अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में चढ़ावे की गिनती, निगरानी समिति, कर्मचारियों की नियुक्ति और वित्तीय रिकॉर्ड में कई गड़बड़ियों का जिक्र किया गया है।

नई दिल्ली/अमर भारती। राम मंदिर में कथित चढ़ावा अनियमितता और संभावित गड़बड़ियों के मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में चढ़ावे की गणना, निगरानी व्यवस्था, कर्मचारियों की नियुक्तियों और वित्तीय प्रक्रियाओं को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि SIT ने स्पष्ट किया है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह साबित करना संभव नहीं है कि चढ़ावा चोरी हुआ या यदि हुआ तो उसकी वास्तविक राशि कितनी थी।
चढ़ावा प्राप्ति के तीन प्रमुख स्रोत
SIT की जांच में सामने आया कि राम मंदिर में चढ़ावा मुख्य रूप से तीन माध्यमों से प्राप्त होता है—हुंडी (दान पात्र), ऑनलाइन दान और कैश काउंटर पर रसीद के माध्यम से जमा राशि। जांच के दौरान ट्रस्ट के बैंक खातों, वित्तीय दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ के आधार पर चढ़ावे की प्रक्रिया का अध्ययन किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, औसतन हर महीने लगभग 25 लाख श्रद्धालु राम मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वहीं महाकुंभ के दौरान एक माह में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़कर लगभग एक करोड़ तक पहुंच गई थी।
श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी, लेकिन चढ़ावा कम दिखा
SIT ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है कि औसतन प्रति श्रद्धालु 15 से 18 रुपये का चढ़ावा दर्ज हुआ। हालांकि कई ऐसे महीने भी सामने आए, जिनमें श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हुई लेकिन दर्ज चढ़ावा अपेक्षाकृत कम दिखाई दिया। इस विसंगति को लेकर पूछताछ में संबंधित अधिकारियों ने जांच दल को बताया कि उन अवधियों में श्रद्धालुओं द्वारा नोटों की अपेक्षा सिक्कों का अधिक दान किया गया था। बावजूद इसके, बैंक स्टेटमेंट और अन्य उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण में चढ़ावे की राशि में असामान्य उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जिस पर SIT ने सवाल उठाए हैं।
सोना-चांदी और अन्य दान का स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रति श्रद्धालु औसत चढ़ावे की गणना में सोने-चांदी के आभूषण, अनाज, तेल, घी और अन्य वस्तुओं के रूप में प्राप्त दान को शामिल नहीं किया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि इन दानों के संबंध में पर्याप्त दस्तावेजी प्रमाण और सत्यापित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे, जिससे उनकी सटीक गणना संभव नहीं हो सकी।
निगरानी समिति और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल
SIT ने चढ़ावे की गिनती और निगरानी से जुड़ी व्यवस्था में भी कमियां पाई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, चढ़ावा निगरानी समिति की कार्यप्रणाली में लापरवाही के संकेत मिले हैं। साथ ही कुछ ऐसे कर्मचारी भी मंदिर में कार्यरत पाए गए जिनकी नियुक्ति या जिम्मेदारियों का कोई स्पष्ट लिखित आदेश उपलब्ध नहीं था। जांच के दौरान ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सहित कई पदाधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। हालांकि रिपोर्ट में किसी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है और विस्तृत जांच अभी जारी है।
पांच वर्षों में कर्मचारियों की संपत्ति बढ़ने का उल्लेख
SIT ने अपनी जांच के दौरान 60 से अधिक लोगों से पूछताछ की। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ कर्मचारियों की आय और संपत्ति में पिछले पांच वर्षों के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। जांच दल ने इस पहलू को भी आगे की विस्तृत जांच के लिए महत्वपूर्ण माना है।
CCTV फुटेज और दस्तावेजों से उठे नए प्रश्न
रिपोर्ट में CCTV फुटेज, बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का हवाला देते हुए कई गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। SIT का कहना है कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह निश्चित रूप से बताना संभव नहीं है कि कुल चढ़ावा कितना प्राप्त हुआ और उसका प्रत्येक स्रोत क्या था। इसी कारण कथित चढ़ावा चोरी की राशि या उसके स्वरूप को प्रमाणित करना फिलहाल संभव नहीं है।
ट्रस्ट को मजबूत करने के सुझाव
SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में राम मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं मजबूत बनाने के लिए कई सुझाव भी दिए हैं। जांच दल ने कहा है कि विस्तृत जांच जारी है और निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण रिपोर्ट भी सरकार को सौंपी जाएगी।
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