
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बहुजन समाज पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 31 अगस्त को लखनऊ स्थित प्रदेश कार्यालय में विशेष बैठक बुलाई है। बैठक में प्रदेश संगठन के पदाधिकारियों के साथ ही सभी 75 जिलों के जिलाध्यक्ष और अन्य प्रमुख पदाधिकारी शामिल होंगे। चुनाव से पहले बुलाई गई इस बैठक को पार्टी की तैयारियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इसमें जिलों में संगठन की स्थिति, जमीनी तैयारियों और आगामी चुनाव को लेकर अब तक किए गए काम की समीक्षा की जाएगी।
बैठक में जिलाध्यक्षों से उनके-अपने जिलों की संगठनात्मक रिपोर्ट ली जाएगी। इसके साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी की रणनीति और संभावित प्रत्याशियों को लेकर भी मंथन होगा। बसपा ने कई विधानसभा क्षेत्रों में प्रभारी प्रत्याशियों के नाम पहले ही घोषित कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, 31 अगस्त की बैठक में पार्टी पदाधिकारियों के अलावा करीब 50 विधानसभा क्षेत्रों में घोषित किए जा चुके प्रभारी प्रत्याशियों को भी बुलाया गया है। ऐसे में बैठक के दौरान चुनावी तैयारियों, क्षेत्रवार समीकरण और प्रत्याशियों की सक्रियता की भी समीक्षा होने की संभावना है।
सितंबर में लगातार दो बड़ी बैठकें, चुनावी रणनीति पर होगा फोकस
बहुजन समाज पार्टी ने 31 अगस्त की बैठक के बाद सितंबर में भी संगठन और चुनावी तैयारियों को लेकर लगातार बैठकें तय की हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, 2 सितंबर को उत्तर प्रदेश समेत राष्ट्रीय टीम की बैठक होगी। इसके बाद उन जिलों के पदाधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी, जहां पार्टी अब तक विधानसभा क्षेत्रों के लिए प्रभारी प्रत्याशियों के नाम तय नहीं कर सकी है। माना जा रहा है कि इन जिलों में प्रत्याशियों के चयन के दौरान स्थानीय परिस्थितियों और जातीय समीकरणों को खास तवज्जो दी जाएगी। पार्टी संगठन स्तर पर इन समीकरणों का आकलन कर ऐसे चेहरों की तलाश में है, जो संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी तौर पर प्रभावी साबित हो सकें।
कांशीराम की पुण्यतिथि पर होने वाले आयोजन पर भी चर्चा संभव
बैठक में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के अलावा पार्टी के संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर होने वाले कार्यक्रम को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। कांशीराम की पुण्यतिथि 9 अक्टूबर को होती है और इस मौके पर बसपा की ओर से बड़े आयोजन की तैयारियां की जाती हैं। ऐसे में 31 अगस्त की बैठक में संगठनात्मक तैयारियों के साथ इस आयोजन की रूपरेखा और कार्यकर्ताओं की भागीदारी को लेकर भी रणनीति बनाई जा सकती है।
रणधीर सिंह बेनीवाल की बसपा में वापसी के आसार
इस बीच बसपा के भीतर एक और अहम घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी से 2 अगस्त को निष्कासित किए गए रणधीर सिंह बेनीवाल की दोबारा वापसी के आसार जताए जा रहे हैं। बसपा सूत्रों की मानें तो उनकी वापसी का रास्ता साफ हो चुका है और अब केवल आधिकारिक घोषणा होना बाकी है। यदि उनकी वापसी होती है तो उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। पार्टी से निष्कासन के समय बेनीवाल के पास पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारी थी। अब उनकी संभावित वापसी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बसपा की चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
चुनाव से पहले संगठन को सक्रिय करने में जुटी बसपा
लगातार बैठकों और संगठनात्मक गतिविधियों के जरिए बसपा चुनाव से पहले अपने कैडर को सक्रिय करने और जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। 31 अगस्त की बैठक से लेकर सितंबर में होने वाली बैठकों तक पार्टी का फोकस विधानसभा क्षेत्रों की समीक्षा, प्रभारी प्रत्याशियों के चयन, जातीय समीकरण और संगठन की सक्रियता पर रहने की उम्मीद है। ऐसे में आने वाले दिनों में बसपा की ओर से प्रत्याशियों और चुनावी रणनीति को लेकर और भी अहम फैसले सामने आ सकते हैं।