लोकसभा का विस्तार: 850 सीटों का प्रस्ताव, उत्तर-दक्षिण संतुलन पर बहस

नई दिल्ली: लोकसभा में पेश हुए तीनों विधेयकों को लेकर इंडिया गठबंधन ने अपना पक्ष रखते हुए महिला आरक्षण् विधेयक का समर्थन किया लेकिन परिसीमन को लेकर उसने आपत्ति जाहिर की. कांग्रेस, द्रमुक, टीएमसी और समाजवादी सहित अन्य घटक दलों के साथ के साथ हुई बैठक में फैसला लिया गया कि गठबंधन महिला आरक्षण के पक्ष में वोट करेगा लेकिन डिलिमिटेशन यानी परिसीमन के खिलाफ जाएगा.
कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने कहा, “महिलाओं के लिए आरक्षण तो ठीक है, लेकिन जब 2023 में बिल पास हुआ तब ऐसे प्रावधान क्यों नहीं जोड़े गए? अब अचानक परिसीमन लाकर संघीय ढांचे को कमजोर किया जा रहा है।”
उन्होने दक्षिणी राज्यों को लेकर सवाल कि जिन राज्यो ने जनसंख्या नियंत्रण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की है परिसीमन की वजह से उनकी राजनीतिक ताकत घट जाएगी जबकि इसके ठीक उलट उतर के राज्यों की ताकत बढ़ेगी. द्रमुक और अन्य दक्षिणी दलों का तर्क है कि 2011 जनगणना के आधार पर परिसीमन से दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व 24% से घटकर 20% रह सकता है।
जॉन ब्रिटास (CPI-M) ने कहा, “परिसीमन से उत्तर में 200 से ज्यादा सीटें बढ़ेंगी, दक्षिण में सिर्फ 65। प्रतिशत में समानता हो, लेकिन पूर्ण संख्या में दक्षिण कमजोर पड़ेगा। यह संघीय संतुलन बिगाड़ेगा।”
राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने भी परिसीमन को “राजनीतिक मंशा” बताया। विपक्ष का मुख्य मुद्दा है कि आरक्षण की आड़ में सरकार 2029 चुनाव से पहले सीटों का पुनर्गठन कर अपना फायदा उठाना चाहती है, खासकर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों को देखते हुए।
उन्होंने मांग की कि मौजूदा 543 सीटों पर ही आरक्षण लागू किया जाए और परिसीमन पर अलग से चर्चा रखी जाए।
विपक्ष ने यह भी कहा कि OBC महिलाओं के लिए अलग कोटा की मांग पहले से लंबित है, जिसे सरकार ने नजरअंदाज किया। कुछ सदस्यों ने कहा कि “महिलाओं को अधिकार दो, लेकिन दक्षिण को सजा मत दो।”
महिला आरक्षण लंबे समय से लंबित मुद्दा रहा है। 1996 से कई बार प्रयास हुए, लेकिन 2023 में मोदी सरकार ने इसे पास कराया। अब 2029 तक लागू करने की कोशिश है क्योंकि महिलाओं की संसद में भागीदारी वर्तमान में मात्र 14-15% के आसपास है। ऐसा माना जा रहा है कि इससे नीति-निर्माण में लिंग संतुलन बेहतर होगा – शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा जैसे मुद्दों पर ज्यादा संवेदनशील कानून बन सकते हैं।
दूसरी ओर, परिसीमन का मुद्दा वास्तव में जटिल है। 1976 से फ्रीज जनसंख्या आधारित प्रतिनिधित्व दक्षिणी राज्यों (जिन्होंने परिवार नियोजन सफल किया) को नुकसान पहुंचा सकता है। यदि सीटें बढ़ाई जाती हैं तो सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई राज्य अपनी मौजूदा ताकत न खोए। सरकार का आश्वासन है कि आनुपातिक वृद्धि होगी, लेकिन विपक्ष को डेटा और स्पष्ट फॉर्मूला चाहिए।
सदन में आज की चर्चा शुक्रवार को भी जारी रहेगी, वोटिंग की संभावना है।