JPSC परीक्षा रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक!

JPSC परीक्षा रद्द: हाईकोर्ट के फैसले से 2,000 अभ्यर्थियों को राहत

JPSC परीक्षा रद्द मामले में झारखंड हाईकोर्ट का फैसला
JPSC परीक्षा रद्द करने के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट ने रोक लगाई।

डिजिटल डेस्क, रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC परीक्षा रद्द करने से जुड़े राज्य सरकार के आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अदालत ने JPSC की 11वीं से 13वीं परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा से जुड़े मामलों में यह आदेश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

JPSC परीक्षा रद्द करने के फैसले पर कोर्ट का स्टे

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके तहत JPSC की 11वीं से 13वीं परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा से जुड़ी कार्रवाई की गई थी। अदालत के इस फैसले के बाद इन परीक्षाओं के सफल अभ्यर्थियों के लिए राहत की स्थिति बनी है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए 15 दिनों का समय दिया है। सरकार को काउंटर एफिडेविट के साथ संबंधित दस्तावेज और अपना जवाब अदालत के सामने पेश करना होगा।

इस आदेश के बाद दोनों परीक्षा मामलों में याचिकाकर्ताओं को तत्काल प्रभाव से काम पर वापस लिए जाने का रास्ता भी साफ हुआ है।

2,000 सफल अभ्यर्थियों की नौकरी पर था संकट

राज्य सरकार की ओर से भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले के बाद करीब 2,000 सफल अभ्यर्थियों में नाराजगी थी। इनमें खास तौर पर JSSC संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा यानी JSSC-CGL के जरिए सरकारी नौकरी हासिल करने वाले उम्मीदवार शामिल हैं।

सफल अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने मेहनत और योग्यता के आधार पर परीक्षा पास की थी। उनका तर्क है कि अगर परीक्षा में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार अभ्यर्थियों और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सभी सफल उम्मीदवारों को एक साथ इसका खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।

कई सफल अभ्यर्थियों ने इसी मुद्दे को लेकर झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया था।

याचिकाकर्ताओं ने प्राकृतिक न्याय का दिया हवाला

याचिकाकर्ता के वकील अमृतांशु वत्स के मुताबिक, अदालत ने इन परीक्षाओं को रद्द करने पर रोक लगा दी है और सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ हुआ है।

याचिका में मांग की गई है कि परीक्षा में कथित तौर पर गड़बड़ी करने वाले अभ्यर्थियों और निष्पक्ष तरीके से परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के बीच अंतर किया जाए। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि पूरी परीक्षा को रद्द करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है।

वकील ने यह भी कहा कि इस तरह का फैसला अचानक लिया जाना उचित नहीं है। मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक रोशन ने की।

सरकार को 15 दिन में दाखिल करना होगा जवाब

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब सरकार को अदालत के सामने अपना पक्ष और संबंधित दस्तावेज रखने होंगे।

मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को दोपहर 2:15 बजे होगी। वहीं, असफल अभ्यर्थियों की ओर से कुमार हर्ष ने इंटरवेंशन एप्लीकेशन यानी आईए दाखिल की है।

अदालत के इस आदेश के बाद JPSC परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर फिलहाल रोक लग गई है। हालांकि, मामले में अंतिम स्थिति आगे की सुनवाई और अदालत के आदेशों पर निर्भर करेगी।

22 भर्ती परीक्षाओं के रद्द होने से उठा था विवाद

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर 26 दिनों से चल रहा आंदोलन बुधवार को फिलहाल स्थगित हो गया था। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद 2014 से अब तक JPSC, JSSC और एक आउटसोर्स एजेंसी के जरिए आयोजित 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया गया था।

इसके अलावा 23 अन्य परीक्षाओं की जांच कराने का आदेश भी दिया गया है।

परीक्षाओं को रद्द किए जाने के फैसले के बाद सफल अभ्यर्थियों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि जिन लोगों ने निष्पक्ष तरीके से परीक्षा पास की है, उनकी नियुक्ति को किसी कथित गड़बड़ी के कारण खत्म नहीं किया जाना चाहिए।

सफल अभ्यर्थियों के लिए क्या बदला?

JPSC परीक्षा रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक के बाद सफल अभ्यर्थियों के लिए फिलहाल राहत की स्थिति बनी है। खासकर उन उम्मीदवारों को उम्मीद जगी है, जिन्होंने चयन के बाद सरकारी विभागों में काम शुरू कर दिया था।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि किसी परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच की जानी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन सभी सफल अभ्यर्थियों को एक ही नजर से देखना उचित नहीं है।

अदालत ने फिलहाल राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगाकर सरकार से जवाब मांगा है। अब अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष सामने आने के बाद मामले की दिशा और स्पष्ट होगी।

आगे की सुनवाई पर टिकी नजर

झारखंड हाईकोर्ट का यह आदेश JPSC परीक्षा रद्द किए जाने के विवाद में अहम पड़ाव है। फिलहाल सरकार को 15 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करना है और मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

सफल अभ्यर्थी अब अदालत की आगे की कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं, राज्य सरकार को अपने फैसले के समर्थन में अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा। (Expose India)

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