अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव बढ़ा: तालिबान के हवाई हमले का दावा, पाकिस्तान ने गिराए 4 ड्रोन

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। तालिबान सरकार ने पाकिस्तान में ISIS ठिकानों पर हवाई हमलों का दावा किया है, जबकि पाकिस्तान ने चार ड्रोन मार गिराने की बात कही है।

अफगानिस्तान और पाकिस्तान सीमा पर बढ़ता सैन्य तनाव
तालिबान के कथित हवाई हमलों और पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई के बाद सीमा पर तनाव बढ़ गया है।

नई दिल्ली/अमर भारती। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गंभीर होता नजर आ रहा है। हाल के घटनाक्रम ने दोनों देशों के रिश्तों में नई तल्खी पैदा कर दी है। तालिबान सरकार ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाते हुए कार्रवाई की है। वहीं पाकिस्तान ने कहा है कि उसकी सेना ने अफगानिस्तान की ओर से आए चार ड्रोन मार गिराए हैं।

तालिबान का दावा- आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई

अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह अभियान उन ठिकानों के खिलाफ चलाया गया जहां से कथित तौर पर अफगानिस्तान में आतंकी गतिविधियों की योजना बनाई जा रही थी। तालिबान प्रशासन का कहना है कि निशाना बनाए गए ठिकाने इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISIS-K) से जुड़े थे। अफगान अधिकारियों का दावा है कि कार्रवाई पूरी तरह सटीक थी और इसमें आतंकियों को भारी नुकसान पहुंचा है। साथ ही यह भी कहा गया कि आम नागरिकों को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंची। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

पाकिस्तान ने जताया कड़ा विरोध

दूसरी ओर पाकिस्तान ने इस कार्रवाई को गंभीर मामला बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तानी सेना का कहना है कि उसने सीमा पार से आए चार ड्रोन को नष्ट कर दिया है। इसके साथ ही पाकिस्तान ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में ऐसी कोई कार्रवाई दोहराई गई तो उसका जवाब और अधिक सख्ती से दिया जाएगा। पाकिस्तान लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल विभिन्न आतंकी संगठन उसके खिलाफ कर रहे हैं। वहीं तालिबान सरकार इन आरोपों को लगातार खारिज करती रही है।

हालिया घटनाओं ने बढ़ाया टकराव

दोनों देशों के बीच तनाव उस समय और बढ़ गया जब हाल ही में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतर हवाई हमले किए थे। अफगानिस्तान का दावा है कि उन हमलों में कई नागरिकों की जान गई थी। तालिबान प्रशासन ने पाकिस्तान पर नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाने का आरोप लगाया था, जबकि पाकिस्तान का कहना था कि उसकी कार्रवाई आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ थी। इसी घटनाक्रम के बाद अब तालिबान की जवाबी कार्रवाई के दावे ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है।

लगातार बढ़ रहा है अविश्वास

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के संबंध पिछले कुछ वर्षों से उतार-चढ़ाव से गुजर रहे हैं। सीमा सुरक्षा, आतंकवाद और सीमा पार गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच अक्सर तनाव बना रहता है। कई बार संघर्ष विराम और बातचीत के प्रयास हुए, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। फरवरी, जून और अब जुलाई में सामने आई घटनाएं दिखाती हैं कि दोनों देशों के बीच भरोसे का संकट लगातार गहराता जा रहा है।

क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडरा रहा खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला जारी रहा तो इसका असर पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र पर पड़ सकता है। सीमा पर बढ़ती गतिविधियां न केवल सुरक्षा चुनौतियां बढ़ा रही हैं बल्कि क्षेत्रीय शांति और आर्थिक स्थिरता के लिए भी खतरा पैदा कर रही हैं।

आगे क्या?

फिलहाल दोनों देशों की ओर से कड़े बयान सामने आ रहे हैं, जिससे हालात सामान्य होते नहीं दिख रहे। आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि तनाव कम करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह विवाद और बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है। अभी दुनिया की नजर अफगानिस्तान और पाकिस्तान की अगली रणनीति पर टिकी हुई है, क्योंकि सीमा पर बढ़ता तनाव पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन चुका है।

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