
निघासन, खीरी। नेपाल से प्रवाहित होकर आने वाली मोहाना नदी इन दिनों अपने रौद्र रूप में है। नदी के तेज बहाव और लगातार हो रहे कटान से स्थानीय तहसील क्षेत्र के ग्राम जसनगर के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। संभावित खतरे को देखते हुए तहसील प्रशासन ने गांव के नौ परिवारों को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित कराया है। वहीं लगातार हो रहे कटान से ग्रामीणों में बेघर होने की दहशत बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार, जसनगर को मोहाना नदी के कटान से बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने वर्ष 2023-24 में करीब चार करोड़ रुपये की लागत से 900 मीटर लंबाई में जियो ट्यूब लगाने की परियोजना को मंजूरी दी थी। नदी के कटान को रोकने और गांव को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से लगाए गए जियो ट्यूबों से ग्रामीणों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन परियोजना के अगले ही साल नदी का प्रचंड बहाव कई जियो ट्यूबों को अपने साथ बहा ले गया। बचे हुए जियो ट्यूब बैग भी अब क्षतिग्रस्त होकर दम तोड़ने की कगार पर हैं।
गांव, रेलवे ट्रैक और बांध पर मंडरा रहा खतरा
मोहाना नदी के लगातार कटान से जसनगर गांव के साथ ही रेलवे ट्रैक और बांध पर भी खतरा बढ़ता जा रहा है। कटान की तीव्रता को देखते हुए स्थानीय तहसील प्रशासन ने एहतियात के तौर पर नौ परिवारों को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित किया है। प्रशासन की ओर से नदी की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले करीब 15 वर्षों से मोहाना नदी की बाढ़ और कटान ने क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को काफी बदल दिया है। हर वर्ष नदी के कटान से जमीन का बड़ा हिस्सा नदी में समाता जा रहा है। इस बार नदी के तेवर और अधिक खतरनाक नजर आ रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में अपने घर और जमीन बचाने को लेकर चिंता बढ़ गई है।
एसडीएम और तहसीलदार कर रहे निगरानी
मोहाना और शारदा नदियों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। एसडीएम यदुवीर सिंह और तहसीलदार देवेंद्र मणि त्रिपाठी ग्रामीणों को संभावित खतरे से बचाने और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए प्रयासरत हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि कटान रोकने के लिए स्थायी और प्रभावी इंतजाम किए जाएं, ताकि जसनगर गांव, रेलवे ट्रैक और बांध को सुरक्षित रखा जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो मोहाना नदी जसनगर के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है।