
लखनऊ। आज के डिजिटल दौर में लगभग हर गतिविधि अपने पीछे डेटा छोड़ती है। स्मार्टफोन से खींची गई तस्वीर, ऑनलाइन भुगतान, अस्पताल का अपॉइंटमेंट, बैंकिंग लेन-देन या किसी डिजिटल सेवा का इस्तेमाल—हर कदम पर डेटा तैयार होता है। इस डेटा को सुरक्षित तरीके से स्टोर करने, प्रोसेस करने, मैनेज करने और जरूरत पड़ने पर तुरंत एक्सेस करने के लिए मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होती है। इसी जरूरत को पूरा करने में क्लाउड कंप्यूटिंग की भूमिका तेजी से महत्वपूर्ण हुई है।
क्लाउड को एक ऐसे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर समझा जा सकता है, जहां सुरक्षित डेटा सेंटर्स में मौजूद शक्तिशाली सर्वर्स के जरिए डेटा और एप्लिकेशन्स को स्टोर और संचालित किया जाता है। इसके लिए संस्थानों को हर काम के लिए स्थानीय डिवाइसेज या अपने परिसर में मौजूद ऑन-प्रिमाइस सर्वर्स पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता। क्लाउड प्लेटफॉर्म रिमोट इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए डेटा स्टोरेज, प्रोसेसिंग, बैकअप और एप्लिकेशन संचालन की सुविधा उपलब्ध कराते हैं।
क्लाउड को आसान भाषा में डिजिटल वेयरहाउस भी कहा जा सकता है। जिस तरह किसी भौतिक वेयरहाउस में सामान को व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखा जाता है, उसी तरह क्लाउड में डेटा स्टोर किया जाता है, एप्लिकेशन्स चलाए जाते हैं, बैकअप तैयार किए जाते हैं और अधिकृत यूजर्स को जरूरत के मुताबिक कहीं से भी डेटा तक सुरक्षित पहुंच दी जाती है। बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवा, निजी कंपनियों और सरकारी एजेंसियों समेत कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाओं के संचालन के लिए क्लाउड अब बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा बन चुका है।
डेटा प्रोटेक्शन क्यों बन गया है जरूरी
जैसे-जैसे व्यक्तिगत जीवन, कारोबार और सरकारी सेवाओं से जुड़े अधिक से अधिक काम ऑनलाइन हो रहे हैं, डेटा की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती जा रही है। व्यक्तिगत जानकारी, वित्तीय रिकॉर्ड और कारोबारी डेटा आज बेहद मूल्यवान संपत्ति बन चुके हैं। ऐसे में इनकी चोरी, दुरुपयोग, नुकसान या अनधिकृत एक्सेस को रोकना संस्थानों के लिए बड़ी प्राथमिकता है।
डेटा ब्रीच की स्थिति में पहचान की चोरी, वित्तीय धोखाधड़ी, ग्राहकों के भरोसे को नुकसान और जरूरी डिजिटल सेवाओं में व्यवधान जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ सकती हैं। प्रभावी डेटा प्रोटेक्शन का उद्देश्य केवल जानकारी को चोरी से बचाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि डेटा सटीक रहे और जरूरत पड़ने पर अधिकृत यूजर के लिए उपलब्ध हो।
स्पैम, फिशिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों ने भी डिजिटल
सुरक्षा के लिए नए समाधान अपनाने की जरूरत बढ़ाई है। इन खतरों से निपटने के लिए टेलीकॉम कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं। उदाहरण के तौर पर एयरटेल के एआई आधारित एंटी-स्पैम समाधान ने अब तक 93 अरब से अधिक स्पैम कॉल और 4 अरब स्पैम संदेशों की पहचान की है। कंपनी के मुताबिक, इसके अलावा 14 लाख से अधिक धोखाधड़ी वाले लिंक को ब्लॉक किया गया है, जिससे डिजिटल सेवाओं में उपयोगकर्ता सुरक्षा और भरोसा मजबूत करने में मदद मिली है।
स्वायत्त यानी सोवरेन क्लाउड क्या है और क्यों है महत्वपूर्ण ?
डेटा सुरक्षा की बहस के बीच स्वायत्त या सोवरेन क्लाउड की अवधारणा भी तेजी से महत्वपूर्ण हो रही है। सोवरेन क्लाउड ऐसे क्लाउड वातावरण को कहा जाता है, जिसे किसी देश के कानूनी और नियामकीय अधिकार क्षेत्र के भीतर डेटा और क्लाउड संचालन को बनाए रखने के लिए तैयार किया जाता है। भारत के संदर्भ में इसका मतलब है कि डेटा को भारतीय कानूनों, नियामकीय आवश्यकताओं और सुरक्षा ढांचे के तहत स्टोर, मैनेज और नियंत्रित किया जाए।
इसे एक आसान उदाहरण से समझा जा सकता है। अगर किसी देश के महत्वपूर्ण दस्तावेजों को विदेश में रखने के बजाय उसी देश के बैंक लॉकर में सुरक्षित रखा जाए, तो उन दस्तावेजों पर स्थानीय कानूनों और संस्थाओं का नियंत्रण अधिक स्पष्ट रहेगा। इसी तरह सोवरेन क्लाउड डेटा पर स्थानीय स्तर पर अधिक नियंत्रण, निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद करता है।
हालांकि, सोवरेन क्लाउड केवल डेटा को किसी देश की भौगोलिक सीमा के भीतर रखने तक सीमित नहीं है। इसमें मेटाडेटा, बैकअप, एन्क्रिप्शन कीज, एक्सेस परमिशन और क्लाउड मैनेजमेंट सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों पर नियंत्रण भी शामिल होता है। इससे संवेदनशील डेटा संभालने वाले संस्थानों को सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
भारत में डेटा रखने से सुरक्षा को कैसे मिलती है मजबूती ?
डेटा को भारत में होस्ट करने से संस्थानों को कानूनी, नियामकीय और परिचालन स्तर पर अधिक स्पष्टता और नियंत्रण हासिल हो सकता है। इससे यह समझना आसान होता है कि डेटा कहां स्टोर किया जा रहा है, किस तरह प्रोसेस हो रहा है और किन अधिकृत पक्षों को उस तक पहुंच हासिल है। संवेदनशील और मिशन-क्रिटिकल डेटा के मामले में यह नियंत्रण विशेष महत्व रखता है।
बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवा, सरकारी सेवाओं, कराधान, रक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में डेटा की सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं। इन क्षेत्रों में डेटा की उपलब्धता के साथ-साथ उसकी गोपनीयता और अखंडता भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।
भारत में डेटा रखने से विदेशी कानूनी अधिकार क्षेत्रों के संपर्क में आने से जुड़े कुछ जोखिमों को कम करने में भी मदद मिल सकती है। साथ ही संस्थान राष्ट्रीय डेटा गवर्नेंस और नियामकीय आवश्यकताओं के साथ अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर तरीके से जोड़ सकते हैं।
एयरटेल ने लॉन्च किया भारत का पहला स्वायत्त टेल्को-ग्रेड क्लाउड
डेटा संप्रभुता और स्थानीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती जरूरत के बीच एयरटेल ने अगस्त 2025 में एक्सटेलिफ़ाय के जरिए एयरटेल क्लाउड लॉन्च किया। कंपनी के मुताबिक, इसके साथ एयरटेल भारत का पहला टेलीकॉम ऑपरेटर बना, जिसने स्वायत्त यानी सोवरेन और टेल्को-ग्रेड क्लाउड प्लेटफॉर्म पेश किया। यह प्लेटफॉर्म मूल रूप से एयरटेल के अपने डिजिटल इकोसिस्टम को सपोर्ट करने के लिए विकसित किया गया था और इसे वास्तविक परिस्थितियों में प्रति मिनट 1.4 अरब तक ट्रांजैक्शन संभालने के लिए परखा गया है।
सॉवरेन-बाय-डिजाइन आर्किटेक्चर पर तैयार एयरटेल क्लाउड का उद्देश्य डेटा, इंफ्रास्ट्रक्चर और कंट्रोल-प्लेन ऑपरेशन्स को भारत में ही होस्ट और नियंत्रित करना है। कंपनी के अनुसार, इससे एंटरप्राइजेज को डेटा रेजिडेंसी, सुरक्षा और अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलती है। एयरटेल के अगली पीढ़ी के डेटा सेंटर्स और देशभर में फैले नेटवर्क पर निर्मित इस प्लेटफॉर्म में 99.99 प्रतिशत अपटाइम, जियो-रिडंडेंसी, एडवांस्ड डिजास्टर रिकवरी, इम्यूटेबल बैकअप और लगातार डेटा रेप्लिकेशन जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
आईएएएस से जनरेटिव एआई तक, सेवाओं की पूरी रेंज
एयरटेल क्लाउड में इंफ्रास्ट्रक्चर-एज-ए-सर्विस (आईएएएस), प्लेटफॉर्म-एज-ए-सर्विस (पीएएएस) और जनरेटिव एआई आधारित सेवाओं की पूरी श्रृंखला उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। इसके जरिए एंटरप्राइजेज और सरकारी संगठन मिशन-क्रिटिकल वर्कलोड्स को सुरक्षित तरीके से संचालित करने, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को तेज करने और अपने डेटा पर अधिक नियंत्रण बनाए रखने में सक्षम हो सकते हैं।
मेइटी सर्टिफिकेशन्स और एयरटेल के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित यह क्लाउड प्लेटफॉर्म स्थानीय स्तर पर नियंत्रित क्लाउड वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। कंपनी के अनुसार, इसे भारतीय बाजार की जरूरतों और डेटा संप्रभुता से जुड़ी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
भारत में निर्मित, भारत के लिए तैयार क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर
एयरटेल क्लाउड का लॉन्च ऐसे समय में हुआ है, जब भारत में डेटा सुरक्षा, डेटा रेजिडेंसी और डिजिटल संप्रभुता पर जोर लगातार बढ़ रहा है। देश में संवेदनशील डेटा और मिशन-क्रिटिकल डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ ऐसे क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग भी बढ़ रही है, जिसमें डेटा के साथ-साथ उसके संचालन और नियंत्रण पर स्थानीय अधिकार स्पष्ट हो।
भारत में निर्मित और भारत के लिए तैयार एयरटेल क्लाउड प्लेटफॉर्म अब देशभर के एंटरप्राइजेज को सेवाएं उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। सोवरेन टेल्को-ग्रेड क्लाउड की यह पहल डेटा सुरक्षा, स्थानीय नियंत्रण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत के बढ़ते फोकस को भी रेखांकित करती है।