
अमेठी की गौशालाओं पर डीएम सख्त, सात ब्लॉकों में शून्य प्रगति पर BDO को नोटिस
अमेठी। निराश्रित गोवंशों के संरक्षण और गो आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को लेकर जिलाधिकारी संजय चौहान ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में गो संरक्षण अनुश्रवण एवं मूल्यांकन समिति की बैठक में उन्होंने गौशालाओं में हरा चारा, भूसा, पशु आहार, स्वच्छ पेयजल, शेड और चिकित्सीय सुविधाओं की स्थिति की समीक्षा की।
बैठक में ब्लॉक स्तर पर आयोजित होने वाली गो संरक्षण संबंधी बैठकों की भी समीक्षा की गई। कई विकासखंडों में अब तक बैठक आयोजित नहीं होने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई और सभी खंड विकास अधिकारियों को तत्काल बैठकें आयोजित कराने के निर्देश दिए।
सात ब्लॉकों में शून्य प्रगति, कारण बताओ नोटिस के निर्देश
निराश्रित गोवंशों के संरक्षण की प्रगति की समीक्षा के दौरान संग्रामपुर, भेंटुआ, बहादुरपुर, शाहगढ़, मुसाफिरखाना, जगदीशपुर और शुकुल बाजार विकासखंडों में शून्य प्रगति सामने आई। इस पर डीएम ने गंभीर नाराजगी जताते हुए संबंधित खंड विकास अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन की प्राथमिकता वाले इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।
गौशालाओं में चारा-पानी और इलाज की व्यवस्था पर जोर
जिलाधिकारी ने सभी नोडल अधिकारियों से जनपद की प्रत्येक गौशाला में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि गो आश्रय स्थलों पर पर्याप्त मात्रा में पशु आहार, भूसा और हरा चारा उपलब्ध रहे। मौसम को देखते हुए गोवंशों के लिए शेड और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाएं भी समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं।
पशु चिकित्साधिकारियों को नियमित रूप से गौशालाओं का भ्रमण करने और बीमार एवं कमजोर गोवंशों का उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही सभी नोडल अधिकारियों और बीडीओ को नियमित निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी करने को कहा गया।
सहभागिता योजना की भी हुई समीक्षा
बैठक में सहभागिता योजना के तहत गोवंशों की सुपुर्दगी और भुगतान की स्थिति की समीक्षा की गई। डीएम ने निर्देश दिए कि शासन की गाइडलाइन के अनुसार पात्र व्यक्तियों को गोवंश सुपुर्द किए जाएं और भुगतान की प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से पूरी हो।
उन्होंने अधिकारियों को क्षेत्रीय भ्रमण बढ़ाने के निर्देश देते हुए कहा कि खुले में घूमता कोई निराश्रित गोवंश मिलने पर उसे तत्काल निकटतम गो आश्रय स्थल में संरक्षित कराया जाए। पशुपालकों को भी अपने गोवंशों को बेसहारा न छोड़ने के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए गए। जानबूझकर गोवंश छोड़ने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा गया।
रजिस्टर में दर्ज करनी होगी निरीक्षण की स्थिति
डीएम ने गौशालाओं में अभिलेखों और रजिस्टरों के व्यवस्थित रखरखाव पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक निरीक्षण अधिकारी निरीक्षण के दौरान अपनी टिप्पणियां रजिस्टर में अनिवार्य रूप से दर्ज करें और सामने आई कमियों का निर्धारित समय में निस्तारण कराएं।
जिलाधिकारी ने कहा कि निराश्रित गोवंशों के संरक्षण और गो आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं की समीक्षा शासन स्तर पर लगातार की जा रही है। ऐसे में सभी अधिकारी इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने चेतावनी दी कि गोवंश संरक्षण कार्यों में उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी पूजा साहू, जिला विकास अधिकारी वीरभानु सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी मनोज त्यागी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. जी.के. शुक्ला, सभी खंड विकास अधिकारी, पशु चिकित्सा अधिकारी और संबंधित नोडल अधिकारी मौजूद रहे।