ग्राम रोजगार सेवकों का लखनऊ में शक्ति प्रदर्शन: विधानसभा कूच के दौरान पुलिस ने रोका, आंदोलन और भूख हड़ताल की चेतावनी

लखनऊ। अपनी लंबित मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश भर से आए ग्राम रोजगार सेवकों ने बुधवार को राजधानी लखनऊ में जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में रोजगार सेवक हजरतगंज स्थित दारुलशफा के सामने एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई। प्रदर्शन के बाद कर्मचारी विधानसभा घेराव के लिए आगे बढ़े, लेकिन पुलिस ने पहले से की गई बैरिकेडिंग के जरिए उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली।

प्रदर्शन के दौरान संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष राम लखन तिवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा 4 अक्टूबर 2021 को ग्राम रोजगार सेवकों के हित में की गई घोषणाएं आज तक धरातल पर लागू नहीं हो सकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार शासन स्तर पर अपनी मांगें रखने के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिससे प्रदेश भर के ग्राम रोजगार सेवकों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना था कि सरकार की लगातार उपेक्षा के कारण कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है।

क्या कहना है

संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष ने बताया कि वर्तमान में ग्राम रोजगार सेवकों को मात्र 7,788 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है, जो महंगाई के इस दौर में बेहद अपर्याप्त है। इतना ही नहीं, कई ग्राम रोजगार सेवकों को पिछले डेढ़ से दो वर्षों से मानदेय का भुगतान भी नहीं हुआ है। आर्थिक तंगी के चलते कर्मचारियों के सामने परिवार का भरण-पोषण करना कठिन हो गया है। राम लखन तिवारी ने दावा किया कि आर्थिक संकट और लगातार उपेक्षा के कारण कई ग्राम रोजगार सेवक आत्महत्या तक करने को मजबूर हुए हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन ने उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।

आंदोलन की दी चेतावनी

संगठन ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रमुख सचिव स्तर पर होने वाली वार्ता में उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो इको गार्डन में अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर भूख हड़ताल के साथ विधानसभा का घेराव भी किया जाएगा। संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि ग्राम रोजगार सेवकों ने हमेशा सरकार की योजनाओं को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जहां भी आवश्यकता पड़ी, उन्होंने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं, लेकिन इसके बावजूद सरकार द्वारा लगातार नजरअंदाज किया जाना बेहद दुखद और निराशाजनक है।