Central Vista परियोजना में Central Secretariat Library के लिए जगह को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है। लाइब्रेरी में 8.5 लाख से ज्यादा किताबें हैं।

नई दिल्ली की 135 साल पुरानी Central Secretariat Library को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण संज्ञान लिया है। अदालत ने केंद्र सरकार से यह बताने को कहा है कि Central Vista योजना के तहत इस ऐतिहासिक लाइब्रेरी के लिए कितनी जगह निर्धारित की गई है। अदालत ने केंद्र से इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Central Secretariat Library में लगभग 8.5 लाख किताबें मौजूद हैं। इनमें दुर्लभ पुस्तकें, सरकारी रिकॉर्ड और गजटियर भी शामिल हैं। वर्तमान लाइब्रेरी लगभग 5,500 वर्ग मीटर क्षेत्र में चार मंजिलों पर फैली हुई बताई गई है।
दो कमरों की जगह को लेकर उठा सवाल
इस मामले की पृष्ठभूमि में सामने आया कि Central Vista योजना के तहत लाइब्रेरी के लिए प्रस्तावित जगह मौजूदा जरूरतों की तुलना में बेहद सीमित हो सकती है। रिपोर्टों के मुताबिक Ministry of Housing and Urban Affairs ने Kartavya Bhawan-2 परिसर में लाइब्रेरी (Central Secretariat Library ) के लिए दो कमरों की जगह आवंटित की थी। इसी को लेकर सवाल उठा कि इतनी बड़ी ऐतिहासिक लाइब्रेरी की किताबों और रिकॉर्ड को इतनी सीमित जगह में कैसे रखा जाएगा।
हजारों नहीं, लाखों किताबों का सवाल
Central Secretariat Library कोई सामान्य लाइब्रेरी नहीं है। यहां मौजूद संग्रह में ऐतिहासिक दस्तावेज, सरकारी प्रकाशन और दुर्लभ सामग्री शामिल है। ऐसे में इसके स्थानांतरण का सवाल सिर्फ इमारत बदलने तक सीमित नहीं है। असली चिंता इस बड़े संग्रह के सुरक्षित संरक्षण, उपयोग और भविष्य की व्यवस्था को लेकर है।
रिपोर्ट के अनुसार लगभग दो लाख किताबें पहले से ही दिल्ली के आरके पुरम में कार्टन में पैक पड़ी हैं और लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो पा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में इस स्थिति पर भी चिंता सामने आई।
केंद्र से मांगा गया विस्तृत जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से लाइब्रेरी के लिए निर्धारित क्षेत्र और प्रस्तावित व्यवस्था को स्पष्ट करने को कहा है। अदालत इस मामले में यह समझना चाहती है कि Central Vista redevelopment के दौरान इस ऐतिहासिक पुस्तक संग्रह के लिए पर्याप्त और उपयुक्त स्थान की व्यवस्था (Central Secretariat Library ) कैसे की जा रही है।
मामला अब केवल लाइब्रेरी की जमीन का नहीं रह गया है। यह सवाल सार्वजनिक विरासत, सरकारी दस्तावेजों के संरक्षण और ज्ञान के विशाल संग्रह को सुरक्षित रखने से भी जुड़ गया है।
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