दिल्ली में घरेलू हिंसा के मामलों में तवा, डंबल, बैटरी और हथौड़े जैसी घरेलू वस्तुओं का इस्तेमाल बढ़ा। जानिए विशेषज्ञ इस ट्रेंड को लेकर क्या कहते हैं।

नई दिल्ली/अमर भारती। दिल्ली घरेलू हिंसा के हालिया मामलों ने एक चिंताजनक प्रवृत्ति की ओर ध्यान खींचा है। जिन घरेलू सामानों का इस्तेमाल रोजमर्रा के कामों के लिए किया जाता है, वही अब कुछ मामलों में हिंसक वारदातों का माध्यम बनते दिखाई दे रहे हैं। तवा, डंबल, स्टोरेज बैटरी, हथौड़ा और कैंची जैसी वस्तुओं का कथित तौर पर हत्या जैसे गंभीर अपराधों में इस्तेमाल होने की घटनाओं ने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक संबंधों पर भी सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश मामलों में यह घटनाएं पहले से योजनाबद्ध नहीं होतीं, बल्कि अचानक आए गुस्से और भावनाओं पर नियंत्रण खो देने का परिणाम होती हैं।
एक सप्ताह में सामने आए दो सनसनीखेज मामले
हाल के दिनों में दिल्ली में दो ऐसे मामले सामने आए, जिन्होंने लोगों को झकझोर दिया। पहला मामला बाहरी दिल्ली के तिलंगपुर कोटला का है, जहां एक युवक पर पत्नी के अवैध संबंधों के शक में कथित तौर पर स्टोरेज बैटरी से हमला कर हत्या करने का आरोप है। घटना के बाद उसने कथित रूप से जहरीली गोलियां खा लीं। अपनी तीन वर्षीय बेटी को रिश्तेदार के पास छोड़ने और अपराध स्वीकार करने के कुछ समय बाद उसकी भी मौत हो गई।
दूसरी घटना दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ की है। यहां एक व्यक्ति पर घरेलू विवाद के दौरान तवे से हमला कर पत्नी की हत्या करने का आरोप है। आरोपी स्वयं थाने पहुंचा और पुलिस के सामने अपराध स्वीकार करने का दावा किया। उसने यह भी कहा कि वह सिजोफ्रेनिया से पीड़ित है। इस दावे की पुष्टि जांच और चिकित्सकीय रिकॉर्ड के आधार पर होगी।
हथौड़ा, डंबल और कैंची भी बने हिंसा का माध्यम
दिल्ली में इससे पहले भी कई मामलों में घरेलू सामान के कथित इस्तेमाल की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
- उत्तर-पूर्वी दिल्ली के गौतमपुरी में एक व्यक्ति पर हथौड़े से पत्नी की हत्या का आरोप लगा।
- इसी वर्ष दिल्ली पुलिस की स्वाट कमांडो काजल चौधरी की कथित तौर पर डंबल से हमला किए जाने के बाद मौत हुई।
- पिछले वर्ष बेटे के जन्मदिन के उपहार को लेकर हुए विवाद के बाद एक व्यक्ति पर पत्नी और सास की कैंची से हत्या करने का आरोप लगा था।
इन घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि घरेलू विवादों के दौरान आसपास मौजूद वस्तुएं भी जानलेवा हथियार बन सकती हैं।
विशेषज्ञ क्यों मान रहे हैं इसे खतरनाक संकेत?
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, इन मामलों में प्रयुक्त वस्तुएं यह दर्शाती हैं कि अधिकांश घटनाएं पूर्व नियोजित नहीं होतीं। जब व्यक्ति अत्यधिक गुस्से या तनाव की स्थिति में होता है, तब वह सामने मौजूद किसी भी वस्तु का इस्तेमाल हिंसा के लिए कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अपराध के बाद कई आरोपी पछतावा भी जताते हैं और स्वयं पुलिस के सामने आत्मसमर्पण या अपराध स्वीकार कर लेते हैं। हालांकि, हर मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं और जांच के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाता है।
घरेलू हिंसा से पहले दिखते हैं कई चेतावनी संकेत
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि गंभीर हिंसा से पहले अक्सर कई संकेत दिखाई देते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
इनमें शामिल हैं-
- बार-बार झगड़ा होना
- गाली-गलौज और अपमानजनक व्यवहार
- साथी को नियंत्रित करने की कोशिश
- धमकी देना
- शारीरिक हिंसा
- अत्यधिक शक या असुरक्षा की भावना
यदि इन संकेतों को समय रहते पहचाना जाए तो कई गंभीर घटनाओं को रोका जा सकता है।
हर वर्ग में बढ़ रही चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू हिंसा अब केवल आर्थिक या सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों तक सीमित नहीं रही। महानगरों में पढ़े-लिखे, नौकरीपेशा और पेशेवर परिवारों में भी ऐसे मामलों की संख्या बढ़ती दिखाई दे रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि मानसिक तनाव, रिश्तों में संवाद की कमी और भावनात्मक असंतुलन किसी भी सामाजिक वर्ग को प्रभावित कर सकते हैं।
समय रहते मदद लेना क्यों जरूरी है?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि किसी परिवार में लगातार तनाव, हिंसा या डर का माहौल हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ऐसी स्थिति में-
- परिवार या भरोसेमंद मित्रों से बात करें।
- आवश्यकता होने पर मनोवैज्ञानिक या काउंसलर की मदद लें।
- यदि जान का खतरा महसूस हो तो तुरंत पुलिस या संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें।
- घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराने में देर न करें।
समय पर उठाया गया कदम किसी भी गंभीर अपराध को रोक सकता है।
दिल्ली घरेलू हिंसा के हालिया मामलों ने यह स्पष्ट किया है कि घरेलू विवाद यदि समय रहते नहीं सुलझाए जाएं तो वे भयावह रूप ले सकते हैं। रोजमर्रा के घरेलू सामान का कथित रूप से हिंसा में इस्तेमाल इस बात का संकेत है कि अचानक आया गुस्सा कितना घातक हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि संवाद, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और समय पर कानूनी हस्तक्षेप ऐसे मामलों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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