होर्मुज स्ट्रेट खुलने की संभावित डील से वैश्विक तेल बाजार में राहत की उम्मीद है। भारत समेत दुनिया के कई देशों को कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों में फायदा मिलेगा।

नई दिल्ली/अमर भारती। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हुए संघर्ष के बाद बंद हुए होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अब राहत की खबरें सामने आ रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में घोषित संभावित समझौते ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में उम्मीद जगा दी है। उन्होंने अपने बयान में कहा, “दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू करो, तेल को बहने दो!” अब शुक्रवार को जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने की संभावना है। यदि यह समझौता लागू होता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
दुनिया के 20% तेल पर असर डालता है होर्मुज
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इस जलमार्ग के बंद होने से सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों से सप्लाई बाधित हो गई थी। अब इसके फिर से खुलने की संभावना से वैश्विक बाजार में स्थिरता की उम्मीद बढ़ी है।
तेल बाजार में तुरंत दिखा असर
समझौते की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में तेजी से गिरावट दर्ज की गई।
- ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 4.55% गिरकर 83.36 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।
- एशियाई शेयर बाजारों में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सप्लाई पूरी तरह बहाल होती है, तो तेल कीमतों में और नरमी आ सकती है।
सप्लाई चेन पर गहरा असर
होर्मुज बंद होने के बाद एशिया के कई देशों को गंभीर ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा था।
- फिलीपींस ने राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित किया।
- जापान और दक्षिण कोरिया ने अपने रणनीतिक तेल भंडार का उपयोग किया।
- यूरोप और अमेरिका में ईंधन कीमतों और हवाई किराए में तेज बढ़ोतरी देखी गई।
अब मार्ग खुलने की संभावना से वैश्विक सप्लाई चेन फिर से सक्रिय हो सकती है।
टैंकरों की वापसी और व्यापार बहाली
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद फारस की खाड़ी में फंसे सैकड़ों टैंकर फिर से अपनी यात्रा शुरू कर देंगे। इससे:
- सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और कतर से तेल निर्यात सामान्य होगा
- एलएनजी (Liquefied Natural Gas) की सप्लाई बहाल होगी
- पेट्रोकेमिकल और फर्टिलाइजर उद्योग को राहत मिलेगी
- नेफ्था और कुकिंग गैस की आपूर्ति फिर से शुरू होगी
यह पूरी प्रक्रिया वैश्विक ऊर्जा और कृषि आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर करने में मदद करेगी।
कृषि और खाद्य सुरक्षा पर असर
सप्लाई बाधित होने से एशिया में मई-जुलाई बुवाई सीजन पर पहले ही असर पड़ चुका है। फर्टिलाइजर की कमी से फसल उत्पादन पर खतरा बढ़ा है। एशियन डेवलपमेंट बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट अल्बर्ट पार्क के अनुसार, “इसका सबसे बड़ा असर साल के अंत तक दिखाई देगा, जब उत्पादन में गिरावट साफ दिख सकती है।”
कीमतों में गिरावट लेकिन सुधार धीमा
वुड मैकेंजी के विशेषज्ञों के अनुसार, शिपिंग और ऊर्जा बाजार को सामान्य होने में समय लगेगा।
- मार्च में तेल की कीमतें 100 डॉलर तक पहुंच गई थीं
- इसका पूरा प्रभाव 3 से 6 महीने बाद दिखाई देगा
- एलएनजी कीमतों में भी देरी से गिरावट आएगी
विशेषज्ञ मानते हैं कि सप्लाई चेन पूरी तरह सामान्य होने में अगले साल तक का समय लग सकता है।
भारत को मिलेगा बड़ा फायदा
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक है। होर्मुज खुलने से भारत को कई स्तरों पर लाभ मिलेगा:
- कच्चे तेल की सप्लाई स्थिर होगी
- आयात लागत में कमी आएगी
- महंगाई पर दबाव घटेगा
- रुपये को मजबूती मिलेगी
- करंट अकाउंट डेफिसिट में सुधार होगा
इसके अलावा, ट्रांसपोर्ट, एविएशन, पेट्रोकेमिकल, फर्टिलाइजर और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी राहत मिलेगी। एक उद्योग अधिकारी के अनुसार, “फ्यूल कंपनियों को एक तिमाही में इतना नुकसान हुआ जितना पूरे साल की कमाई के बराबर था।”
लेकिन जोखिम अभी भी खत्म नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि यह राहत स्थायी नहीं मानी जा सकती। यदि मध्य पूर्व में तनाव फिर से बढ़ता है, तो सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजार फिर से प्रभावित हो सकते हैं। होर्मुज स्ट्रेट के खुलने की संभावित डील वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत की बड़ी खबर है। इससे तेल बाजार, शिपिंग इंडस्ट्री और सप्लाई चेन में स्थिरता आने की उम्मीद है। हालांकि, पूरी तरह सामान्य स्थिति बहाल होने में समय लगेगा और वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति इस पर निर्णायक भूमिका निभाएगी।
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