दिल्ली प्रदूषण: गिफ्ट कल्चर, टोल जाम और ग्रीन पटाखों पर SC की चिंता

प्रदूषण का स्तर GRAP के तीसरे चरण के आसपास, 9 टोल प्लाजा पर MLFF मशीनें लगाई गई

दिल्ली वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट और इंडिया गेट की तस्वीर
दिल्ली वायु प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गिफ्ट कल्चर और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर चिंता जताई।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण और खराब होती हवा की गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कई अहम मुद्दे उठाए। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने दिवाली पर महंगे उपहार देने की परंपरा को सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे वाहनों की आवाजाही बढ़ती है और प्रदूषण में इजाफा होता है।

अदालत ने साफ किया कि दिल्ली वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए केवल पाबंदियां पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि लोगों के व्यवहार और सामाजिक सोच में बदलाव भी जरूरी है।

दिवाली गिफ्ट कल्चर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

दिल्ली वायु प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर एक-दूसरे को महंगे उपहार देने की परंपरा पर चिंता जताई। CJI सूर्यकांत ने कहा कि अमीर लोगों ने दिवाली पर गिफ्ट देने को सामाजिक प्रतिष्ठा और स्टेटस सिंबल बना दिया है। इसके चलते उपहारों के लेन-देन के लिए वाहनों की आवाजाही बढ़ती है, जिसका असर प्रदूषण पर पड़ता है।

सुनवाई के दौरान एक वकील ने सुझाव दिया कि शायद दिवाली पर गिफ्ट देने की परंपरा बंद करने की जरूरत है। इस पर CJI ने इसे जरूरी सांस्कृतिक बदलाव से जोड़ते हुए कहा कि लोगों को समझना होगा कि हमारी असली संस्कृति क्या है और हमें क्या करना चाहिए।

वहीं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने त्योहारों के बढ़ते व्यावसायीकरण पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि त्योहारों को सामान की तरह बेचना भी समस्या का हिस्सा है।

गरीबों की कमाई और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों में अंतर

सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने अदालत को बताया कि प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर गरीब तबके पर पड़ता है। इस पर CJI सूर्यकांत ने दिवाली के दौरान गरीबों की आजीविका का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि दिवाली का समय गरीब लोगों के लिए कमाई का अवसर भी होता है। इस दौरान वे दीये और सजावट का सामान बेचने के लिए दुकानें और स्टॉल लगाते हैं। CJI ने कहा कि ये लोग प्रदूषण नहीं फैलाते, बल्कि प्रदूषण उन लोगों की गतिविधियों से बढ़ता है जो गिफ्ट देने की परंपरा को सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ते हैं और इसके लिए वाहनों का इस्तेमाल करते हैं।

अदालत की इस टिप्पणी में त्योहारों के दौरान होने वाली आर्थिक गतिविधियों और प्रदूषण बढ़ाने वाली गतिविधियों के बीच अंतर को भी रेखांकित किया गया।

बच्चों के फेफड़ों पर प्रदूषण के असर को लेकर चिंता

दिल्ली वायु प्रदूषण की गंभीरता पर चर्चा के दौरान एमिकस क्यूरी ने बताया कि राजधानी में प्रदूषण का स्तर GRAP के तीसरे चरण के आसपास बना हुआ है। कई स्थानों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) गंभीर या उससे भी खराब श्रेणी में है।

उन्होंने अदालत को बताया कि पूरे शहर का औसत AQI निकालने से अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण की वास्तविक गंभीरता कम दिखाई दे सकती है। बच्चों के फेफड़ों पर प्रदूषण के प्रभाव का मुद्दा भी सुनवाई में उठा।

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने बच्चों के फेफड़ों की संवेदनशीलता को लेकर चिंता जताई। अदालत में इस बात पर भी चर्चा हुई कि खराब हवा का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर किस तरह पड़ सकता है।

BS4 और BS6 वाहनों के नियमों पर केंद्र से मांगी जानकारी

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से दिल्ली में वाहनों के उत्सर्जन मानकों और BS6 नियमों के पालन की निगरानी को लेकर सवाल किए।

केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने बताया कि दिल्ली में BS4 तक के नंबर प्लेट वाले वाहनों को अनुमति है। इस पर जस्टिस बागची ने विशेष रूप से बड़ी गाड़ियों के BS4 और BS6 मानकों के पालन को लेकर जानकारी मांगी।

वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर चर्चा करते हुए CJI सूर्यकांत ने दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम की सड़कों पर भारी ट्रैफिक का जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि जब सार्वजनिक परिवहन की कमी को वाहनों की बढ़ती संख्या की वजह बताया जाता है, तो इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

ASG ने जवाब में बताया कि सार्वजनिक परिवहन बढ़ाने और रिंग रोड के विस्तार पर काम किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इन उपायों का असर तत्काल दिखाई देने वाला नहीं है।

दिल्ली बॉर्डर पर टोल प्लाजा और जाम का मुद्दा भी उठा

सुनवाई के दौरान दिल्ली की सीमाओं पर टोल प्लाजा के कारण लगने वाले जाम का मुद्दा भी सामने आया। एमिकस क्यूरी ने कहा कि टोल प्लाजा पर वाहनों के रुकने और लंबे समय तक खड़े रहने से प्रदूषण बढ़ता है।

उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी और मार्च में टोल प्लाजा को शहर की सीमा से बाहर शिफ्ट करने का आदेश दिया था, लेकिन इसका पालन नहीं हुआ है।

इस पर MCD की ओर से बताया गया कि नौ टोल प्लाजा पर ऑटोमैटिक मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) मशीनें लगाई गई हैं। इनकी मदद से वाहनों को टोल भुगतान के लिए रुकने की जरूरत नहीं पड़ती।

हालांकि, एमिकस क्यूरी ने दिल्ली की सीमाओं पर मौजूद 126 टोल कलेक्शन सेंटर का मुद्दा उठाते हुए बताया कि समस्या अभी भी बनी हुई है।

ग्रीन पटाखों के नाम पर दूसरे पटाखों की बिक्री पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के दौरान पटाखों की बिक्री और नियमों के पालन पर भी चिंता जताई। CJI सूर्यकांत ने कहा कि ग्रीन पटाखों की अनुमति दिए जाने के बावजूद दुकानों पर उनके नाम पर दूसरे पटाखे बेचे जा रहे हैं।

अदालत ने इस पर नियमों का सख्ती से पालन कराने की जरूरत बताई। साथ ही कहा कि दिवाली का उत्सव प्रदूषण के प्रति जागरूकता के साथ मनाया जाना चाहिए।

कोर्ट ने स्थानीय पार्षदों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) से भी लोगों के बीच जागरूकता फैलाने और प्रदूषण कम करने के लिए अपील करने की बात कही।

केंद्र सरकार की ओर से ASG ने सुनवाई में कहा कि हर मानवीय गतिविधि से प्रदूषण होता है। उन्होंने दिल्ली में देशभर से लोगों और प्रतिभाओं के आने, त्योहारों के मौसम और पराली जलाने को भी प्रदूषण बढ़ने के कारणों में शामिल किया।

उन्होंने बताया कि सरकार ने लिंक रोड और पेरिफेरल रोड बनाए हैं। थर्मल पावर प्लांट को साफ ईंधन पर स्थानांतरित किया जा रहा है। साथ ही NCR में उद्योगों के थर्मल पावर के बजाय गैस या बिजली के इस्तेमाल की जानकारी दी।

छुट्टियों के बाद फिर होगी सुनवाई, वाहनों के प्रदूषण पर अलग से विचार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मामले से संबंधित सभी हलफनामों और रिपोर्टों को देखने के बाद आगे के निर्देश जारी करेगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर वाहनों से होने वाले प्रदूषण के मुद्दे पर अलग से विचार किया जा सकता है।

दिल्ली वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट और इंडिया गेट की तस्वीर
दिल्ली वायु प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गिफ्ट कल्चर और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर चिंता जताई।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले को छुट्टियों के बाद तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

दिल्ली वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में यह स्पष्ट हुआ कि समस्या केवल पटाखों तक सीमित नहीं है। वाहनों की बढ़ती संख्या, टोल प्लाजा पर जाम, सार्वजनिक परिवहन की कमी और त्योहारों के दौरान होने वाली गतिविधियां भी चर्चा के केंद्र में रहीं। अदालत के मुताबिक, प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सरकारी प्रयासों के साथ नागरिकों की भागीदारी और सामाजिक व्यवहार में बदलाव भी जरूरी है। (Expose India)

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