
नई दिल्ली/अमर भारती। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी के आवास पर आयोजित पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की अहम बैठक के बाद संगठन में कई बड़े बदलावों का ऐलान किया गया है। पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी ने इन नियुक्तियों की जानकारी देते हुए कहा कि यह फेरबदल संगठन को और मजबूत बनाने तथा मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किया गया है।
टीएमसी में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल
पार्टी की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, वरिष्ठ नेता डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन को राष्ट्रीय संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया है। दोनों नेता राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ मिलकर संगठनात्मक गतिविधियों और पार्टी के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। स्वास्थ्य कारणों के चलते प्रदेश नेतृत्व में भी बदलाव किया गया है। पश्चिम बंगाल टीएमसी अध्यक्ष सुब्रत बख्शी की अस्वस्थता को देखते हुए चंद्रिमा भट्टाचार्य को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं संगठन को मजबूत बनाने के लिए साजिदा अहमद और नैना बंद्योपाध्याय समेत कई नेताओं को उपाध्यक्ष बनाया गया है।
डेरेक-डोला को नई जिम्मेदारी
बैठक के दौरान पार्टी के विभिन्न मोर्चों और संगठनों में भी नई नियुक्तियों की घोषणा की गई। युवा तृणमूल कांग्रेस की जिम्मेदारी पहले की तरह सायोनी घोष के पास रहेगी। माला रॉय को अखिल भारतीय तृणमूल महिला कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि छात्र संगठन की कमान प्रियंका अधिकारी को सौंपी गई है। पार्टी की मीडिया और संचार रणनीति को मजबूत करने के लिए कल्याण बनर्जी और डेरेक ओ’ब्रायन को राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया गया है। वहीं कुणाल घोष राज्य स्तर पर पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता के रूप में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे।
चंद्रिमा बनीं प्रदेश अध्यक्ष
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पार्टी के भीतर गुटबाजी और आंतरिक मतभेदों की चर्चाएं तेज हैं। ममता बनर्जी के आवास पर आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में कई वरिष्ठ विधायक और सांसद मौजूद रहे। बैठक में पार्टी की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, संगठनात्मक मजबूती और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद कल्याण बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में बागी नेता रितब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने इस नियुक्ति को अवैध बताते हुए कहा कि टीएमसी इसे स्वीकार नहीं करती और इसके खिलाफ सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में कानूनी चुनौती दी जाएगी।
रितब्रत की नियुक्ति पर विवाद
उन्होंने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि टीएमसी कार्यकर्ताओं को राजनीतिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज कथित झूठे मामलों और हिंसा की घटनाओं के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रखेगी। गौरतलब है कि निष्कासित नेता रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के नेतृत्व वाले बागी गुट ने विधानसभा में 58 विधायकों के समर्थन का दावा किया है। इस गुट ने नेता प्रतिपक्ष के लिए पार्टी नेतृत्व की पसंद शोभनदेव चट्टोपाध्याय का विरोध किया था।
बागी गुट से बढ़ी हलचल
रितब्रत बनर्जी का दावा है कि उनके गुट को विधानसभा नियमों के तहत मुख्य विपक्षी दल के रूप में मान्यता मिली है। उन्होंने कहा कि उनका समूह व्यक्तिगत नेतृत्व नहीं बल्कि सामूहिक निर्णय की भावना से काम कर रहा है और वे चाहते हैं कि ममता बनर्जी भविष्य में भी मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। टीएमसी की यह बैठक और उसके बाद हुए संगठनात्मक बदलाव आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं।
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