स्कूल की जांच बनी जिंदगी की राह, RBSK टीम ने सात वर्षीय अनुष्का के दिल का छेद खोजा


हरदोई। बिलग्राम क्षेत्र के ग्राम अरुत्यारपुर निवासी सात वर्षीय अनुष्का के जन्मजात हृदय रोग का समय रहते पता लगाकर स्वास्थ्य विभाग ने उसका सफल उपचार कराया। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) की टीम द्वारा स्कूल में की गई स्वास्थ्य जांच के दौरान बच्ची के हृदय में जन्मजात छेद (CHD) की समस्या सामने आई। इसके बाद आवश्यक जांच और प्रक्रिया पूरी कर उसे उच्च चिकित्सा संस्थान भेजा गया, जहां अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सफल ऑपरेशन किया।
रिकॉर्ड के अनुसार RBSK टीम-ए ने 11 जुलाई 2025 को स्कूल विजिट के दौरान अनुष्का की स्वास्थ्य जांच की थी। जांच में बच्ची में स्वास्थ्य संबंधी समस्या सामने आने के बाद चिकित्सकीय परीक्षण और आवश्यक जांच कराई गईं। जांच में जन्मजात हृदय रोग की पुष्टि होने पर स्वास्थ्य विभाग ने विशेषज्ञ उपचार की प्रक्रिया शुरू की।
अनुष्का को 17 अगस्त 2026 को उपचार के लिए भर्ती कराया गया। इसके बाद उसे ऑपरेशन के लिए अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज, अलीगढ़ भेजा गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बच्ची के हृदय में मौजूद छेद का सफल ऑपरेशन किया। उपचार के बाद स्वास्थ्य में सुधार होने पर 26 अगस्त 2026 को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
समय पर पहचान से मिला बेहतर उपचार
सीएचसी प्रभारी डॉ. हेमंत राजपूत ने बताया कि RBSK टीम द्वारा स्कूलों में बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच की जाती है। इसी जांच के दौरान अनुष्का में जन्मजात हृदय रोग की पहचान हुई। समय रहते बीमारी की जानकारी मिलने के बाद बच्ची को उच्च चिकित्सा संस्थान भेजकर उपचार कराया गया।
उन्होंने कहा कि RBSK का उद्देश्य बच्चों में जन्मजात बीमारियों समेत अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की समय रहते पहचान करना और उन्हें आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना है। स्कूल स्तर पर होने वाली नियमित स्वास्थ्य जांच गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम का रहा सहयोग
अनुष्का के उपचार में तत्कालीन अधीक्षक डॉ. राजेंद्र सिंह, DEIC मैनेजर मोहम्मद शाहिद, चिकित्साधिकारी डॉ. शैलेश दीक्षित, डॉ. निशा, स्टाफ नर्स अनुपम तथा ऑप्टोमेट्रिस्ट अखिलेश कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग की टीम का सहयोग रहा।
RBSK टीम की सक्रियता से बीमारी की समय पर पहचान और विशेषज्ञ उपचार मिलने से बच्ची के परिजनों ने राहत की सांस ली। यह मामला दर्शाता है कि स्कूलों में नियमित स्वास्थ्य जांच बच्चों में छिपी गंभीर बीमारियों की पहचान कर समय पर उपचार उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा सकती है।