दिल्ली में भवन गिरने से रांची की सुरक्षा पर सवाल, पुराने मकान और बेसमेंट बने चिंता

दिल्ली में भवन गिरने की घटना के बाद रांची में पुराने भवनों, बेसमेंट और गहरी खुदाई वाले निर्माण स्थलों की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। जानिए नियम और खतरे।

रांची में पुराने भवन और बेसमेंट निर्माण से सुरक्षा पर सवाल
रांची में पुराने भवनों के आसपास निर्माण और बेसमेंट की खुदाई से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी।

नई दिल्ली/अमर भारती। दिल्ली में पांच मंजिला भवन के अचानक गिरने की घटना ने निर्माणाधीन और पुराने भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे के बाद रांची में भी पुराने भवनों, बेसमेंट और गहरी खुदाई वाले निर्माण स्थलों की सुरक्षा जांच की जरूरत महसूस की जा रही है। शहर में कई स्थानों पर पुराने भवनों के आसपास नए निर्माण और बेसमेंट की खुदाई चल रही है, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

दिल्ली हादसे के बाद रांची में भी सतर्कता जरूरी

दिल्ली की घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि निर्माण कार्य में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे में बदल सकती है। ऐसे में रांची में पुराने और जर्जर भवनों के साथ-साथ निर्माणाधीन इमारतों का सुरक्षा ऑडिट कराना जरूरी हो गया है। खासकर उन इलाकों में विशेष निगरानी की जरूरत है, जहां घनी आबादी के बीच पुराने भवन मौजूद हैं और उनके ठीक आसपास नई इमारतों का निर्माण किया जा रहा है।

लालपुर में पिलर गिरने से मजदूर की मौत

रांची में भी निर्माण स्थल पर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाली घटना सामने आ चुकी है। दो दिन पहले लालपुर इलाके में निर्माणाधीन मकान में पिलर गिरने से एक मजदूर की मौत हो गई थी। इस घटना ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों के पालन और मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

अपर बाजार समेत कई इलाकों में पुराने भवनों पर दबाव

रांची के अपर बाजार समेत शहर के कई घने इलाकों में पुराने भवनों में दोबारा निर्माण और बेसमेंट में काम किए जाने की स्थिति सामने आ रही है। कई जगहों पर बड़े और पुराने भवनों के ठीक बगल में नई इमारतों का निर्माण चल रहा है। निर्माण के दौरान होने वाली गहरी खुदाई से आसपास के पुराने भवनों की नींव और संरचना पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऐसे मामलों में समय रहते संरचनात्मक जांच और जरूरी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो हादसे का खतरा बढ़ सकता है।

क्या कहते हैं झारखंड बिल्डिंग बायलाज?

झारखंड बिल्डिंग बायलाज के तहत भवन निर्माण में संरचनात्मक सुरक्षा और स्वीकृत नक्शे के अनुरूप निर्माण जरूरी है। बेसमेंट निर्माण को लेकर भी नियम निर्धारित हैं। नियमों के अनुसार, ऐसे स्थान पर बेसमेंट नहीं बनाया जा सकता जहां जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध न हो। बेसमेंट निर्माण की अनुमति संबंधित विकास योजना और सक्षम प्राधिकरण के नियमों के तहत ही दी जा सकती है। छोटे आवासीय भवनों के मामले में भी बेसमेंट निर्माण को सामान्य छूट के तहत अनुमति नहीं दी जाती। बिना पूर्व स्वीकृति वाले छोटे आवासीय भवनों में बेसमेंट को लेकर नियमों में स्पष्ट प्रावधान हैं।

गहरी खुदाई से पड़ोसी भवनों को खतरा

सबसे बड़ी चिंता उन निर्माण स्थलों को लेकर है, जहां पुराने भवनों के ठीक बगल में गहरी खुदाई की जा रही है। गहरी खुदाई के दौरान आसपास की मिट्टी खिसकने, नींव कमजोर होने या पुराने भवनों की संरचना पर दबाव पड़ने का खतरा रहता है। ऐसे में निर्माण शुरू करने से पहले आसपास के भवनों की स्ट्रक्चरल कंडीशन की जांच और जरूरी सपोर्ट सिस्टम की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

निर्माणकर्ताओं की लापरवाही पर उठ रहे सवाल

रांची में कई निर्माण स्थलों पर नियमों के पालन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि कई जगह बेसमेंट की खुदाई से पहले आसपास के भवनों की संरचनात्मक स्थिति की पर्याप्त जांच नहीं की जाती। गहरी खुदाई के दौरान पड़ोसी भवनों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी सपोर्ट और सुरक्षा उपायों की अनदेखी भी खतरे को बढ़ा सकती है। वहीं, पुराने भवनों में दोबारा निर्माण या अतिरिक्त मंजिल बनाने से पहले उनकी संरचनात्मक क्षमता का आकलन किया जाना जरूरी है।

हादसे के बाद नहीं, पहले जागने की जरूरत

दिल्ली की घटना और रांची में हालिया निर्माण हादसा दोनों ही इस बात की ओर इशारा करते हैं कि भवन सुरक्षा को लेकर सिर्फ हादसे के बाद कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। पुराने भवनों, बेसमेंट और गहरी खुदाई वाले निर्माण स्थलों का समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट, स्वीकृत नक्शे की जांच और निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों की निगरानी जरूरी है। रांची जैसे तेजी से फैलते शहर में यदि समय रहते निर्माण सुरक्षा को लेकर सख्ती नहीं बरती गई, तो छोटी सी लापरवाही भविष्य में बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है।

यहां भी पढ़ें-

नैमिषारण्य: जहां आज भी जिंदा है ऋषियों की ज्ञान परंपरा, चक्रतीर्थ की आस्था, 88 हजार ऋषियों की पौराणिक सभा, व्यास-सूत गद्दी की ज्ञान परंपरा

VHP का स्थापना दिवस समारोह सम्पन्न: संस्कार, सेवा और सुरक्षा को लेकर वक्ताओं ने रखे विचार