ईरान में सत्ता संघर्ष की अटकलों के बीच राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने मुज्बता खामेनेई से बातचीत मुश्किल बताई। जानिए ईरान की राजनीति में बढ़ते तनाव की पूरी कहानी।

नई दिल्ली/अमर भारती। ईरान की सत्ता के भीतर कथित मतभेद की खबरों के बीच राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के एक बयान ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। पेजेशकियन ने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों में देश के सुप्रीम लीडर मुज्बता खामेनेई से सीधे बातचीत करना आसान नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मुज्बता खामेनेई की मौजूदगी सरकार और देश के लिए महत्वपूर्ण ताकत बनी हुई है। राष्ट्रपति के इस बयान के बाद ईरान की राजनीति में नेतृत्व, सत्ता संतुलन और फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए मुज्बता खामेनेई
मुज्बता खामेनेई लंबे समय से सार्वजनिक मंचों पर दिखाई नहीं दिए हैं। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़े तनाव के बीच उनके सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अब तक केवल लिखित संदेशों के माध्यम से अपनी बात रखी है। उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखने के कारण ईरानी नेतृत्व को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि मुज्बता खामेनेई के साथ उनकी बातचीत हमेशा सकारात्मक रही है। उन्होंने कहा कि वह शांत स्वभाव, समझदारी और तर्कपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले नेता हैं।
पेजेशकियन ने किया मुज्बता खामेनेई का बचाव
राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा कि मौजूदा हालात में कुछ लोग मुज्बता खामेनेई की छवि को लेकर गलत धारणाएं फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी अनुपस्थिति को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं, वे पूरी तरह सही नहीं हैं। पेजेशकियन के अनुसार, मुज्बता खामेनेई की भूमिका ईरान की जवाबी रणनीति और राजनीतिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने उनकी मौजूदगी को सरकार के लिए मनोबल बढ़ाने वाला बताया।
ईरान में सत्ता संतुलन को लेकर चर्चा तेज
ईरान की राजनीति में सुप्रीम लीडर का पद सबसे शक्तिशाली माना जाता है। ऐसे में नेतृत्व से जुड़े किसी भी बदलाव या आंतरिक मतभेद की खबरें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित करती हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि मुज्बता खामेनेई और राष्ट्रपति पेजेशकियन के बीच नीतिगत मुद्दों पर मतभेद हो सकते हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि युद्ध और सुरक्षा से जुड़े फैसलों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की भूमिका बढ़ी है। ईरान की राजनीति में IRGC लंबे समय से एक प्रभावशाली संगठन माना जाता है।
राष्ट्रपति पेजेशकियन पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति पेजेशकियन पहले भी सरकार की नीतियों और फैसलों को लेकर असहमति जता चुके हैं। कुछ मौकों पर उनके इस्तीफे की अटकलें भी सामने आई थीं। उनका कहना रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर राष्ट्रपति कार्यालय की भूमिका सीमित रही है। हालांकि, ईरानी सरकार की ओर से इन दावों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच ईरान की चुनौती
ईरान इस समय क्षेत्रीय तनाव, सुरक्षा चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहा है। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव ने ईरान की राजनीति को और जटिल बना दिया है। ऐसे समय में नेतृत्व के बीच तालमेल और फैसले लेने की प्रक्रिया पर दुनिया की नजर बनी हुई है। मुज्बता खामेनेई की सार्वजनिक अनुपस्थिति और राष्ट्रपति पेजेशकियन के बयान ने ईरान के राजनीतिक भविष्य को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व के बीच वास्तविक स्थिति क्या है, लेकिन इतना तय है कि क्षेत्रीय तनाव के बीच तेहरान की आंतरिक राजनीति आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बनी रहेगी।
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