महाराष्ट्र नसरापुर रेप-मर्डर केस: 55 दिन में आया फैसला, दोषी भीमराव कांबले को फांसी

महाराष्ट्र के नसरापुर में 4 साल की बच्ची के रेप और हत्या मामले में पुणे की स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने दोषी भीमराव कांबले को मौत की सजा सुनाई। जानिए पूरे मामले की टाइमलाइन और कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें।

नसरापुर रेप और हत्या मामले में दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा सुनाती पुणे फास्ट-ट्रैक कोर्ट
महाराष्ट्र के नसरापुर में 4 साल की बच्ची के रेप और हत्या मामले में दोषी भीमराव कांबले को विशेष अदालत ने मौत की सजा सुनाई।

नई दिल्ली/अमर भारती। महाराष्ट्र के पुणे जिले के नसरापुर में चार साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के जघन्य मामले में विशेष फास्ट-ट्रैक अदालत ने दोषी भीमराव कांबले को मौत की सजा सुनाई है। पॉक्सो एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत चले इस मुकदमे में अदालत ने अपराध को अत्यंत क्रूर और समाज को झकझोर देने वाला मानते हुए फांसी की सजा का आदेश दिया। यह मामला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि घटना के मात्र 55 दिनों के भीतर जांच, सुनवाई और सजा की पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली गई। इसे महाराष्ट्र के हाल के वर्षों में सबसे तेजी से निपटाए गए गंभीर आपराधिक मामलों में से एक माना जा रहा है।

क्या था पूरा मामला?

1 मई 2026 को नसरापुर गांव में अपनी दादी के घर के बाहर खेल रही चार वर्षीय बच्ची अचानक लापता हो गई थी। जांच में सामने आया कि आरोपी भीमराव कांबले उसे बहला-फुसलाकर एक गौशाला में ले गया, जहां उसके साथ यौन उत्पीड़न किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। घटना की जानकारी मिलते ही पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय जानकारी के आधार पर आरोपी की पहचान की और उसे पुलिस के हवाले कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।

तेज जांच बनी मिसाल

महाराष्ट्र पुलिस ने रिकॉर्ड समय में जांच पूरी करते हुए महज 15 दिनों के भीतर 1,200 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट अदालत में दाखिल की। चार्जशीट में डीएनए रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को शामिल किया गया था। 28 मई को अदालत ने आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए और मामले की रोजाना इन-कैमरा सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई के दौरान 55 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अदालत में पेश किए गए वैज्ञानिक और फोरेंसिक सबूतों को मामले में अहम माना गया।

मौत की सजा पर जोर

विशेष लोक अभियोजक अजय मिसर ने अदालत से कहा कि यह अपराध “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” श्रेणी में आता है और दोषी को अधिकतम सजा दी जानी चाहिए। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि एक मासूम बच्ची के साथ हुई बर्बरता समाज की अंतरात्मा को झकझोर देने वाली है। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपी की उम्र और अन्य परिस्थितियों का हवाला देते हुए नरमी बरतने की मांग की, लेकिन अदालत ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना।

अदालत ने क्या कहा?

25 जून को अदालत ने भीमराव कांबले को अपहरण, दुष्कर्म और हत्या का दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा पर बहस हुई। 29 जून को विशेष न्यायाधीश एस.आर. सालुंखे ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मामले में प्रस्तुत सबूतों की श्रृंखला पूरी तरह स्पष्ट और मजबूत है तथा अपराध की क्रूरता इसे दुर्लभतम मामलों की श्रेणी में रखती है। अदालत ने इसी आधार पर दोषी को मौत की सजा सुनाई।

नसरापुर केस की प्रमुख टाइमलाइन

1 मई 2026: बच्ची का अपहरण, दुष्कर्म और हत्या, आरोपी गिरफ्तार।
2-3 मई 2026: विरोध प्रदर्शन, SIT का गठन।
4-10 मई 2026: राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और परिवार की न्याय की मांग।
16 मई 2026: 1,200 पन्नों की चार्जशीट दाखिल।
28 मई 2026: आरोप तय, फास्ट-ट्रैक ट्रायल शुरू।
21 जून 2026: अंतिम बहस पूरी।
25 जून 2026: आरोपी दोषी करार।
29 जून 2026: अदालत ने सुनाई मौत की सजा

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