
मथुरा। 39 करोड़ की परफॉर्मेंस ग्रांट वाली गोवर्धन क्षेत्र की अडींग पंचायत के सचिव मनीष भंडारी को आगरा विजिलेंस टीम ने शुक्रवार सायं गिरफ्तार कर लिया। मोटी ग्रांट वाली पंचायत का कार्यकाल खत्म होने के बाद हुई इस कार्यवाही ने पंचायत में करोड़ों की कमीशनखोरी को उजागर कर दिया है। अनियमितताओं की लोकायुक्त स्तर से हो चुकी जांच में भी जिला और मण्डल स्तरीय अधिकारियों पर लीपापोती के आरोप हैं। इनकी शिकायत फिर लोकायुक्त को की गई है। अब घोटालेबाजी के प्रमाण विजिलेंस टीम को भी उपलब्ध करायें जाएंगे।
सचिव मनीष भंडारी को पंचायत के एक ठेकेदार के बकाया बिलों का भुगतान करने के एवज में एक लाख रुपए रिश्वत लेते हुए विजिलेंस टीम द्वारा गिरफ्तार होने से पंचायत में घपलों की शिकायतों को बल मिल गया है। शिकायत कर्ताओं का आरोप है कि घपले पंचायत राज विभाग के आला अफसरों के संरक्षण में कराए जा रहे हैं। इस सब के पीछे अवैध वसूली ही एकमात्र कारण है। लोकायुक्त परिवादी अजीत सैनी का आरोप है कि पांच वर्ष पूर्व
पंचायत के कुछ जिम्मेदार लोगों की जमीन-जायदाद गिरवी रखी थीं अब वह करोड़ों की सम्फपत्तयों के मालिक हैं। यह अलग बात है कि सम्पत्तियां परिचित और रिश्तेदारों के नाम पर बनाई हैं। विजिलेंस जांच में उन रिश्तेदारों के पास आए धन का भी हिसाब किताब लेने की तैयारी है। बेनामी सम्पत्तियों का रिकार्ड इकट्ठा किया जा रहा है।
सचिव द्वारा ठेकेदार से 30 फीसदी कमीशन मांगा गया था। सूत्रों की मानें तो पंचायतों में 40 फीसदी तक कमीशनखोरी चल रही है और इसमें कयी लोगों की हिस्सेदारी होती है। इस आंकड़े को सही मान लिया जाए तो 39 करोड़ के कामों में 12-15 करोड़ की कमीशनखोरी हो चुकी है। यही वजह है कि स्पष्ट अनियमितताओं के बाद भी कोई कार्रवाई आज तलक डीपीआरओ द्वारा नहीं की गई।
घपले एक नजर में —
-मुख्य श्मशान में एक शैडो बनाया, चंदे से बने शैडो के पंचायत ने 4 लाख निकाले
-जी आई सी श्मशान एक वर्ष पूर्व निकाला 10 लाख शिकायत के बाद कराया काम
-डंपिंग यार्ड की टीन उड़ी,गेट टूटा आज तक एक टोकरी कूडा़ नहीं डाला
-एस टी पी लाखों बर्बाद कोई पूछने वाला नहीं
-दो आर ओ एटीएम, कैफिटेरिया, स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स, रतन पार्क पड़े बेकार
-पी पी टी मोड़ में किसी ऐसेट्स को खुली बोली से उड़ाने का प्रयास नहीं
-8 करोड़ के मण्डी स्थल की दुकानों को कोई लेने वाला नहीं, बर्बादी
-पंचायत का बोर्ड भंग, 12 सदस्यों ने पद छोड़ा फिर भी प्रधान को बनाया प्रशासक
-प्रधान को प्रशासक बना कार्यकाल खत्म होने के बाद डीपीआरओ ने निकलवाया एक करोड़