
लखनऊ। ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति की सनातन ध्वजवाहिका सपना गोयल की अगुवाई में हरियाली तीज का भव्य आयोजन रजत डिग्री कॉलेज के सामने बने सनातन धाम लॉन परिसर में किया गया। मासिक आध्यात्मिक संगोष्ठी के अंतर्गत आयोजित इस समारोह में ‘भगवान शिव का महा दरबार’ और ‘झूला उत्सव’ मुख्य आकर्षण रहे। आयोजन में शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों से भी करीब 2500 सनातनी महिलाओं को आमंत्रित किया गया था। बड़ी संख्या में मातृशक्तियों ने सावन के पावन झूलों का आनंद लिया और धार्मिक एवं सांस्कृतिक उल्लास में भागीदारी की।
समारोह के दौरान निस्वार्थ भाव से बिना किसी सरकारी अनुदान के समाज सेवा में जुटी कर्मठ महिलाओं को हरियाली पर्व के प्रतीक स्वरूप ‘सनातनी हरा पटका’ भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सपना गोयल ने कहा कि तीजोत्सव केवल फैशन या ग्लैमर का अवसर नहीं, बल्कि सनातनी मातृशक्ति के गौरव और उसकी आध्यात्मिक शक्ति को स्मरण करने का पावन पर्व है। उन्होंने कहा कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। हरियाली तीज माता पार्वती और भगवान शिव के पुनर्मिलन, उनकी अटूट निष्ठा और प्रेम का प्रतीक है। इसलिए इस पर्व को उसी पवित्र भाव और सनातनी महिला शक्ति की गरिमा के साथ मनाया जाना चाहिए।
सामूहिक डमरू नाद और दीप प्रज्ज्वलन बना आकर्षण
कार्यक्रम के दौरान सभी मातृशक्तियों ने एक साथ सामूहिक डमरू नाद किया और हाथों में दीपक लेकर दीप प्रज्ज्वलित किए। एक साथ हजारों महिलाओं द्वारा डमरू नाद और दीप रोशन किए जाने का विहंगम दृश्य कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व राज्य मंत्री डा. योगेश तिवारी भी मौजूद रहे और उन्होंने समाज सेवा में सक्रिय एवं कर्मठ मातृशक्तियों का सम्मान किया।
‘भारत फिर बने विश्व गुरु’ सपना गोयल का संकल्प
सपना गोयल ने कहा कि उनका एकमात्र लक्ष्य संतों और ऋषियों की पावन भूमि भारत को पुन: ‘विश्व गुरु’ के रूप में प्रतिष्ठित करना है। भारत उत्थान के इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति की ओर से प्रतिदिन सुंदरकांड पाठ के साथ प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को आसपास के मंदिरों में सामूहिक सुंदरकांड का आयोजन कराया जा रहा है। उनके अनुसार, सुंदरकांड महा अभियान वर्तमान में उत्तर प्रदेश के 42 जिलों और देश के 10 राज्यों तक पहुंच चुका है।
हजारों महिलाओं की भागीदारी से हुए बड़े सामूहिक सुंदरकांड आयोजन
सपना गोयल की अगुवाई में 10 मार्च 2024 को महिला दिवस के अवसर पर लखनऊ के झूलेलाल घाट पर पांच हजार से अधिक महिलाओं ने सामूहिक सुंदरकांड का भव्य अनुष्ठान किया था। इसके बाद 23 जून 2024 को पावन तीर्थ नैमिषारण्य में भव्य सामूहिक सुंदरकांड महायज्ञ का आयोजन हुआ, जिसमें करीब पांच हजार महिलाओं ने भाग लिया। समिति की ओर से बिना किसी सरकारी मदद के उत्तर प्रदेश के दूरस्थ जिलों तक यात्रा कर बड़े स्तर पर सुंदरकांड पाठ आयोजित किए जाने का दावा किया गया है।
देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों तक पहुंचा सुंदरकांड अभियान
महा तीर्थाटन अभियान के अंतर्गत उत्तराखंड के कोटद्वार स्थित प्राचीन सिद्धबली मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, हर की पौड़ी हरिद्वार, रुड़की महादेव मंदिर, चित्रकूट के रामघाट, प्रयागराज के लेटे हुए हनुमान मंदिर और कानपुर के आनंदेश्वर महादेव मंदिर के गंगाजी घाट परिसर में भी भव्य सुंदरकांड पाठ आयोजित किए जा चुके हैं। मथुरा स्थित भगवान कृष्ण जन्मस्थली मंदिर परिसर में भी डेढ़ हजार से अधिक मातृशक्तियों ने सामूहिक सुंदरकांड का पाठ किया था।
अयोध्या में हर माह हो रहा सुंदरकांड पाठ
समिति के अनुसार, 11 सितंबर 2024 से अयोध्या तीर्थ में प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि परिसर में मासिक सुंदरकांड पाठ का सिलसिला भी शुरू किया गया है। इसी क्रम में आगामी 29 अगस्त को वहां 15वां सामूहिक सुंदरकांड पाठ आयोजित किया जाएगा। आयोजन समिति का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से मातृशक्ति को आध्यात्मिक और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास लगातार जारी है।
‘सेवा परमो धर्म:’ को बनाया सेवा अभियान का आधार
ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति की ओर से धार्मिक आयोजनों के साथ सेवा कार्यों को भी प्राथमिकता दी जा रही है। ‘सेवा परमो धर्म:’ को बीज मंत्र मानते हुए दरिद्र नारायण की सेवा के भाव से सर्दियों में जरूरतमंदों को कंबल वितरित किए जाते हैं। इसके अलावा विभिन्न पावन अवसरों पर भंडारों का आयोजन भी किया जाता है। समिति का कहना है कि धार्मिक चेतना, महिला शक्ति और समाज सेवा को एक साथ आगे बढ़ाना उसके अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।