कलयुग में केवल नाम संकीर्तन ही मुक्ति का आधार : राधेश्याम महाराज

मड़ियाहूं के बदौवां में श्रीमद्भागवत कथा का दूसरा दिन, भक्ति रस में डूबे श्रद्धालु

जौनपुर/मड़ियाहूं। विकासखंड मड़ियाहूं की ग्राम पंचायत बदौवां में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन रविवार को कथा स्थल भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। ढोल-मजीरों और भजनों की गूंज के बीच कथा पंडाल में श्रद्धालुओं ने राधे-राधे के जयकारे लगाए।
वृंदावन से पधारे कथा वाचक पंडित राधेश्याम महाराज पराशर ने दूसरे दिन श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का सरल और भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने दुर्योधन वध, राजा परीक्षित के जन्म के अलौकिक प्रसंग और कलयुग के आगमन की कथा का विस्तार से वर्णन किया।
राधेश्याम महाराज ने कहा कि भागवत केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। राजा परीक्षित के जन्म के प्रसंग की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है, तब भगवान किसी न किसी रूप में भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। कलयुग के प्रसंग पर उन्होंने कहा कि कलयुग में केवल नाम संकीर्तन ही मुक्ति का आधार है। भगवान के नाम का स्मरण और संकीर्तन मनुष्य को आध्यात्मिक शांति और सद्मार्ग की ओर ले जाता है।
कथा के बीच प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते और नृत्य करते नजर आए। भक्ति, ज्ञान और संस्कार से जुड़े प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। कथा पंडाल में देर शाम तक बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे मौजूद रहे।
सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में सभाराज मिश्र और उर्मिला मिश्रा मुख्य यजमान की भूमिका निभा रहे हैं। यजमान परिवार की ओर से कथा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद और जलपान की व्यवस्था की गई है। बदौवां के साथ आसपास के गांवों और पूरे क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं।