
गोला गोकर्णनाथ (खीरी)। हिन्दी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर नगर पालिका परिषद गोला के सभागार में आयोजित एक गोष्ठी अब चर्चा और विवाद का विषय बन गई है। आल इंडिया प्रेस जर्नलिस्ट एसोसिएशन (एप्जा) के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में पत्रकारों के बजाय प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को सम्मानित किए जाने पर स्थानीय पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने सवाल उठाए हैं।
जानकारी के अनुसार 30 मई को हिन्दी पत्रकारिता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष विजय शुक्ला, एसडीएम गोला प्रतीक्षा त्रिपाठी, तहसीलदार भीमचंद तथा कोतवाली प्रभारी अम्बर सिंह को मंच पर फूल-माला पहनाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आयोजन को लेकर बहस तेज हो गई है।
आलोचकों का कहना है कि हिन्दी पत्रकारिता दिवस का उद्देश्य पत्रकारिता के इतिहास, संघर्ष, समर्पण और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में पत्रकारों के योगदान को सम्मानित करना है। ऐसे में पत्रकारों की अपेक्षा अधिकारियों को सम्मानित किया जाना आयोजन की मूल भावना से भटकाव के रूप में देखा जा रहा है।
एक वरिष्ठ स्थानीय पत्रकार ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि 30 मई का दिन हिन्दी के प्रथम समाचार पत्र “उदन्त मार्तण्ड” के प्रकाशन की स्मृति में मनाया जाता है। यह दिन उन पत्रकारों के संघर्ष और साहस को याद करने का अवसर है जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी जनहित की आवाज बुलंद की। ऐसे अवसर पर पत्रकारों की उपेक्षा स्वाभाविक रूप से निराशा पैदा करती है।
विवाद का एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि नगर के कई वरिष्ठ और प्रतिष्ठित पत्रकार कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे। स्थानीय स्तर पर चर्चा रही कि पत्रकारिता दिवस के मंच को पत्रकारों के सम्मान और संवाद का माध्यम बनाने के बजाय अधिकारियों के सम्मान तक सीमित कर दिया गया।
सोशल मीडिया पर भी कार्यक्रम को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई लोगों ने सवाल उठाया कि यदि आयोजन हिन्दी पत्रकारिता दिवस का था तो सम्मान के केंद्र में पत्रकार क्यों नहीं रहे। वहीं कुछ लोगों ने इसे पत्रकारों और प्रशासन के बीच समन्वय का प्रयास बताया, लेकिन अधिकांश प्रतिक्रियाओं में पत्रकारों की अनदेखी पर चिंता व्यक्त की गई।
हिन्दी पत्रकारिता दिवस भारतीय पत्रकारिता की उस गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है जिसने समाज को जागरूक करने, लोकतंत्र को मजबूत बनाने और जनहित के मुद्दों को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में पत्रकारिता दिवस के आयोजनों में पत्रकारों को प्राथमिकता दिए जाने की मांग जोर पकड़ रही है।
फिलहाल यह आयोजन पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और पत्रकारिता जगत के कई लोग इसे भविष्य के लिए एक गंभीर सीख के रूप में देख रहे हैं कि पत्रकारिता के पर्व पर कलमकारों का सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।