
लखनऊ। दुनिया भर में बढ़ते ड्रोन-आधारित युद्ध और संघर्षों के बीच जेन टेक्नोलॉजीस ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित नार्थ टेक सिम्पोजियम 2026 के मंच से भारत का पहला मॉड्यूलर, एआई-पावर्ड काउंटर-ड्रोन सिस्टम लॉन्च किया। पूरी तरह स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और विकसित यह प्रणाली, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और संप्रभु बौद्धिक संपदा के निर्माण की दिशा में एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है।
हाल के वैश्विक संघर्षों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कम लागत वाले एफपीवी ड्रोन और समन्वित झुंड हमले आधुनिक युद्ध में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। ये ड्रोन पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियों को चकमा देने में सक्षम हैं, जिससे नई पीढ़ी के एंटी-ड्रोन समाधानों की आवश्यकता तेजी से बढ़ी है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए जेन टेक्नोलॉजीस का यह एआई-संचालित प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है, जो तेजी से बदलते खतरे के परिदृश्य का प्रभावी मुकाबला कर सकता है।
उन्नत तकनीकी विशेषताएं जो बनाती हैं इसे खास
यह नया काउंटर-ड्रोन सिस्टम कई अत्याधुनिक क्षमताओं से लैस है। इसमें 70 एमएचजेड से 12 जीएचजेड तक की फ्रीक्वेंसी कवरेज दी गई है, जिससे विभिन्न ड्रोन संचार चैनलों की पहचान और उन्हें बाधित करना संभव होता है। सिस्टम 15 किलोमीटर से अधिक दूरी तक ड्रोन का पता लगा सकता है और एक साथ 100 से अधिक ड्रोन को ट्रैक करने की क्षमता रखता है, जो झुंड हमलों से निपटने में महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा, इसमें बहु-स्तरीय निष्प्रभावीकरण तंत्र शामिल है, जिसमें RF जैमिंग, GNSS जैमिंग/स्पूफिंग, RCWS (12.7/7.62 mm) एकीकरण, वायु रक्षा बंदूकें और कामिकेज़ इंटरसेप्टर शामिल हैं। सिस्टम में 20 किलोमीटर तक की रेंज वाला उच्च-संवेदनशीलता वाला स्वदेशी रडार भी लगाया गया है, जो छोटे और कम रडार क्रॉस सेक्शन वाले ड्रोन का समय रहते पता लगाने में सक्षम है।
डेटा फ्यूजन सेंटर: सिस्टम का ‘ब्रेन’
इस प्लेटफॉर्म के केंद्र में एक उन्नत ‘डेटा फ्यूजन और कमांड सेंटर’ मौजूद है, जो विभिन्न सेंसरों से प्राप्त इनपुट को एकीकृत कर AI आधारित एल्गोरिदम के जरिए खतरे की सटीक पहचान, ट्रैकिंग और प्रतिक्रिया सुनिश्चित करता है। यह प्रणाली युद्ध के मैदान में तेज़ और सटीक निर्णय लेने में मदद करती है।
‘ड्रोन को बेअसर करना ही असली बढ़त’
लॉन्च के मौके पर कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अशोक अट्लूरी ने कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और ड्रोन इसमें केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जहां दुनिया ड्रोन बनाने पर ध्यान दे रही है, वहीं असली बढ़त उन देशों को मिलेगी जो इन ड्रोन को प्रभावी तरीके से निष्क्रिय कर सकें। उन्होंने यह भी बताया कि यह सिस्टम आईडीडीएम फ्रेमवर्क के तहत पूरी बौद्धिक संपदा स्वामित्व के साथ विकसित किया गया है।
मल्टी-कॉन्फ़िगरेशन तैनाती: हर स्थिति के लिए तैयार
इस एंटी-ड्रोन प्लेटफॉर्म को विभिन्न ऑपरेशनल जरूरतों के अनुसार तीन अलग-अलग कॉन्फ़िगरेशन में तैनात किया जा सकता है। वाहन-माउंटेड कॉन्फ़िगरेशन के जरिए इसे मोबाइल प्लेटफॉर्म पर लगाकर काफिलों की सुरक्षा और चलते-फिरते ऑपरेशन संभव हैं। मैन-पोर्टेबल संस्करण हल्का और सैनिकों के लिए उपयुक्त है, जो गश्त और उग्रवाद-रोधी अभियानों में उपयोगी साबित होता है। वहीं, स्थिर कॉन्फ़िगरेशन को सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की 24/7 सुरक्षा के लिए तैनात किया जा सकता है।
आत्मनिर्भर रक्षा की दिशा में बड़ा कदम
यह लॉन्च न केवल भारत की तकनीकी क्षमता को दर्शाता है, बल्कि आयात पर निर्भरता कम करने और स्वदेशी रक्षा समाधान विकसित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की प्रणालियां भविष्य के युद्धों में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं और भारतीय सेनाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएंगी।