कोचिंग में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की सूचना, मौके पर उच्चाधिकारी, राहत-बचाव कार्य जारी

उत्तर प्रदेश: लखनऊ में एक प्राइवेट कोचिंग संस्थान में लगी भीषण आग ने पूरे उत्तर प्रदेश में हड़कंप मचा दिया है। अलीगंज थाना क्षेत्र के पुरनिया इलाके में स्थित उषा मेहता मार्ग (बी/2, सेक्टर डी) पर चल रही कोचिंग में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की सूचना मिली। घटना में कई छात्र-छात्राएं फंस गए, कुछ ने छत और छज्जे से कूदकर अपनी जान बचाई। मौके पर उच्च अधिकारी पहुंचे और राहत-बचाव कार्य तेजी से चलाया जा रहा है।
घटना का विवरण: कैसे लगी आग?
रविवार की शाम को अलीगंज के इस कोचिंग सेंटर में अचानक आग भड़क उठी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ग्राउंड फ्लोर पर स्थित पेट क्लिनिक में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग शुरू हुई, जो तेजी से ऊपरी मंजिलों पर फैल गई। कोचिंग मुख्य रूप से पहली और दूसरी मंजिल पर संचालित हो रही थी, जहां करीब 10 छात्र पढ़ रहे थे। आग लगते ही पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई। काले धुएं के गुबार और लपटों ने इमारत को घेर लिया। छात्रों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल सका क्योंकि नीचे की दुकान से आग तेजी से ऊपर की ओर बढ़ रही थी। कई छात्रों ने छज्जे से कूदकर जान बचाई, जिससे उन्हें चोटें आईं। एक चश्मदीद ने खुद को सेकेंड फ्लोर से रेस्क्यू किया और घटना की जानकारी दी।
मौत और घायलों की संख्या: अपडेट क्या कहते हैं?
घटना की शुरुआती रिपोर्ट में 2 मौतों की खबर आई, जिनमें धुएं से दम घुटने की वजह बताई गई। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों और लोकल रिपोर्ट्स में 4 से 6 मौतों का जिक्र किया गया। एंबुलेंस से डेड बॉडी निकालने के दृश्य भी देखे गए। पीछे की दीवार तोड़कर दो शव निकाले गए। हालांकि, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि सभी बच्चों को बचा लिया गया है। कुछ बच्चे छज्जे से कूदने के कारण घायल हुए हैं। फायर ब्रिगेड और प्रशासन का कहना है कि अंदर जांच चल रही है और कोई बच्चा फंसा नहीं है। मौतों की पुष्टि अभी आधिकारिक रूप से नहीं हुई है। घायलों को केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर और बर्न यूनिट में भर्ती कराया जा रहा है, जहां हाई अलर्ट घोषित किया गया है।
बड़े अधिकारी पहुंचे मौके पर
इस गंभीर घटना पर प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया। उत्तर प्रदेश के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम), डीजीपी, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, डीएम समेत कई उच्च अधिकारी मौके पर पहुंचे। डिप्टी सीएम ने कहा, “हमारी प्राथमिकता बच्चों की जान बचाना है। सेकेंड फ्लोर की दीवार तोड़कर रेस्क्यू कार्य चलाया जा रहा है।”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी घटना का संज्ञान लिया और जिला प्रशासन व दमकल विभाग को तुरंत मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए। सीएम ने राहत-बचाव कार्य में तेजी लाने, घायलों को उचित उपचार उपलब्ध कराने और स्थिति की सतत मॉनिटरिंग करने के आदेश जारी किए।
रेस्क्यू ऑपरेशन: फायर ब्रिगेड की मशक्कत
फायर ब्रिगेड की 8 गाड़ियों ने आग पर काबू पा लिया। टीम ने इमारत के अंदर घुसकर जांच-पड़ताल शुरू की। छत पर ताला लगा होने की वजह से छात्र छत तक नहीं पहुंच सके, जिससे दम घुटने का खतरा बढ़ गया। फायर फाइटर्स के आने से पहले ही आग विकराल रूप ले चुकी थी। कुछ बच्चों के कपड़ों में आग लग गई थी, जिसके कारण वे छज्जे से कूद पड़े।स्थानीय लोगों ने भी मदद की। पुलिस और दमकल को सूचना देने के साथ-साथ उन्होंने खुद राहत कार्य में हाथ बंटाया। प्रशासन ने आस-पास का इलाका खाली करा लिया ताकि कोई और हादसा न हो।
कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा की कमी?
यह घटना एक बार फिर कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा मानकों पर सवाल उठा रही है। कई कोचिंगें पुरानी इमारतों में चल रही हैं, जहां फायर सेफ्टी उपकरण, इमरजेंसी एग्जिट और नियमित मॉक ड्रिल की कमी देखी जाती है। छत पर ताला लगे होने जैसी लापरवाही छात्रों की जान के साथ खिलवाड़ साबित हुई। उत्तर प्रदेश सरकार पहले भी कोचिंग संस्थानों पर सख्ती कर चुकी है, लेकिन इस घटना के बाद फायर ऑडिट और सेफ्टी चेकिंग को लेकर नई गाइडलाइंस जारी होने की संभावना है।
प्रभावित परिवार और समाज पर असर
जिन छात्रों ने छज्जे से कूदकर जान बचाई, वे गंभीर चोटों के साथ अस्पताल में हैं। परिवारों में मातम का माहौल है। जो बच्चे सुरक्षित निकले, वे भी सदमे में हैं। लखनऊ जैसे शहर में जहां हजारों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंगों पर निर्भर हैं, ऐसी घटनाएं भरोसे को तोड़ती हैं।
सीएम योगी का संदेश और आगे की कार्रवाई
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। सरकार की ओर से मुआवजे और सहायता का ऐलान होने की उम्मीद है। पुलिस और फॉरेंसिक टीम आग के कारणों की गहन जांच कर रही है। शॉर्ट सर्किट को मुख्य वजह बताया जा रहा है, लेकिन इमारत की सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही भी सामने आ सकती है।
सफेद हाथी साबित हो रहे फायर सेफ्टी डिपार्टमेंट
लखनऊ अलीगंज कोचिंग आग की घटना ने एक बार फिर साबित किया कि सार्वजनिक स्थानों खासकर शिक्षा संस्थानों में फायर सेफ्टी कितनी जरूरी है। प्रशासन द्वारा बचाव कार्य सराहनीय रहा, लेकिन मौतों की पुष्टि और घायलों की स्थिति पर नजर रखना होगा। अभिभावकों को भी अपनी बच्चों की कोचिंग सेंटर की सुरक्षा जांचनी चाहिए। (amarbharti)
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