
गुरुग्राम: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी ब्राह्मण समाज की नाराजगी दूर करने के लिए सक्रिय होती नजर आ रही है। इसी रणनीति के तहत गुरुग्राम में विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद की ओर से आयोजित एक बड़े समन्वय सम्मेलन में देशभर के 120 से अधिक ब्राह्मण संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रतिनिधि शामिल हुए। इस बैठक में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के राजनीतिक समीकरणों पर भी विशेष चर्चा हुई। कार्यक्रम में राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल Kalraj Mishra मुख्य आकर्षण रहे, जिन्हें ब्राह्मण समाज के बीच संवाद बढ़ाने की अहम जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा तेज रही।
अपने संबोधन में कलराज मिश्र ने इस अभियान को “पवित्र यज्ञ” बताते हुए ब्राह्मण समाज से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज हमेशा राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है और अब समय पुनर्जागरण का है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि देश के सभी राज्यों में ‘विप्र कल्याण बोर्ड’ बनाए जाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे ताकि समाज के कमजोर वर्गों को प्रतिनिधित्व और सहायता मिल सके।
विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. सतीश शर्मा ने कहा कि संगठन दिसंबर 2026 तक हर जिले में 500 गरीब ब्राह्मण युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इसके लिए शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा को लेकर साझा न्यूनतम कार्यक्रम भी तैयार किया गया है।
बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री Ashwini Choubey, पूर्व सांसद Ashok Vajpeyi, राज्यसभा सांसद Medha Kulkarni समेत कई प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण वोट बैंक को लेकर बढ़ रही असंतोष की चर्चाओं के बीच BJP की यह रणनीति 2027 चुनाव से पहले अहम मानी जा रही है। गुरुग्राम की यह बैठक आने वाले समय में राज्य की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकती है।