सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर से अवैध मस्जिद हटाने के बाद प्राचीन कुआं मिलने का दावा सामने आया है। ASI जांच और वैज्ञानिक सर्वे की मांग तेज।

नई दिल्ली/अमर भारती। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर से न्यायालय के आदेश के बाद हटाई गई अवैध मस्जिद को लेकर सियासत तेज हो गई है। कार्रवाई के बाद मलबा हटाने के दौरान एक प्राचीन कुआं मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद कुछ हिंदू संगठनों और नेताओं की ओर से पूरे परिसर की खुदाई और वैज्ञानिक जांच की मांग की जा रही है।
कोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई का दावा
प्राचीन कुआं मिलने के बाद साध्वी प्राची ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कलेक्ट्रेट परिसर से मस्जिद को प्रशासन ने न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए हटाया है। उन्होंने कहा कि इस कानूनी कार्रवाई को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। वहीं, इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों का प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर जाने की तैयारी में होने की बात फाइल में कही गई है। कुछ नेताओं को पुलिस द्वारा नजरबंद किए जाने का भी उल्लेख है।
प्राचीन कुआं मिलने के बाद बढ़ी चर्चा
मस्जिद हटाए जाने के बाद मलबे की सफाई के दौरान एक प्राचीन कुआं के मिलने की जानकारी सामने आई। इसके बाद हिंदू संगठनों की ओर से इस स्थल के ऐतिहासिक स्वरूप की जांच की मांग उठाई गई है। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने जिला प्रशासन से मामले की गहन जांच कराने की मांग की। उन्होंने ASI की टीम बुलाकर कुएं की उम्र और ऐतिहासिक स्थिति की जांच कराने तथा पूरे परिसर का वैज्ञानिक सर्वे कराने की मांग रखी। उन्होंने जांच की वीडियोग्राफी कराने की मांग भी की, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच हो सके।
साध्वी प्राची का बयान
साध्वी प्राची ने खुदाई को लेकर भी बयान दिया और स्थल की जांच कराने की मांग की। उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। हालांकि, किसी पुराने धार्मिक स्थल या ऐतिहासिक संरचना से जुड़े दावे की पुष्टि वैज्ञानिक और पुरातात्विक जांच के बाद ही हो सकती है। फिलहाल प्राचीन कुआं की उम्र और उसके ऐतिहासिक महत्व को लेकर आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
स्वामी यशवीर महाराज ने भी दिया बयान
मामले पर मुजफ्फरनगर के स्वामी यशवीर महाराज की प्रतिक्रिया का भी उल्लेख सामने आया है। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए अपनी बात रखी और कहा कि अतीत की घटनाओं को भी याद किया जाना चाहिए। इस बयान के बाद विवाद ने धार्मिक और राजनीतिक दोनों रूप ले लिए हैं। प्राचीन कुआं के पीछे का रहस्य क्या है इसकी जांच की जा रही है। मस्जिद में कुआं होना अपने आप में संदेश उत्पन्न करता है।
निष्पक्ष जांच की मांग
विकास त्यागी ने पूरे परिसर का वैज्ञानिक सर्वे कराने और ASI जैसी विशेषज्ञ संस्था की मदद से प्राचीन कुआं की ऐतिहासिकता की जांच कराने की मांग की है। फिलहाल इस मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि मिला हुआ कुआं कितना पुराना है और उसका ऐतिहासिक महत्व क्या है। इसका जवाब वैज्ञानिक जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। सहारनपुर में हुई कार्रवाई के बाद अब प्रशासन के सामने चुनौती कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ सामने आए ऐतिहासिक दावों की निष्पक्ष जांच कराने की भी है।
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