240 सांसदों के साथ बैठक के प्रस्ताव पर चुनाव आयोग विचार कर रहा था

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एसआईआर को लेकर देशभर में घमासान जारी है। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च निकाला, वहीं पुलिस ने सभी को दफ्तर के बाहर आकाशवाणी भवन परिसर से हिरासत में ले लिया। चुनाव आयोग पर आरोप लगाए गए कि आयोग के अधिकारियों ने मुलाकात नहीं की, जबकि आयोग ने इस बात का खंडन किया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत विपक्षी दलों के करीब 300 लोकसभा और राज्यसभा सांसद चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचे थे।
सभी का आरोप था कि आयोग के किसी अधिकारी ने मुलाकात नहीं की, जबकि चुनाव आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने साफ किया है कि उसे किसी भी राजनीतिक दल के सदस्य से मिलने में कोई आपत्ति नहीं है। आयोग ने यह भी कहा कि मंगलवार शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत मुलाकात के लिए उनसे समय ही नहीं मांगा था। आयोग के मुताबिक, यदि कोई प्रतिनिधिमंडल निर्धारित प्रक्रिया के तहत आता है तो उन्हें किसी से मिलने में कोई आपत्ति नहीं है।
मुलाकात की मांग को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन
एसआईआर को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी नेताओं का प्रदर्शन लगातार जारी है। मंगलवार को प्रियंका गांधी और राहुल गांधी सहित तमाम विपक्षी दलों के नेताओं ने पुलिस को छकाया। यह सियासी ड्रामा देर रात तक चलता रहा। लीडर ऑफ अपोजिशन और प्रियंका गांधी आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वे चुनाव आयोग से मिलना चाहते थे, ताकि अपनी बात रख सकें।
विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग उनसे मिलने के लिए तैयार नहीं है। प्रदर्शनकारी नेताओं ने कहा कि जब तक आयोग की ओर से मुलाकात के लिए उन्हें वक्त नहीं दिया जाता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।
हालांकि, मंगलवार रात दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे नेताओं को हिरासत में ले लिया और उन्हें बस में बैठाकर आकाशवाणी भवन परिसर से हटा दिया।
चुनाव आयोग ने आरोपों पर दी सफाई
धरना प्रदर्शन और अपने ऊपर न मिलने के आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया कि आयोग को किसी से भी मिलने में आपत्ति नहीं है। इससे पहले भी प्रोटोकॉल के तहत राजनीतिक दल आयोग से मिलते रहे हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि आयोग के किसी भी अधिकारी से मिलने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया है और पहले भी राजनीतिक दल इसी प्रक्रिया का पालन करते हुए चुनाव आयोग से मुलाकात करते रहे हैं।

चुनाव आयोग ने कहा कि राजनीतिक दल अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से पहले मुलाकात के लिए समय मांग सकते हैं। आयोग ने यह भी कहा कि वह राजनीतिक दलों के सदस्यों से मिलने और उनके मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रतिनिधिमंडल आकर आयोग से मिल सकता है।
इसके साथ ही चुनाव आयोग ने न मिलने के आरोपों पर स्थिति को और स्पष्ट किया। आयोग ने कहा कि मंगलवार शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल की ओर से मुलाकात के लिए समय ही नहीं मांगा गया था। ऐसे में किसी बैठक का समय भी निर्धारित नहीं हुआ था।
2025 में बनाया गया था बैठक का निर्धारित प्रोटोकॉल
चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के साथ बैठक को लेकर वर्ष 2025 में निर्धारित प्रक्रिया और प्रोटोकॉल बनाए जाने की बात कही। इसके तहत किसी भी राजनीतिक दल या प्रतिनिधिमंडल को अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से पहले आयोग से मुलाकात के लिए समय मांगना होता है।
आयोग ने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल पहले की तरह उससे मुलाकात कर सकते हैं। आयोग के मुताबिक, राजनीतिक दलों के साथ बातचीत के लिए प्रक्रिया पहले से तय है और उसी के तहत मुलाकात की जा सकती है।
240 सांसदों के साथ बैठक के प्रस्ताव पर क्या कहा आयोग ने?
चुनाव आयोग के अनुसार, मंगलवार शाम दिल्ली पुलिस के माध्यम से उसे सूचना मिली थी कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलकर ज्ञापन सौंपना चाहता है। आयोग ने कहा कि वह इस अनुरोध पर विचार कर रहा था।
इसके बाद दिल्ली पुलिस ने आयोग को बताया कि राहुल गांधी आईएनडीआईए गठबंधन के करीब 240 सांसदों के साथ संसद भवन की एनेक्सी में बैठक करना चाहते हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक, इस तरह की बैठक उसके तय प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं थी। आयोग ने इस अनुरोध को नियमों के खिलाफ और असामान्य मानते हुए स्वीकार नहीं किया।
आयोग ने स्पष्ट किया कि तय प्रोटोकॉल के तहत राजनीतिक दलों या उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक आयोग के परिसर में ही हो सकती है।
ज्ञापन लेने के लिए आयोग ने दिया था असाधारण विकल्प
चुनाव आयोग ने कहा कि वह संसदीय और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के साथ-साथ अपने प्रोटोकॉल और स्थापित परंपराओं का पूरा सम्मान करता है। हालांकि, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आयोग ने एक असाधारण विकल्प भी सुझाया था।

इसके तहत सांसदों से ज्ञापन लेने के लिए आयोग के सबसे वरिष्ठ कार्यरत अधिकारी को संसद भवन की एनेक्सी में भेजने का प्रस्ताव दिया गया था। आयोग के मुताबिक, सांसद इस प्रस्ताव पर सहमत नहीं हुए।
आयोग ने एक बार फिर कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के सदस्यों से मिलने में उसे कोई आपत्ति नहीं है। राजनीतिक दल तय नियमों और प्रक्रिया के तहत किसी भी समय आयोग से मुलाकात का अनुरोध कर सकते हैं।
चुनाव आयोग की सफाई से क्या स्पष्ट हुआ?
चुनाव आयोग की ओर से जारी स्थिति के मुताबिक, आयोग राजनीतिक दलों से बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन मुलाकात निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही होगी। आयोग ने कहा कि अब तक किसी भी राजनीतिक दल ने निर्धारित समय की मांग नहीं की है, इसलिए फिलहाल किसी बैठक का समय तय नहीं किया गया है।
इस तरह विपक्ष की ओर से मुलाकात की मांग और आयोग की ओर से निर्धारित प्रोटोकॉल के बीच का विवाद फिलहाल प्रक्रिया को लेकर केंद्रित है। चुनाव आयोग ने साफ किया है कि राजनीतिक दल उसके सामने अपने मुद्दे रखने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत मुलाकात का अनुरोध कर सकते हैं।
आरोपों का आधार क्या है?
राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन और चुनाव आयोग से मुलाकात की मांग के बीच आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। चुनाव आयोग का कहना है कि उसे किसी भी राजनीतिक दल से मिलने में आपत्ति नहीं है, लेकिन बैठक निर्धारित प्रक्रिया और प्रोटोकॉल के तहत ही होगी।
आयोग ने यह भी कहा है कि वह राजनीतिक दलों के सदस्यों से मिलने और उनके मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। अब विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच मुलाकात को लेकर आगे क्या स्थिति बनती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। (Expose India)
यह भी पढ़ें
MSME के लिए ₹10,000 करोड़ का SME Growth Fund, PM मोदी के 25 साल के नेतृत्व पर कैबिनेट का प्रस्ताव
यूपी में सितंबर में ₹3,332 करोड़ बढ़ा राजस्व, जापान से ₹90 हजार करोड़ के निवेश MoU