
नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने 26 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की बैठक में भाग लिया। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता वाली इस बैठक में शहरी चुनौती कोष (Urban Challenge Fund) पर विस्तृत चर्चा हुई।
विक्रमादित्य सिंह ने बैठक में बताया कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में मजबूत अधोसंरचना विकसित करने के लिए शहरी चुनौती कोष के तहत लगभग 5400 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित की हैं। उन्होंने छोटे शहरी स्थानीय निकायों की सीमित राजस्व क्षमता को देखते हुए राज्य के लिए 1350 करोड़ रुपये केंद्रीय हिस्सेदारी के रूप में प्रदान करने का आग्रह किया।
मंत्री ने पहाड़ी राज्य की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, 90% पहाड़ी क्षेत्र और 67% वन क्षेत्र होने के कारण विकास कार्यों में आने वाली चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों के कारण निजी क्षेत्र की भागीदारी बहुत कम होती है, इसलिए हिमाचल जैसे विशेष श्रेणी के पहाड़ी राज्यों के लिए शहरी चुनौती कोष में विशेष छूट, जनसंख्या मानदंडों में छूट और फंडिंग पैटर्न में बदलाव की जरूरत है।
विक्रमादित्य सिंह ने परियोजना लागत के 50% राशि को बॉन्ड, बैंक ऋण या PPP मॉडल से जुटाने की अनिवार्यता को कम करने, केंद्रीय सहायता का अनुपात बढ़ाने और वायबिलिटी गैप फंडिंग देने का भी आग्रह किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन संवर्धन, रोजगार सृजन और जीवन स्तर सुधार के लिए पर्यटन-आधारित शहरी परियोजनाओं पर जोर दिया। प्रस्तावित परियोजनाओं में शहरों के भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों का पुनर्विकास, स्मार्ट पार्किंग, हाइड्रोलिक पार्किंग, स्काईवॉक, हेरिटेज सौंदर्यीकरण, इंटीग्रेटेड वेलनेस इको-टूरिज्म सेंटर, भूमिगत यूटिलिटी डक्ट, क्लस्टर आधारित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर शामिल हैं।
केंद्र सरकार ने हिमाचल से 1100-1200 करोड़ रुपये की प्राथमिकता वाली परियोजनाएं प्रस्तुत करने को कहा है, जिसमें 25% केंद्रीय सहायता दी जाएगी।मंत्री ने कहा कि शहरी चुनौती कोष केवल वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि सतत शहरी विकास, पर्यटन को बढ़ावा और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम है। बैठक में निदेशक शहरी विकास डॉ. नीरज कुमार भी मौजूद रहे।