हरियाणा के 5 जिले NCR से हो सकते हैं बाहर, 16 जून की बैठक में होगा बड़ा फैसला, पढ़िए पूरी स्टोरी?

करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी को NCR से बाहर करने के प्रस्ताव पर होगी चर्चा, सरकार का दावा- विकास को मिलेगा नया रास्ता।

हरियाणा के पांच जिलों को NCR से बाहर करने के प्रस्ताव पर चर्चा
16 जून को NCR प्लानिंग बोर्ड की बैठक में हरियाणा के पांच जिलों को NCR से बाहर करने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी।

नई दिल्ली/अमर भारती। हरियाणा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की सीमाओं को लेकर बड़ा बदलाव हो सकता है। राज्य सरकार के प्रस्ताव पर मुहर लगती है तो हरियाणा के पांच जिले जल्द ही NCR से बाहर हो सकते हैं। इस संबंध में 16 जून को होने वाली NCR प्लानिंग बोर्ड की बैठक में अहम चर्चा होने वाली है। वर्तमान में हरियाणा के 22 जिलों में से 14 जिले NCR का हिस्सा हैं। इनमें करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी को NCR से बाहर करने का प्रस्ताव रखा गया है। यह फैसला रीजनल प्लान-2041 के तहत NCR की सीमाओं के पुनर्निर्धारण से जुड़ा हुआ है।

आखिर क्या है NCR?

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी NCR का गठन दिल्ली पर बढ़ते जनसंख्या और बुनियादी ढांचे के दबाव को कम करने के उद्देश्य से किया गया था। 1985 में NCR प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) का गठन किया गया ताकि दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों का नियोजित विकास हो सके और रोजगार, उद्योग तथा शहरी सुविधाओं का विस्तार पड़ोसी जिलों तक पहुंचाया जा सके। फिलहाल दिल्ली के अलावा हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई जिले NCR क्षेत्र में शामिल हैं। हरियाणा के सबसे अधिक 14 जिले इस दायरे में आते हैं।

क्यों बाहर करना चाहती है सरकार?

हरियाणा सरकार का तर्क है कि NCR के कठोर पर्यावरणीय और औद्योगिक नियमों के कारण कई जिलों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। विशेष रूप से दिल्ली से दूर स्थित जिलों में औद्योगिक निवेश प्रभावित हो रहा है। सरकार का कहना है कि एनजीटी (NGT) और ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत लागू प्रतिबंधों के कारण उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ता है। इसके अलावा पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों पर लागू नियमों से किसानों, व्यापारियों और परिवहन क्षेत्र को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

नया फॉर्मूला क्या कहता है?

रीजनल प्लान-2041 के मसौदे में प्रस्ताव दिया गया है कि NCR की सीमा को दिल्ली के राजघाट से 100 किलोमीटर के दायरे तक सीमित किया जाए। यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो हरियाणा का NCR क्षेत्र काफी छोटा हो जाएगा। वर्तमान में हरियाणा का NCR क्षेत्र 25 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक है। नए प्रस्ताव के बाद यह घटकर करीब 10.5 हजार वर्ग किलोमीटर तक रह सकता है।

16 जून की बैठक पर टिकी नजरें

NCR प्लानिंग बोर्ड की बैठक में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि शामिल होंगे। जहां उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने आंशिक रूप से 100 किलोमीटर सीमा में आने वाली तहसीलों को NCR में बनाए रखने की पैरवी की है, वहीं हरियाणा केवल पूरी तरह सीमा के भीतर आने वाले क्षेत्रों को ही NCR में शामिल रखने की मांग कर रहा है। अब सभी की निगाहें 16 जून की बैठक पर टिकी हैं, क्योंकि इस फैसले का असर हरियाणा के विकास मॉडल, उद्योग, निवेश और शहरी योजनाओं पर पड़ सकता है।

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