन महीने के दौरान उन्हें केवल तीन बार रकम मिली। पहली बार 11 हजार रुपये, दूसरी बार 1,500 रुपये और तीसरी बार 5 हजार रुपये दिए गए। इस तरह लगभग तीन महीने की मेहनत के बदले उन्हें कुल 17,500 रुपये ही मिले।
अलग-अलग मदों के नाम पर रकम काटने का आरोप
आनंद का आरोप है कि रूस के एजेंट ने छोटी-छोटी रकम भी उनकी मजदूरी से काटी। कभी पुलिस से बचाने के नाम पर 3,500 रुपये, कभी सामान गिरने के नाम पर 1,200 रुपये और बस के नाम पर 5,000 रुपये काटे गए। उनका कहना है कि इस तरह जो थोड़ी-बहुत रकम उन्हें मिलती थी, उसमें भी अलग-अलग कटौतियां कर दी जाती थीं। इससे उनके सामने आर्थिक और मानसिक परेशानियां लगातार बढ़ती गईं।
दूसरे कर्मचारियों को मिल रहा था 70 हजार तक वेतन
आनंद ने बताया कि जिस ट्रेवल कंपनी में वह काम कर रहे थे, वहां नियमित कर्मचारियों को करीब 70 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था। ओवरटाइम करने पर यह कमाई करीब 90 हजार रुपये तक पहुंच जाती थी। कर्मचारियों के आने-जाने के लिए निजी वाहन की सुविधा भी थी।
दूसरी ओर, उनका आरोप है कि उन्हें जिस नौकरी और वेतन का भरोसा देकर रूस भेजा गया था, वह पूरा नहीं किया गया। इससे उन्हें अपने साथ हुए कथित धोखे का एहसास और ज्यादा हुआ।
मां ने जैसे-तैसे जुटाए थे 8 लाख रुपये
दोनों भाइयों की मां मीरा कार्की ने बेटों के बेहतर भविष्य की उम्मीद में करीब आठ लाख रुपये जुटाए थे। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से मजबूत नहीं थी। रूस में नौकरी के जरिए बेटों की कमाई से घर की स्थिति सुधारने की उम्मीद थी।
लेकिन विदेश जाने के बाद परिस्थितियां उम्मीद के विपरीत हो गईं। परिवार का कहना है कि आठ लाख रुपये खर्च होने के बावजूद दोनों भाइयों को तय रोजगार और वेतन नहीं मिल सका। अब मां ने सरकार से उनके पैसे वापस दिलाने में मदद की मांग की है।
97 दिन बाद घर लौटे तो परिवार ने ली राहत की सांस
रूस में करीब 97 दिन मुश्किल हालात में रहने के बाद दोनों भाई 11 अगस्त की देर शाम अपने घर पहुंचे। बेटों को सुरक्षित देखकर परिवार ने राहत की सांस ली। मां की आंखों में बेटों की वापसी की खुशी के साथ बीते महीनों की चिंता भी साफ दिखाई दी।
रूस में फंसे दोनों भाइयों की वापसी के बाद भाजपा नेताओं ने भी उनके घर पहुंचकर कुशलक्षेम जानी। भाजपा नेता रामदेव वर्मा ने दोनों भाइयों की सुरक्षित वापसी में सहयोग के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। परिवार ने भी दोनों भाइयों की सकुशल वापसी में सहयोग के लिए मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। अब परिवार की सबसे बड़ी मांग है कि विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लिए गए करीब आठ लाख रुपये वापस दिलाए जाएं और कथित एजेंट के खिलाफ कार्रवाई हो।
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