INS Nipun: भारतीय नौसेना में शामिल हुआ स्वदेशी ‘INS निपुण’, 300 मीटर गहराई तक करेगा ऑपरेशन

INS Nipun को मुंबई में भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। 8,500 टन का यह स्वदेशी पोत 300 मीटर गहराई तक डाइविंग और पनडुब्बी रेस्क्यू मिशन में सक्षम है।

INS Nipun Indian Navy Diving Support Vessel
मुंबई नौसेना डॉकयार्ड में भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल हुआ स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल INS निपुण।

नई दिल्ली/अमर भारती। INS Nipun: भारतीय नौसेना की ताकत में एक और बड़ा इजाफा हुआ है। मुंबई स्थित नौसेना डॉकयार्ड में स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल INS निपुण को भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में पोत को औपचारिक रूप से कमीशन किया गया। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) द्वारा निर्मित यह पोत गहरे समुद्र में जटिल डाइविंग, पनडुब्बी बचाव और समुद्र के भीतर मरम्मत जैसे महत्वपूर्ण अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है।

300 मीटर गहराई तक डाइविंग ऑपरेशन

भारतीय नौसेना के पास लगभग 8,500 टन वजनी INS निपुण में करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी गहरे समुद्र में ऑपरेशन करने की क्षमता है। यह पोत समुद्र की करीब 300 मीटर गहराई तक सैचुरेशन डाइविंग मिशन को अंजाम दे सकता है। इसके अलावा 75 मीटर तक साइड-स्टेज डाइविंग ऑपरेशन की क्षमता भी इसमें मौजूद है। खराब मौसम और समुद्र में तेज लहरों के दौरान भी जहाज को स्थिर रखने के लिए इसमें अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इससे गहरे समुद्र में चलाए जाने वाले बचाव और मरम्मत अभियानों में इसकी उपयोगिता बढ़ जाती है।

फंसी पनडुब्बी के चालक दल को बचाने में सक्षम

INS निपुण को खास तौर पर ऐसे मिशनों के लिए तैयार किया गया है, जिनमें समुद्र के भीतर फंसे नौसैनिकों को सुरक्षित बाहर निकालना हो। अगर किसी पनडुब्बी में तकनीकी खराबी आ जाती है या वह समुद्र की गहराई में किसी वजह से फंस जाती है, तो INS निपुण उसके चालक दल को बचाने के अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा समुद्र के भीतर किसी जहाज या मशीनरी में खराबी आने पर यह पोत मौके पर ही मरम्मत संबंधी सहायता उपलब्ध करा सकता है। भारतीय नौसेना के लिए सरकार की पहल सराहनीय़ है।

15 टन की सब-सी क्रेन और ROV से लैस

INS Nipun में गहरे समुद्र में जटिल अभियानों के लिए भारतीय नौसेना के कई अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। इसमें 15 टन क्षमता वाली सब-सी क्रेन, डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स यानी ROV शामिल हैं। ROV करीब 1,000 मीटर की गहराई तक काम कर सकते हैं। इनकी मदद से समुद्र की गहराई में मौजूद वस्तुओं की निगरानी, खोज और तकनीकी अभियानों को अंजाम दिया जा सकता है। डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम की मदद से पोत समुद्र में अपनी स्थिति को नियंत्रित रखते हुए जटिल ऑपरेशन कर सकता है।

अस्पताल, ICU और ऑपरेशन थिएटर की सुविधा

भारतीय नौसेना निपुण की एक और बड़ी खासियत इसकी मेडिकल सुविधाएं हैं। पोत में आठ बिस्तरों वाला अस्पताल, ICU, ऑपरेशन थिएटर और हाइपरबेरिक मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध हैं। गहरे समुद्र में लंबे समय तक डाइविंग करने वाले गोताखोरों को कई तरह की चिकित्सकीय परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में जहाज पर मौजूद मेडिकल सुविधाएं तत्काल उपचार उपलब्ध कराने में मदद करेंगी।

INS निस्तार का मिलेगा पश्चिमी कमान में साथ

भारतीय नौसेना निपुण के शामिल होने से पश्चिमी नौसेना कमान को एक समर्पित डाइविंग सपोर्ट वेसल मिल गया है। यह पोत INS निस्तार के समकक्ष है, जो पहले से पूर्वी नौसेना कमान के तहत सेवाएं दे रहा है। इस तरह भारतीय नौसेना के पूर्वी और पश्चिमी दोनों समुद्री क्षेत्रों में गहरे समुद्र में बचाव और डाइविंग अभियानों की क्षमता मजबूत हुई है।

2018 में हुआ था दोनों जहाजों का अनुबंध

रक्षा मंत्रालय ने सितंबर 2018 में हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के साथ करीब 2,393 करोड़ रुपये की लागत से दो डाइविंग सपोर्ट वेसल के निर्माण का अनुबंध किया था। इनमें INS निस्तार की नींव दिसंबर 2019 में रखी गई थी, जबकि INS निपुण की नींव इसके करीब तीन महीने बाद रखी गई।

विशाखापत्तनम स्थित HSL में तैयार INS निपुण को व्यापक साज-सज्जा और समुद्री परीक्षणों के बाद 30 जुलाई को भारतीय नौसेना को सौंपा गया था। अब 31 अगस्त को इसे औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल कर लिया गया है। INS निपुण का नौसेना में शामिल होना भारत की बढ़ती स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता और गहरे समुद्र में रणनीतिक एवं बचाव अभियानों के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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