
लखनऊ। लखनऊ में पुलिस और आमजन के बीच संवाद को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और विश्वासपूर्ण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। रिजर्व पुलिस लाइन स्थित संगोष्ठी सदन में पुलिस–नागरिक संवाद में इमोशनल इंटेलिजेंस की भूमिका विषय पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) अपर्णा कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) बबलू कुमार और पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) अमित कुमावत के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जबकि संचालन सहायक पुलिस आयुक्त (महिला अपराध/ट्रेनिंग सेल) सौम्या पाण्डेय के पर्यवेक्षण में किया गया। कार्यशाला में कुल 81 पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों ने भाग लिया।
इस विशेष कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को नागरिकों से संवाद के दौरान भावनात्मक समझ, संवेदनशीलता और व्यवहारिक दक्षता के प्रति प्रशिक्षित करना था। प्रशिक्षण के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया कि पुलिसकर्मी तनावपूर्ण और संवेदनशील परिस्थितियों में संयमित, सहानुभूतिपूर्ण और प्रभावी संवाद स्थापित कर सकें। इससे न केवल आमजन का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि पुलिस और समाज के बीच सहयोग भी मजबूत होगा।

विशेषज्ञों ने दिए व्यवहारिक और मनोवैज्ञानिक प्रशिक्षण
प्रशिक्षण सत्र का संचालन लखनऊ विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंजली मिश्रा और डॉ. हरीम फातिमा नोमानी द्वारा किया गया। उन्होंने इमोशनल इंटेलिजेंस के विभिन्न आयामों पर विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पुलिसकर्मियों के लिए अपनी और आमजन की भावनाओं को समझना अत्यंत आवश्यक है। इससे वे संवेदनशील परिस्थितियों में बेहतर निर्णय ले सकते हैं और संतुलित प्रतिक्रिया दे सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान भावनात्मक प्रबंधन, तनाव नियंत्रण और सकारात्मक संवाद स्थापित करने के व्यावहारिक तरीके भी साझा किए गए।
संवाद कौशल से लेकर जनसुनवाई तक, कई विषयों पर प्रशिक्षण
कार्यशाला में प्रतिभागियों को संवाद कौशल, व्यवहार प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन और जनसंपर्क से जुड़े विभिन्न विषयों पर तकनीकी और व्यवहारिक जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में इमोशनल इंटेलिजेंस की अवधारणा, तनावपूर्ण परिस्थितियों में नियंत्रण, नागरिकों से संवेदनशील संवाद, कम्युनिटी पुलिसिंग में जनविश्वास निर्माण और शिकायत निस्तारण के दौरान सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार जैसे अहम बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

केस स्टडी और व्यावहारिक उदाहरणों से मिला अनुभव
प्रशिक्षण के दौरान वास्तविक जीवन से जुड़े केस स्टडी और उदाहरणों के माध्यम से पुलिसकर्मियों को व्यवहारिक समझ विकसित करने का अवसर मिला। प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग के लिए तैयार किया गया, जिससे वे मौके पर बेहतर निर्णय ले सकें।
भविष्य में भी जारी रहेंगे ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम
पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ ने संकेत दिया है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य पुलिसिंग को अधिक संवेदनशील, प्रभावी और जनोन्मुख बनाना है, जिससे समाज में विश्वास और सुरक्षा का माहौल मजबूत हो सके।

पुलिसिंग में संवेदनशीलता और दक्षता की दिशा में बड़ा कदम
यह कार्यशाला पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी। इससे पीड़ितों को त्वरित और समुचित सहायता मिलने की संभावना बढ़ेगी, साथ ही पुलिस और अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, जो न्याय प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा।