जंतर-मंतर पर CJP आंदोलन के दौरान भोजन और पानी की व्यवस्था संभालने वाले मोहम्मद जुनैद।

नई दिल्ली/अमर भारती। 36 दिनों तक जंतर-मंतर पर चले CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के छात्र आंदोलन के दौरान यदि कोई चेहरा हर दिन मंच के पीछे सबसे ज्यादा सक्रिय दिखाई देता था, तो वह था मोहम्मद जुनैद का। आंदोलन में शामिल छात्रों और नेताओं के लिए भोजन, पानी और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं में उनकी भूमिका लगातार चर्चा में रही। लेकिन आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि माने जा रहे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के समय वह वहां मौजूद नहीं थे।
जुनैद का दावा है कि आंदोलन के अंतिम चरण में उनके साथ ऐसी घटनाएं हुईं, जिनकी वजह से वह उस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा नहीं बन सके। उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित एजेंसियों की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
“आपको कुछ हो गया तो हमें खाना कौन खिलाएगा”
जुनैद बताते हैं कि आंदोलन की शुरुआत से ही वे प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था में जुट गए थे। उनके अनुसार, आंदोलन के प्रमुख अभिजीत दिपके अक्सर उनकी चिंता करते हुए कहते थे, “जुनैद भाई, आपको कुछ हो गया तो हमें खाना कौन खिलाएगा।” जुनैद का कहना है कि शुरुआती दिनों में वे आंदोलन स्थल पर लगभग हर समय मौजूद रहते थे। मंच की व्यवस्था से लेकर भोजन और पानी तक, हर जिम्मेदारी में उन्होंने सहयोग दिया।
25 जुलाई को आखिर क्या हुआ?
जुनैद के अनुसार, 24 जुलाई की रात उन्हें कुत्ते ने काट लिया था, जिसके बाद वे रैबीज का टीका लगवाने दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल पहुंचे। उनका दावा है कि अस्पताल से लौटते समय एक बिना नंबर प्लेट वाली सफेद स्कॉर्पियो उनके ऑटो के सामने आकर रुकी। उन्होंने आरोप लगाया कि खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताने वाले कुछ लोगों ने उन्हें और उनके साथी को अपने साथ ले लिया। जुनैद का कहना है कि उनकी आंखों पर पट्टी बांधकर उन्हें एक अज्ञात स्थान पर रखा गया, जहां अगले दिन उनसे आंदोलन की व्यवस्था और भोजन के इंतजाम को लेकर पूछताछ की गई।
“हमने कोई फंडिंग नहीं ली”
जुनैद का दावा है कि पूछताछ के दौरान उनसे यह पूछा गया कि आंदोलन के लिए भोजन और अन्य संसाधनों का इंतजाम कैसे किया जा रहा था। उनके अनुसार, उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आंदोलन में किसी तरह की नकद फंडिंग नहीं ली गई। लोगों ने अपनी इच्छा से पानी, बिस्कुट, नमकीन, दवाइयां और भोजन पहुंचाया। कई लोग अपने घर से बना खाना लेकर आते थे, जबकि गुरुद्वारों से लंगर और अन्य सामाजिक संगठनों की ओर से भी सहयोग मिलता था।
“शाम को देहरादून के पास छोड़ा गया”
जुनैद का दावा है कि पूछताछ के बाद उन्हें कई घंटे तक वाहन में घुमाया गया और बाद में उत्तराखंड के मसूरी-देहरादून क्षेत्र में छोड़ दिया गया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनके साथ किसी प्रकार की मारपीट नहीं हुई। उनके अनुसार, पूछताछ के दौरान उन्हें भोजन भी दिया गया और किसी पुलिसकर्मी ने उनके साथ शारीरिक दुर्व्यवहार नहीं किया।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
परिवार से पूछताछ का भी दावा
जुनैद ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान उनके पिता, भाई और अन्य परिजनों से भी पुलिस ने पूछताछ की। उन्होंने दावा किया कि उनके घर से कुछ दस्तावेज भी ले जाए गए। हालांकि इस संबंध में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
CJP आंदोलन से कैसे जुड़े?
जुनैद के अनुसार, वे पहले से CJP की गतिविधियों को देखते रहे थे। 6 जून को जब जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू हुआ तो वे वहां पहुंचे। उन्होंने देखा कि भीषण गर्मी में प्रदर्शनकारियों के लिए पानी और भोजन की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी। यहीं से उन्होंने स्वयंसेवक के रूप में जिम्मेदारी संभाली। धीरे-धीरे अन्य लोग भी जुड़ते गए और आंदोलन स्थल पर सामुदायिक सहयोग से भोजन की व्यवस्था होने लगी।
“कभी नकद दान नहीं लिया”
जुनैद का कहना है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कभी किसी से नकद या ऑनलाइन भुगतान स्वीकार नहीं किया। उनके अनुसार, जो भी मदद करना चाहता था, उससे वे भोजन, पानी, दवाइयां या अन्य आवश्यक सामग्री लाने का आग्रह करते थे। बाद में आंदोलन स्थल पर एक डोनेशन बॉक्स भी रखा गया, जिसमें लोग स्वेच्छा से योगदान करते थे।
आंदोलन खत्म, लेकिन अधूरा रह गया आखिरी मिलन
जुनैद का सबसे बड़ा अफसोस यही है कि जिस आंदोलन के लिए उन्होंने 35-36 दिन तक सेवा की, उसके समापन के समय वे अपने साथियों के बीच मौजूद नहीं थे। वे कहते हैं कि देशभर से आए कई आंदोलनकारी अब अपने-अपने राज्यों में लौट चुके हैं। कई लोगों से दोबारा मुलाकात भी शायद कभी नहीं हो पाएगी। उनके अनुसार, “काश आखिरी दिन सबसे गले मिल पाता, हाथ मिला पाता। यही जिंदगी भर का अफसोस रहेगा।”
कौन हैं मोहम्मद जुनैद?
मोहम्मद जुनैद उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मसूरी क्षेत्र के नाहल गांव के निवासी हैं। वे पेशे से वकील हैं और छात्र जीवन में छात्र राजनीति से जुड़े रहे हैं। उनके अनुसार, वे इससे पहले CAA विरोध प्रदर्शन, किसान आंदोलन, वक्फ संशोधन विधेयक के विरोध और फिलिस्तीन समर्थन प्रदर्शनों में भी भाग ले चुके हैं। हालिया CJP छात्र आंदोलन के दौरान वे भोजन और राहत व्यवस्था संभालने वाले प्रमुख स्वयंसेवकों में शामिल रहे।
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