
लखनऊ। प्रदेश के संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह की प्रेरणा, अपर मुख्य सचिव संस्कृति विभाग अमृत अभिजात के मार्गदर्शन और निदेशक, उत्तर प्रदेश संग्रहालय निदेशालय डॉ सृष्टि धवन के निर्देशन में राज्य संग्रहालय, लखनऊ द्वारा शनिवार को विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर ‘हमारी धरोहरें, हमारा गौरव’ विषय पर आधारित एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर संग्रहालय परिसर में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक स्मारकों को प्रदर्शित करती एक आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई। साथ ही भारत और विश्व की धरोहरों पर आधारित प्रश्नोत्तरी एवं चित्रकला प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
विश्व धरोहर दिवस का महत्व और उद्देश्य
प्रतिवर्ष 18 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1982 में इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स द्वारा की गई थी, जिसे 1983 में यूनेस्को ने वैश्विक मान्यता प्रदान की। इस दिवस का उद्देश्य विश्वभर की सांस्कृतिक विविधताओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन हमें उन प्राचीन स्मारकों और विरासत स्थलों के महत्व का स्मरण कराता है, जिन्हें संरक्षित रखना आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है।
प्रदर्शनी में दिखी भारत की ऐतिहासिक धरोहरों की झलक
संग्रहालय द्वारा आयोजित प्रदर्शनी में देश की प्रमुख विश्व धरोहर स्थलों के छायाचित्र प्रदर्शित किए गए। इनमें वर्ष 1983 में यूनेस्को की सूची में शामिल भारत के प्रथम धरोहर स्थल अजंता और एलोरा की गुफाएं, आगरा का किला और ताजमहल से लेकर वर्ष 2024 में शामिल असम के चराईदेव स्थित अहोम राजवंश की टीला-दफन प्रणाली तक की झलक प्रस्तुत की गई। प्रदर्शनी का उद्घाटन डॉ संजय कुमार विस्वाल, निदेशक, प्राणि उद्यान, लखनऊ द्वारा किया गया। बड़ी संख्या में दर्शकों और कला प्रेमियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।

छात्र-छात्राओं में दिखा उत्साह, प्रतियोगिताओं में 267 प्रतिभागियों ने लिया भाग
कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालयी छात्रों के लिए चित्रकला और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य युवा पीढ़ी को भारत की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक स्मारकों और प्राचीन वास्तुकला के प्रति जागरूक करना था। विभिन्न विद्यालयों के कुल 267 छात्र-छात्राओं ने भाग लेकर अपनी रचनात्मकता और ज्ञान का प्रदर्शन किया। चित्रकला प्रतियोगिता में प्रियांश वर्मा ने प्रथम, अक्षत मिश्रा ने द्वितीय तथा राशी शुक्ला ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
वहीं सांत्वना पुरस्कार अथर्व शंकर, काजल यादव, एंजल वर्मा, देवश्री सेन और मरियम शोएब को प्रदान किया गया। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में आराध्या सिंह ने प्रथम, श्रियांश अस्थाना ने द्वितीय और ओजस तिवारी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सांत्वना पुरस्कार आलेख वर्मा, साक्षी सोनकर, यजत उपाध्याय, छविमणि त्रिपाठी और शशांक यादव को दिए गए।

मुख्य अतिथि ने धरोहर संरक्षण पर दिया जोर
कार्यक्रम के समापन पर आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्राणि उद्यान, लखनऊ के निदेशक डॉ संजय कुमार विस्वाल उपस्थित रहे। उन्होंने विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र प्रदान करते हुए कहा कि सांस्कृतिक धरोहरें किसी भी राष्ट्र की पहचान होती हैं और युवा पीढ़ी का इनसे जुड़ाव भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने संग्रहालय की इस पहल की सराहना करते हुए प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
धरोहरों के संरक्षण के लिए सामूहिक जिम्मेदारी जरूरी
इस अवसर पर राज्य संग्रहालय, लखनऊ के निदेशक डॉ विनय कुमार सिंह ने कहा कि विश्व धरोहरें हमारी साझा संस्कृति और इतिहास की अमूल्य पहचान हैं। ये हमें अपने पूर्वजों की कला, कौशल और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देती हैं। उन्होंने सभी से इन धरोहरों के संरक्षण के लिए संकल्प लेने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का सफल आयोजन, अतिथियों का आभार
कार्यक्रम का संयोजन डॉ मीनाक्षी खेमका, सहायक निदेशक (सज्जा कला) द्वारा किया गया। वहीं इस दौरान निदेशक ने मुख्य अतिथि, शिक्षकों, प्रतिभागियों व अन्य लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संग्रहालय एवं प्राणि उद्यान के कई अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।